1000 किलो का बम और 2200 KMPH स्‍पीड, वार से थर्रा उठेगा पाकिस्‍तान, लाहौर से कराची तक होगा सिर्फ तबाही का मंजर

1 hour ago

Rafale F4 Fighter Jet: चीन और पाकिस्‍तान डिफेंस सेक्‍टर में हाई-प्रोफाइल डील कर रहा है. इस्‍लामाबाद अपनी रक्षा जरूरतों के लिए तकरीबन पूरी तरह से बीजिंग पर निर्भर है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पड़ोसी देश ने चीन की मिसाइल के साथ ही फाइटर जेट का भी इस्‍तेमाल किया था. इसके अलावा अन्‍य चीनी इक्विपमेंट का प्रयोग भी किया गया था. कुछ रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि अब पाकिस्‍तान अपने मित्र चीन से 5th जेनरेशन फाइटर जेट हासिल करने की कोशिश में जुटा हुआ है. उसके पास पहले से ही JF-17 और JF-10 जैसी चीनी फाइटर जेट मौजूद हैं. दूसरी तरफ, इंडियन एयरफोर्स के पास स्‍वीकृत संख्‍या से काफी कम स्‍क्‍वाड्रन हैं, जबकि भारत को चीन और पाकिस्‍तान दोनों मोर्चों पर एक साथ तैयार रहने की जरूरत है. फ्रांस से 36 राफेल जेट खरीदे गए हैं, पर अभी दर्जनों और फाइटर जेट की जरूरत है, ताकि स्‍क्‍वाड्रन की कमी को पूरा किया जा सके. इसे देखते हुए भारत ने फ्रांस से 114 और राफेल जेट खरीदने की योजना पर आगे बढ़ रहा है. आने वाले कुछ महीनों में तकरीबन 3.25 लाख करोड़ की महाडील पर अंतिम मुहर लग सकती है. भारत के पास अभी राफेल जेट का F3R वर्जन है. बताया जा रहा है कि इन सभी फाइटर जेट को F4 में अपग्रेड किया जाएगा, जिससे राफेल जेट की ताकत कई गुना तक बढ़ जाएगी. राफेल F4 जेट में न केवल शक्तिशाली रडार सिस्‍टम और अन्‍य टेक्‍नोलॉजी का इस्‍तेमाल किया गया है, बल्कि वेपन सिस्‍टम भी काफी मॉडर्न, ताकतवर और विध्‍वंसक है. राफेल F4 लाहौर से लेकर कराची तक में गर्दा मचाने में सक्षम है.

भारत के 114 लड़ाकू विमानों की बहुप्रतीक्षित मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) खरीद योजना निर्णायक चरण में पहुंच रही है. इसी बीच भारतीय वायुसेना (IAF) अपनी मौजूदा 36 राफेल लड़ाकू विमानों की ताकत को और बढ़ाने की तैयारी कर रही है. रक्षा सूत्रों के अनुसार, रक्षा खरीद बोर्ड ने राफेल के उन्नत F4 वर्जन को शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इसे स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के ऑपरेशन में आने तक एक ब्रिज सॉल्यूशन के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी पूर्ण तैनाती 2034-35 के आसपास संभावित है. IAF के पास फिलहाल राफेल F3R वर्जन के विमान हैं, जिन्हें 4.5 पीढ़ी के अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों में गिना जाता है, लेकिन राफेल F4 सिर्फ एक अपग्रेड नहीं, बल्कि वॉर ऑपरेशन कॉन्‍सेप्‍ट में जेनरेशनल चेंज का संकेत देता है. इसे एक ऐसे हाइपर-कनेक्टेड प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है जो हवा, जमीन, समुद्र और स्‍पेस बेस्‍ड सिस्‍टम से इंटीग्रेट होकर आधुनिक मल्टी डोमेन युद्ध की जरूरतों को पूरा कर सके. विशेषज्ञों का कहना है कि F4 राफेल को एक स्वतंत्र फाइटर से बदलकर एक नेटवर्क सेंट्रिक कॉम्बैट क्लाउड का हिस्सा बना देगा.

राफेल F4 क्‍यों ताकतवर?

