Last Updated:February 03, 2026, 13:42 IST
5 Times Namaz Name: कुरान में साफ तौर पर कहा गया है कि जीवन का मूल उद्देश्य अल्लाह की इबादत करना है. नमाज के जरिए इंसान सीधे अल्लाह से बात कर सकता है. हर मुसलमान पर दिन में पांच वक्त की नमाज फर्ज की गई है. लेकिन क्या आप 5 वक्त की नमाज के नाम जानते हैं और वे किस किस समय पर होती हैं.

5 Times Namaz Name With Significance: इस्लाम में नमाज को सबसे महत्वपूर्ण इबादतों में से एक माना गया है. कुरआन और हदीस के अनुसार, हर मुसलमान पर दिन में पांच वक्त की नमाज फर्ज की गई है. यह नमाज ना सिर्फ अल्लाह से जुड़ने का माध्यम है, बल्कि इंसान के जीवन में अनुशासन, संयम और आत्मशुद्धि का संदेश भी देती हैं. इसके अलावा यह व्यक्ति को बुरी आदतों और गलत कामों से भी रोकती है. पैगंबर मोहम्मद (स.अ.व.) ने अपनी हदीस में कहा है कि जन्नत की कुंजी नमाज है. इस्लाम में पांच वक्त की नमाज समय की पाबंदी, अनुशासन और अल्लाह से निरंतर जुड़ाव का प्रतीक है लेकिन क्या आप पांच वक्त की नमाज के नाम जानते हैं और इनका समय क्या होता है. आइए जानते हैं इसके बारे में खास बातें...

<strong>फज्र की नमाज -</strong> फज्र दिन की पहली नमाज होती है. यह उस समय अदा की जाती है जब अंधेरा छंटने लगता है और सुबह की रोशनी फैलने लगती है. फज्र की नमाज में कुल दो फ़र्ज़ रकात होती हैं, लेकिन इससे पहले दो सुन्नत रकात भी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. हदीसों में फज्र की नमाज को बेहद फ़ज़ीलत वाली बताया गया है. कहा गया है कि फज्र की नमाज़ अदा करने वाले व्यक्ति की गवाही फरिश्ते देते हैं. <strong>समय: सूर्योदय से पहले</strong>

<strong>ज़ुहर की नमाज -</strong> ज़ुहर की नमाज दिन के मध्य में अदा की जाती है, इसमें चार फर्ज़ रकात होती हैं. यह नमाज आमतौर पर कामकाज और व्यस्तताओं के बीच पढ़ी जाती है. ज़ुहर की नमाज इंसान को याद दिलाती है कि दुनियावी काम कितने ही जरूरी क्यों ना हों, अल्लाह की इबादत सबसे ऊपर है. यह नमाज मानसिक शांति देती है और दिन की थकान को कम करने में सहायक मानी जाती है. <strong>समय: दोपहर में, सूरज ढलने के बाद से लेकर अस्र से पहले तक</strong>
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<strong>अस्र की नमाज़ -</strong> अस्र की नमाज में चार फर्ज़ रकात होती हैं. यह दिन के उस हिस्से में अदा की जाती है जब इंसान फिर से काम में डूबा होता है. हदीस में अस्र की नमाज़ की खास ताकीद की गई है. कहा गया है कि जो व्यक्ति अस्र की नमाज़ छोड़ देता है, उसके अमल जाया हो जाते हैं. यह नमाज इंसान को सब्र, संयम और अल्लाह की याद में बने रहने का संदेश देती है. <strong>समय: दोपहर के बाद से लेकर सूरज डूबने से पहले तक</strong>

<strong>मग़रिब की नमाज़ -</strong> मग़रिब की नमाज में तीन फर्ज़ रकात होती हैं. यह नमाज दिन और रात के बीच के परिवर्तन का प्रतीक है. मगरिब की नमाज अल्लाह की नेमतों के लिए शुक्र अदा करने की नमाज मानी जाती है. पूरा दिन सुरक्षित गुजरने के बाद यह नमाज इंसान को कृतज्ञता और आत्मचिंतन की ओर ले जाती है.<strong> समय: सूरज डूबने के तुरंत बाद से लेकर अंधेरा छाने से पहले तक</strong>

<strong>इशा की नमाज़ -</strong> इशा की नमाज दिन की आखिरी नमाज होती है, जिसमें चार फर्ज़ रकात होती हैं. इशा की नमाज दिनभर के कार्यों के बाद अल्लाह के सामने झुकने का अवसर देती है. इसके बाद पढ़ी जाने वाली वितर नमाज को भी बहुत अहम माना गया है. यह नमाज इंसान को आत्ममंथन और तौबा का मौका देती है. <strong>समय: पूरी तरह अंधेरा हो जाने के बाद से लेकर आधी रात</strong>
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