2.5 लाख की साड़ी के लिए सुबह 4 बजे से लाइन, एक टोकन पर सिर्फ एक पीस, कहां I-Phone से भी बड़ी दीवानगी

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Last Updated:January 21, 2026, 20:30 IST

Maysoor Silk Saree: कर्नाटक में असली मैसूर सिल्क साड़ियों के लिए महिलाओं का गजब जुनून दिख रहा है. सुबह 4 बजे से ही शोरूम के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं. ₹23,000 से ₹2.5 लाख तक की इन साड़ियों के लिए टोकन सिस्टम लागू है. शुद्धता और GI-टैग के कारण इनकी भारी मांग है, लेकिन कुशल बुनकरों की कमी से 2026 में भी सप्लाई कम है.

2.5 लाख की साड़ी के लिए सुबह 4 बजे से लाइन, कहां I-Phone से भी बड़ी दीवानगीमैसूर में सुबह से ही लंबी कतारें लग जाती हैं. (AI Image)

जब पूरा शहर गहरी नींद में सोया होता है तब कर्नाटक के एक शोरूम के बाहर हलचल शुरू हो जाती है. अभी सूरज की पहली किरण भी नहीं निकली होती लेकिन सुबह 4 बजे से ही महिलाओं की एक लंबी कतार लग जाती है. यह कोई मामूली सेल नहीं बल्कि असली मैसूर सिल्क (Mysore Silk) को हासिल करने की जद्दोजहद है. शोरूम के दरवाजे सुबह 10 बजे खुलते हैं लेकिन इन सिल्क प्रेमियों के लिए 6 घंटे का इंतजार महज एक अनुष्ठान जैसा है. ₹25,000 से लेकर ₹2.5 लाख तक की कीमत वाली ये साड़ियां सिर्फ कपड़ा नहीं बल्कि एक विरासत हैं. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में बुजुर्ग महिलाएं और परिवार प्लास्टिक की कुर्सियां लेकर अंधेरे में ही अपनी बारी का इंतजार करते नजर आ रहे हैं. इस शाही साड़ी को पाने की शर्त भी सख्त है. एक ग्राहक को सिर्फ एक साड़ी मिलेगी और वह भी तब जब आपके पास टोकन होगा!

क्यों है मैसूर सिल्क की इतनी भारी कमी?
मैसूर सिल्क की इस किल्लत के पीछे इसकी शुद्धता और सीमित उत्पादन की एक लंबी कहानी है. 2025 से शुरू हुई यह कमी 2026 में भी कम होने का नाम नहीं ले रही है.

· GI-टैग और शुद्धता: कर्नाटक सिल्क इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन (KSIC) के पास ही असली मैसूर सिल्क और इसके GI-टैग के अधिकार हैं.

Women queue up from 4.00 AM outside a Karnataka Soviet (sorry Silk) Industries Corporation showroom to buy silk sarees starting from ₹23,000 and going up to ₹250,000. Only 1 saree per customer and you need a token to be in the queue.

· दक्ष कारीगरों का अभाव: KSIC केवल अपने इन-हाउस बुनकरों पर निर्भर है. एक नए बुनकर को प्रशिक्षित करने में 6 से 7 महीने का समय लगता है.

· सीमित उत्पादन: मांग बढ़ने के बावजूद कॉरपोरेशन बाहरी बुनकरों से काम नहीं करवाता, ताकि गुणवत्ता और परंपरा बनी रहे.

· त्योहारों का सीजन: वरलक्ष्मी पूजा, गौरी गणेश और दीपावली जैसे त्यौहारों और शादियों के सीजन में मांग इतनी बढ़ जाती है कि स्टॉक चंद घंटों में ही खत्म हो जाता है.

मैसूर सिल्क साड़ियों का रेट कार्ड

साड़ी की श्रेणीशुरुआती कीमत (₹)विशेषता
क्लासिक मैसूर सिल्क₹23,000 – ₹50,000हल्का वजन और सदाबहार चमक.
वेडिंग कलेक्शन₹75,000 – ₹1,50,000भारी जरी और पारंपरिक बॉर्डर.
एक्सक्लूसिव एंटीक₹2,00,000 से ऊपरअसली सोने-चांदी की जरी का काम.

क्यों पागल हैं महिलाएं इस साड़ी के लिए
1. सवाल: KSIC की साड़ियों में ऐसा क्या खास है जो लोग इतना इंतजार करते हैं?
जवाब: हर KSIC साड़ी पर एक यूनिक होलोग्राम और आइडेंटिफिकेशन कोड होता है. यह साड़ी की शुद्धता, चमक और पीढ़ियों तक चलने वाली मजबूती की गारंटी देता है.

2. सवाल: क्या ऑनलाइन खरीदारी का विकल्प नहीं है?
जवाब: ऑनलाइन विकल्प मौजूद हैं, लेकिन शोरूम में जाकर साड़ी को छूकर देखने और सीधे कॉरपोरेशन से खरीदने का भरोसा ग्राहकों को सुबह 4 बजे कतार में खींच लाता है.

3. सवाल: ‘एक ग्राहक एक साड़ी’ का नियम क्यों लागू किया गया है?
जवाब: आपूर्ति कम और मांग बहुत ज्यादा होने के कारण, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को साड़ी मिल सके और कालाबाजारी रोकी जा सके.

4. सवाल: क्या आने वाले समय में यह कमी दूर होगी?
जवाब: कारीगरों की कमी और जटिल बुनाई प्रक्रिया के कारण 2026 में भी सप्लाई बढ़ने की संभावना कम ही नजर आ रही है.

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Sandeep Gupta

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और...और पढ़ें

Location :

Mysore,Mysore,Karnataka

First Published :

January 21, 2026, 20:30 IST

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2.5 लाख की साड़ी के लिए सुबह 4 बजे से लाइन, कहां I-Phone से भी बड़ी दीवानगी

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