₹ 30 के लिए मां की हत्‍या: फिर जज से बोला बेटा- 'थप्‍पड़ मारने पर मैं खो बैठा था आपा', जज ने सीधा कर दिया

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Last Updated:February 02, 2026, 18:11 IST

Guwahati News Today: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने शराब के लिए पैसे न देने पर मां की हत्या करने वाले बेटे की उम्रकैद बरकरार रखी है. मामला 2016 का है जब आरोपी शंकर ने महज ₹30 के विवाद में सब्जी काटने वाले हथियार से अपनी मां की गर्दन काट दी थी. कोर्ट ने आरोपी की नशे और अचानक गुस्से वाली दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि हमले की क्रूरता जान लेने का स्पष्ट इरादा दर्शाती है.

 फिर कोर्ट में दी उकसावे वाली दलील, जज ने सीधा कर दियाकोर्ट ने सख्‍त रुख अख्तियार किया. (AI Image)

गुवाहाटी: वह सुबह किसी सामान्य दिन की तरह ही शुरू हुई थी, लेकिन गुवाहाटी के जलुकबारी स्थित एक रेलवे क्वार्टर में जो हुआ उसने रिश्तों की मर्यादा को खून से नहला दिया. शराब के नशे में धुत एक बेटे ने महज 30 रुपये की खातिर अपनी मां का गला ‘दाओ’ (सब्जी काटने वाला भारी हथियार) से काटकर धड़ से अलग करने की कोशिश की. यह दिल दहला देने वाली घटना आज से 10 साल पहले हुई थी, जिस पर अब गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अपना कड़ा फैसला सुनाते हुए अपराधी को किसी भी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया है.

उम्र कैद की सजा को दी थी चुनौती
गुवाहाटी हाईकोर्ट के जस्टिस माइकल जोथानखुमा और जस्टिस कौशिक गोस्वामी की बेंच ने आरोपी शंकर नारायण नंदी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपनी उम्रकैद की सजा को चुनौती दी थी. कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि भले ही यह हत्या पूर्व नियोजित न रही हो, लेकिन जिस घातक हथियार से और जितनी ताकत के साथ गर्दन के नाजुक हिस्से पर हमला किया गया वह हत्या करने के स्पष्ट इरादे को दर्शाता है.

क्या थी उस काली सुबह की खौफनाक दास्तान?
घटना 16 मार्च, 2016 की है. शंकर नारायण नंदी को शराब की लत थी. वह सुबह अपनी मां गीता रानी नंदी से पैसे लेकर घर से निकला था. कुछ देर बाद वह नशे में लौटा और फिर से पैसों की मांग करने लगा. मां ने जब उसे ₹30 दिए तो वह आपा खो बैठा और गालियां देने लगा. इस दौरान बीच-बचाव करने आए मामा से भी उसकी हाथापाई हुई. गुस्से में मां ने उसे थप्पड़ मार दिया जिसके बाद घर में मौजूद सब्जी काटने वाले भारी ‘दाओ’ से उसने मां की गर्दन पर इतना जोरदार प्रहार किया कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई.

वारदात से जुड़े 5 अहम सवाल

1. आरोपी ने अपनी याचिका में क्या दलील दी थी?
जवाब: आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि वह नशे में था और अपनी सुध-बुध खो चुका था. उसने दावा किया कि मां का थप्पड़ मारना एक ‘अचानक उकसावा’ था, इसलिए इसे हत्या (Section 300) नहीं, बल्कि गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) माना जाए.

2. हाईकोर्ट ने आरोपी की दलीलों को क्यों खारिज कर दिया?
जवाब: कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने खुद ही झगड़ा शुरू किया था. मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, गर्दन पर 12cm x 7cm का गहरा घाव था, जिसने रीढ़ की हड्डी को काट दिया था. इतनी क्रूरता यह साबित करती है कि इरादा जान लेने का ही था.

3. इस केस में मुख्य गवाह कौन था?
जवाब: इस मामले में सबसे बड़ा गवाह आरोपी का अपना पिता था. पिता ने अदालत में गवाही दी कि उसने अपनी आंखों से बेटे को पत्नी का गला काटते और हाथ में हथियार लेकर भागते हुए देखा था.

4. क्या यह मामला ‘अचानक हुए झगड़े’ की श्रेणी में आता है?
जवाब: नहीं. कोर्ट ने आईपीसी की धारा 300 के ‘अपवाद 4’ को लागू करने से मना कर दिया. कोर्ट ने माना कि मां और बेटे के बीच ऐसा कोई युद्ध या झगड़ा नहीं हुआ था जो इस तरह की नृशंस हत्या को जायज ठहरा सके.

5. पुलिस के पास आरोपी के खिलाफ क्या पुख्ता सबूत थे?
जवाब: गवाहों के अलावा एक पुलिस अधिकारी ने गवाही दी कि उसने शंकर को हाथ में खून से सना ‘दाओ’ लेकर सरेंडर करने के लिए पुलिस चौकी की तरफ आते हुए देखा था.

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Sandeep Gupta

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और...और पढ़ें

Location :

Guwahati,Kamrup Metropolitan,Assam

First Published :

February 02, 2026, 18:11 IST

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₹30 के लिए मां का कत्ल: फिर कोर्ट में दी उकसावे वाली दलील, जज ने सीधा कर दिया

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