26 January1950: कैसा था देश और लोग, जब हमने मनाया पहला गणतंत्र दिवस, तब से क्या बदला

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देश में गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 1950 को मनाया गया था. इसके बाद भारत गणराज्य बन गया. देश और देशवासियों की रक्षा के लिए एक संविधान काम करने लगा. लेकिन तब से अब तक 76 साल गुजर चुके हैं. तब कैसे थे देश के लोग और देश. कितना बदलाव आ गया तब से लेकर अब तक.

जब देश वर्ष 1950 में पहला गणतंत्र मना रहा था तो भारत की तस्वीर में संक्रमण, उम्मीद और अनिश्चितताओं का मिला-जुला दौर था. तब से लेकर अब तक हम एक कांफिडेंट, मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र में बदल चुके हैं. 10 साफ़ प्वाइंट्स में देखिए तब देश कैसा था.

1. नया-नया आज़ाद देश –आज़ादी को ढाई साल भी पूरे नहीं हुए थे. शासन की आदतें, संस्थाएं और सोच – सब कुछ धीरे धीरे आकार ले रहा था

2. संविधान लागू होने की घड़ी – 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ – भारत डोमिनियन से पूर्ण गणराज्य बना. यह केवल कानूनी नहीं, प्रतीकात्मक छलांग थी.

3. राजनीतिक नेतृत्व – तब नेहरू प्रधानमंत्री थे और 26 जनवरी के दिन राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रपति बन चुके थे. नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन की नैतिक पूंजी थी लेकिन प्रशासनिक चुनौतियां भारी थीं.

4. विभाजन का ताज़ा ज़ख़्म – 1947 का बंटवारा अभी भी समाज में धड़क रहा था -शरणार्थी, दंगे, विस्थापन और अविश्वास हर तरफ़ महसूस होते थे. देश अब भी तरह तरह की दिक्कतें और अभाव था.

5. आर्थिक हालत कमज़ोर- औद्योगिकीकरण नहीं के बराबर था. कृषि पर निर्भरता बहुत ज़्यादा, खाद्यान्न संकट और विदेशी मुद्रा की किल्लत आम बात थी.

6. रियासतों का एकीकरण जारी –560+ रियासतों का भारत में विलय लगभग पूरा हो चुका था, लेकिन प्रशासनिक समायोजन अभी भी चल रहा था.

7. जनसंख्या और साक्षरता –आबादी लगभग 36 करोड़; साक्षरता दर 18% के आसपास. लोकतंत्र एक अनपढ़ समाज में शुरू हो रहा था – यह अपने आप में साहसिक प्रयोग था.

8. सेना और सुरक्षा माहौल – सेना ब्रिटिश ढांचे से निकलकर भारतीय पहचान ले रही थी. कश्मीर विवाद और सीमाओं की चिंता मौजूद थी.

9. विदेश नीति का जन्मकाल – गुटनिरपेक्षता की सोच आकार ले रही थी – भारत खुद को न अमेरिका के खेमे में रखना चाहता था, न सोवियत संघ के.

10. जनमानस में उम्मीद – आम आदमी के लिए गणतंत्र का मतलब था- अब हम अपने भाग्य के मालिक हैं. गरीबी थी पर भरोसा भी था कि नया भारत कुछ अलग करेगा.

क्या थे तब भारत के दस रंग और रफ्तार

1. जीवनशैली – ज़िंदगी सादी, कम खर्चीली और सामुदायिक थी. बिजली, गैस, नल जैसी सुविधाएं शहरों में भी सीमित थीं; गांवों में तो दुर्लभ ही थीं. परिवार बड़े होते थे, संयुक्त परिवार आम बात थी. मनोरंजन रेडियो, मेले, रामलीला और सिनेमा तक सीमित था.

2. पहनना और पोशाक – शहरों में पुरुष खादी की धोती – कुर्ता, या पायजामा–कुर्ता पहनते थे. पढ़े-लिखे औऱ अफसर वर्ग में शर्ट -पैंट, कोट, नेहरू जैकेट और सिर पर गांधी टोपी आमबात थी. गांवों में पुरुष धोती, लुंगी, गमछा पहनते थे. जींस, टी-शर्ट, स्नीकर्स जैसी चीज़ें आम जीवन में बिल्कुल नहीं थीं.

3. महिलाएं क्या पहनती थीं – साड़ी सबसे आम पोशाक थी. उत्तर भारत में घाघरा-चोली, दुपट्टा का रिवाज था. कामकाजी महिलाएं बहुत कम थीं. अलबत्ता महिलाएं शिक्षिकाएं और नर्सों के रूप में अपवाद थीं. कपड़े ज़्यादातर सूती या खादी के पहने जाते थे. सिंथेटिक फैब्रिक करीब नहीं चलता था.

4. औसत आमदनी – औसत वार्षिक आय तब लगभग ₹250–300 सालाना थी. सरकारी क्लर्क की मंथली ₹50–80 महीना थी तो स्कूल टीचर ₹60–100 महीना. मजदूर रोज का ₹1–2 पाते थे. पैसे की कीमत तब ज़्यादा थी, लेकिन गरीबी भी ज्यादा.

5. देश में कितनी कारें थीं – 1950 के आसपास पूरे भारत में 2 लाख से भी कम कारें थीं. कार अमीरी और रुतबे की निशानी थी. आम आदमी आमतौर पर इसे देख ही पाता था. साइकल, बैलगाड़ी, तांगा, बस और ट्रेन आमवाहन थे.

6. सड़कों और शहरों का हाल – सड़कें कम, ज़्यादातर कच्ची थीं. ट्रैफिक लाइट गिनी-चुनी थीं. दिल्ली, बॉम्बे, कलकत्ता ही बड़े शहर माने जाते थे.

7. उस दौर की हिट फिल्में – 1949–50 की बड़ी हिट्स –
– “महल” (1949) – अशोक कुमार, मधुबाला (गीत: “आएगा आने वाला” सुपरहिट)
– “बरसात” (1949) – राज कपूर, नरगिस
-“अंदाज़” (1949) – दिलीप कुमार, राज कपूर
सिनेमा ही सबसे बड़ा मास एंटरटेनमेंट था.

8. सिनेमा टिकट के दाम – सामान्य टिकट: ₹0.25 से ₹0.75, बालकनी: ₹1 से ₹1.50, हफ्ते में फिल्म देखना भी कई परिवारों के लिए लक्ज़री थी

9. खाने-पीने का हाल – घर का बना खाना ही लोग खाते थे. दाल-चावल, रोटी-सब्ज़ी सबसे लोकप्रिय खाना था. बाहर खाना बहुत कम होता था. होटल और रेस्टोरेंट सीमित और महंगे माने जाते थे.

10. कुल मिलाकर माहौल – जीवन कठिन था. सुविधाएं कम थीं. भरोसा, धैर्य और भविष्य में यक़ीन बहुत था. लोग मानते थे कि देश नया है, अभी मुश्किल है… पर अपना है.

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