राफेल फाइटर जेट के F4 संस्करण में सबसे अहम बदलाव इसके सेंसर और रडार सिस्टम में देखने को मिलेगा. मौजूदा F3R विमानों में लगे RBE2 एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (AESA) रडार पहले से ही हवा से हवा और हवा से जमीन हमलों में प्रभावी हैं, लेकिन F4 में इसके उन्नत संस्करण को शामिल किया गया है. इसमें ग्राउंड मूविंग टारगेट इंडिकेटर (GMTI) और सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) मोड जोड़े गए हैं, जिससे पायलट किसी भी मौसम में युद्ध क्षेत्र की हाई रिजॉल्यूशन तस्वीरें बना सकेंगे और जमीन पर चल रहे टार्गेट को सटीकता से ट्रैक कर सकेंगे. इससे IAF की निगरानी, गहराई तक स्ट्राइक करने और दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी. राफेल F4 की सबसे बड़ी पहचान उसकी कोलैबोरेटिव कॉम्बैट नेटवर्क क्षमता है. मौजूदा वर्जन जहां लिंक-16 जैसे पारंपरिक डेटा लिंक पर निर्भर हैं, वहीं F4 में थेल्स की CONTACT सॉफ्टवेयर-डिफाइंड रेडियो प्रणाली और सुरक्षित हाई-स्पीड सैटेलाइट कम्युनिकेशन को शामिल किया गया है. इससे विमान न केवल अन्य लड़ाकू विमानों बल्कि ड्रोन, नौसैनिक प्लेटफॉर्म और ग्राउंड कमांड सेंटर से भी रियल-टाइम डेटा साझा कर सकेंगे. इस तरह पूरा युद्धक्षेत्र एक साझा तस्वीर के रूप में सामने आएगा और पायलट अकेले नहीं बल्कि, एक एक्‍सटेंडेड डिस्ट्रिब्‍यूटेड नेटवर्क के हिस्से के रूप में लड़ सकेंगे.

Rafale F4 Fighter Jet: राफेल F4 की ताकत का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि इसके जर‍िये 1000 किलो का विध्‍वसंक बम टारगेट पर गिराया जा सकता है. इससे दुश्‍मन नेस्‍तनाबूद हो जाएंगे. (फाइल फोटो/Reuters)

कॉकपिट के अंदर क्‍या बदलाव?

defence.in की रिपोर्ट के अनुसार, कॉकपिट के भीतर भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. मौजूदा F3R राफेल में इस्तेमाल हो रहा एल्बिट डैश IV हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले अब थेल्स के स्कॉर्पियन हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले से बदला जाएगा. यह फुल कलर डिस्प्ले और डिजिटल सिम्बोलॉजी के जरिए उड़ान और मिशन से जुड़ी जानकारी सीधे पायलट की आंखों के सामने प्रदर्शित करेगा. इसकी उन्नत हाइब्रिड ट्रैकिंग तकनीक पायलट को केवल लक्ष्य की ओर देखने भर से हथियारों और सेंसर को क्यू करने की सुविधा देगी, जिससे इंस्‍टेंट रिएक्‍शन टाइमिंग और हाई इंटेसिटी वाले युद्ध में निर्णायक बढ़त मिलेगी.

राफेल F4 क्या है और यह पहले के वेरिएंट से कैसे अलग है?
राफेल F4 फ्रांस के राफेल फाइटर जेट का सबसे आधुनिक अपग्रेड वर्जन है. इसमें बेहतर सेंसर फ्यूजन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डेटा प्रोसेसिंग और उन्नत कॉकपिट सिस्टम जोड़े गए हैं, जिससे पायलट को रियल टाइम में ज्यादा सटीक ऑपरेशनल जानकारी मिलती है.

इसकी सबसे बड़ी तकनीकी खासियत क्या है?
इसकी सबसे बड़ी खासियत है इसका नेटवर्क्ड कॉम्बैट सिस्टम. राफेल F4 ड्रोन, AWACS और अन्य लड़ाकू विमानों के साथ सुरक्षित डेटा लिंक के जरिए सीधे जानकारी साझा कर सकता है, जिससे युद्धक्षेत्र में समन्वय और प्रतिक्रिया समय काफी कम हो जाता है.

हथियार प्रणाली में क्या नए बदलाव किए गए हैं?
राफेल F4 में मेटियोर एयर-टू-एयर मिसाइल, स्कैल्प क्रूज मिसाइल और हैमर प्रिसिजन गाइडेड बम जैसे आधुनिक हथियारों को और बेहतर तरीके से इंटीग्रेट किया गया है. इसकी स्ट्राइक क्षमता पहले से ज्यादा सटीक और घातक हो गई है.

इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सर्वाइवल सिस्टम कितने उन्नत हैं?
इसमें अपग्रेडेड SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट लगाया गया है, जो दुश्मन के रडार और मिसाइल सिस्टम को जैम करने, पहचानने और उनसे बचाव में सक्षम है. इससे जेट की सर्वाइवल क्षमता कई गुना बढ़ जाती है.

भारत के लिए राफेल F4 क्यों अहम माना जा रहा है?
भारत के लिए राफेल F4 रणनीतिक रूप से अहम है क्योंकि यह मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस में सक्षम है और नेटवर्क्ड वॉरफेयर के जरिए थल, जल और वायु सेनाओं के साथ बेहतर तालमेल स्थापित कर सकता है, जिससे देश की वायु रक्षा और स्ट्राइक क्षमता मजबूत होती है.

वेपन सिस्‍टम और भी घातक

वेपन सिस्‍टम के मामले में भी राफेल F4 को नई घातक क्षमता मिलेगी. लंबी दूरी की हवा से हवा मार करने वाली मेटियोर मिसाइल पहले की तरह इसकी ताकत बनी रहेगी, लेकिन इसके साथ नई पीढ़ी की MICA NG (नेक्स्ट जेनरेशन) मिसाइल भी शामिल की जाएगी. यह दोहरे पल्स रॉकेट मोटर, लंबी रेंज और अत्यधिक फुर्ती के साथ AESA सीकर से लैस होगी, जिससे स्टील्थ टारगेट के लिए भी इसे चकमा देना बेहद कठिन होगा. इसके अलावा 1000 किलोग्राम वजन वाली HAMMER प्रिसिजन-गाइडेड म्यूनिशन को शामिल करने से हेवी स्ट्राइक कैपेसिटी में भी इजाफा होगा, जिससे मजबूत बंकरों और किलेबंद ठिकानों को दूर से सटीकता से नष्ट किया जा सकेगा. F4 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को ऑपरेशनल और मेंटेनेंस दोनों स्तरों पर शामिल किया गया है. पारंपरिक सेंसर फ्यूजन की जगह अब ऑनबोर्ड AI रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और बाहरी स्रोतों से आने वाले विशाल डेटा का विश्लेषण कर केवल सबसे महत्वपूर्ण सूचनाएं पायलट तक पहुंचाएगा, जिससे सूचना अधिभार की समस्या कम होगी. इसके साथ ही AI आधारित प्रेडक्टिव मेंटेनेंस सिस्टम विमान के विभिन्न हिस्सों की सेहत पर लगातार नजर रखेगा और संभावित खराबियों की पहले ही पहचान कर लेगा. इससे विमान की उपलब्धता बढ़ेगी और रखरखाव लागत घटेगी, जो लंबे समय तक हाई इंटेंसिटी वाले अभियानों के लिए बेहद जरूरी है.

फ्यूचर वॉरफेयर की तैयारी

रणनीतिक दृष्टि से राफेल F4 को भारत के लिए भविष्य की सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप तैयार किया गया है. यह उन्नत स्टील्थ विमानों, घने एयर डिफेंस नेटवर्क और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसे खतरों से निपटने में सक्षम होगा. IAF के लिए यह अधिग्रहण इसलिए भी अहम है क्योंकि स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का AMCA अभी विकास के चरण में है. इसके प्रोटोटाइप के 2026-27 के आसपास रोलआउट और 2030 के दशक के मध्‍य में पूर्ण तैनाती की उम्मीद है. ऐसे में राफेल F4 अगले एक दशक तक भारत की वायु रक्षा की रीढ़ बनेगा और देश को क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले तकनीकी बढ़त बनाए रखने में मदद करेगा. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि MRFA कार्यक्रम के तहत राफेल F4 का चयन न केवल IAF की मौजूदा क्षमताओं को सुदृढ़ करेगा, बल्कि नेटवर्क सेंट्रिक और AI ऑपरेटेड वॉर के नए युग में भारत की भूमिका को भी मजबूत करेगा. इस तरह राफेल F4 न सिर्फ एक लड़ाकू विमान रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में भारत की वायु शक्ति की परिभाषा को ही नए सिरे से गढ़ने वाला प्लेटफॉर्म साबित होगा.

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