Delta Force: वेनेजुएला में यूएस ऑर्मी के एक्शन के बाद एक बार फिर अमेरिकी सेना की सबसे गोपनीय और ताकतवर डेल्टा फोर्स सुर्खियों में है. यूएस की डेल्टा फोर्स ने वेनेजुएला में किसी हॉलीवुड और साइंस फिक्शन मूवी तरह से एक्शन लिया और पलक झपकते ही अपने टारगेट को अंजाम दे दिया. जब तक बाकी दुनिया ये समझ पाती कि वेनेजुएला में क्या चल रहा है? तब तक अमेरिका की चपल डेल्टा फोर्स निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को लेकर अमेरिका पहुंच चुकी थी.
इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात का दावा किया कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी अमेरिका के कब्जे में है. इसके बाद से हर किसी के जेहन में लगातार यही सवाल कौंध रहा है कि आखिर ये डेल्टा फोर्स है क्या? इसकी भूमिका क्या होती है और इसे अमेरिका ने अब तक किन बड़े अभियानों के लिए इस्तेमाल किया है.
सीक्रेट मिलट्री यूनिट
डेल्टा फोर्स सिर्फ अमेरिका नहीं बल्कि पूरी दुनिया की सबसे खतरनाक और सीक्रेट मिलिट्री यूनिट्स में शामिल है. हालांकि, इसका आधिकारिक नाम फर्स्ट स्पेशल फोर्सेज ऑपरेशनल डिटैचमेंट डेल्टा है, लेकिन इसे आम बोलचाल में डेल्टा फोर्स कहा जाता है. अमेरिकी सेना के जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड (JSOC) के तहत डेल्टा फोर्स काम करने वाली टियर-1 की स्पेशल मिशन यूनिट है. इस यूनिट का काम बेहद गोपनीय ऑपरेशन को करना होता है, जिसके बारे अक्सर मीडिया और कई बार तो अमेरिकी सांसदों तक को खबर नहीं होती है. डेल्टा फोर्स का प्रमुख काम आतंकवाद के खिलाफ अभियान चलाना है. इसमें वो दुश्मन इलाके से बंधकों को छुड़ाने के साथ-साथ खतरनाक आतंकियों को पकड़ने या फिर उनको मार गिराने का काम भी करते हैं. डेल्टा फोर्स दुश्मन के इलाके में घुसकर चुपचाप सटीक हमला करने के लिए जानी जाती है.
कैसे बनती है डेल्टा फोर्स ?
डेल्टा फोर्स का गठन ब्रिटेन की मशहूर स्पेशल फोर्स SAS की तर्ज पर किया गया था. इसके पीछे कर्नल चार्ल्स बेकविथ का विजन अहम माना जाता है. क्योंकि आतंकवाद में बढ़ोतरी को देखते हुए अमेरिका को एक स्पेशल एंटी-टेरर फोर्स की जरूरत थी. डेल्टा फोर्स का मुख्य बेस फोर्ट ब्रैग नॉर्थ कैरोलिना में है. जहां, इसमें करीब 2000 सैनिक शामिल हैं. हालांकि, इनमें से 300 से 400 सैनिक ही ऑपरेशनल स्क्वाड्रन में तैनात रहते हैं. बाकी बैकअप के तौर पर काम करते हैं. डेल्टा फोर्स में कोई सीधी भर्ती नहीं होती. इसके लिए सेना के रेंजर्स और स्पेशल फोर्सेज से ही जवानों को चुना जाता है. डेल्टा के लिए चुने गए सभी जवानों का मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद मजबूत होना जरूरी होता है. क्योंकि डेल्टा की चयन प्रक्रिया इतनी कठिन होती है कि लगभग 90 प्रतिशत उम्मीदवार इसको पास नहीं कर पाते हैं. इसका सबसे बड़ा कारण द लॉन्ग वॉक भी है. जिसमें जवानों को भारी वजन का बैग लेकर लंबी दूरी को तय समय में पूरा करना होता है.
क्यों खास है डेल्टा फोर्स?
डेल्टा फोर्स ने कई बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया है. इनमें 2019 में आतंकी सरगना अबू बक्र अल-बगदादी के खिलाफ ऑपरेशन भी शामिल हैं. डेल्टा फोर्स आम युद्ध नहीं लड़ती है. क्योंकि, इसका इस स्पेशल फोर्स को उस मैदान में उतारा जाता है जहां सबसे ज्यादा जोखिम होता है. डेल्टा फोर्स के जवान सटीक निशाने बाजी के अलावा क्लोज फाइट में माहिर होते हैं, जिसकी वजह से किसी भी खतरनाक मिशन के दौरान इनको कम जान माल का कम नुकसान होता है. इतना ही नहीं डेल्टा फोर्स के जवान रेल से लेकर जहाज तक में ऑपरेशन करने के लिए ट्रेंड होते हैं.
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4 weeks ago
