Last Updated:January 26, 2026, 05:06 IST
Republic Day IAF Fly Past: भारतीय वायुसेना के मुताबिक, 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर वायुसेना के कुल 29 विमान कर्तव्य पथ के ऊपर आसमान में नजर आएंगे. इनमें 16 फाइटर जेट, 4 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और 9 हेलीकॉप्टर शामिल हैं. 26 जनवरी को फ्लाई पास्ट में भारतीय वायुसेना के चार एमआई-17 हेलीकॉप्टर ध्वज फॉर्मेशन में नजर आएंगे.
सामरिक नजरिए से चीन और पाकिस्तान के खिलाफ पश्चिमी एयर कमांड और दक्षिण पश्चिमी एयर कमांड काफी अहम है. (सांकेतिक तस्वीर)नई दिल्ली. गणतंत्र दिवस समारोह में वायुसेना (आईएएफ) का फ्लाई पास्ट इस बार बेहद खास होने वाला है. क्योंकि इस बार कर्तव्य पथ पर फिर से देश को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की झलक मिलेगी. इस दौरान पूरा आकाश आईएएफ के फाइटर जेट्स की दहाड़ से गूंज उठेगा. इससे भी ज्यादा अहम बात यह है कि आकाश में कलाबाजियां दिखाने वाले सभी हेलीकॉप्टर, फाइटर जेट्स और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट वेस्टर्न एयर कमांड (WAC) और साउथ वेस्टर्न एयर कमांड (SWAC) के बेस से उड़ान भर रहे हैं, जो कि सीधे तौर पर पाकिस्तान और चीन को एक संदेश है.
चीन और पाकिस्तान की सामरिक योजनाओं में भारतीय वायु सेना (IAF) के पश्चिमी एयर कमांड और दक्षिण पश्चिमी एयर कमांड को सबसे बड़े रणनीतिक खतरे के रूप में देखा जाता है. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ये दोनों कमांड न केवल भारत की हवाई सुरक्षा की रीढ़ हैं, बल्कि किसी भी संभावित दो-फ्रंट युद्ध की स्थिति में युद्ध की दिशा और दशा तय करने वाली ताकत भी रखते हैं.
पश्चिमी एयर कमांड पाकिस्तान से लगी सीमा पर भारत की सबसे शक्तिशाली वायु कमांड मानी जाती है. इसका संचालन क्षेत्र जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान के बड़े हिस्से तक फैला है. इसी कमांड के अंतर्गत अंबाला जैसे एयरबेस से राफेल लड़ाकू विमान तैनात हैं, जो डीप स्ट्राइक और सटीक हमलों में सक्षम हैं. सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी टकराव की स्थिति में यह कमांड पहले 48 से 72 घंटों में पाकिस्तान की वायु क्षमता को निष्क्रिय करने की क्षमता रखती है. यही कारण है कि पाकिस्तान की सैन्य रणनीति में पश्चिमी एयर कमांड को सबसे बड़ा खतरा माना जाता है.
दूसरी ओर, दक्षिण पश्चिमी एयर कमांड को पाकिस्तान के सिंध सेक्टर और अरब सागर क्षेत्र में भारत की निर्णायक शक्ति के रूप में देखा जाता है. इसका क्षेत्र राजस्थान और गुजरात तक फैला है, जहां से भारतीय वायु सेना न केवल पश्चिमी सीमा पर दबाव बना सकती है, बल्कि जरूरत पड़ने पर नौसेना के साथ संयुक्त अभियान भी चला सकती है. रक्षा सूत्रों के मुताबिक, इस कमांड की मौजूदगी पाकिस्तान के कराची पोर्ट और महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों के लिए गंभीर चुनौती है.
चीन के दृष्टिकोण से भी दक्षिण पश्चिमी एयर कमांड का महत्व कम नहीं है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारत पश्चिमी मोर्चे पर दबाव बनाए रखता है, तो चीन के लिए पूर्वी लद्दाख और अन्य LAC क्षेत्रों में स्वतंत्र सैन्य कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि चीन-पाकिस्तान के साझा रणनीतिक हितों, विशेषकर चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के संदर्भ में, इन दोनों एयर कमांड को लेकर चिंता बनी रहती है.
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिमी और दक्षिण पश्चिमी एयर कमांड की ताकत भारतीय वायु सेना को न केवल त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता देती है, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में भारत को निर्णायक बढ़त भी दिलाती है. यही कारण है कि चीन और पाकिस्तान दोनों ही इन कमांड्स को अपनी सैन्य योजना में सबसे संवेदनशील कारक मानते हैं.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h...और पढ़ें
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New Delhi,Delhi
First Published :
January 26, 2026, 05:06 IST

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