Ajab-Gajab Museum: जहां जूते और बर्गर के आकार में चलती हैं कारें, गेट पर खड़ी है भारत की सबसे बड़ी कुर्सी

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Ajab-Gajab Museum: जहां जूते और बर्गर के आकार में चलती हैं कारें, गेट पर खड़ी

Last Updated:February 20, 2026, 08:16 IST

Giant Chair at Sudha Cars Museum Hyderabad: हैदराबाद के सुधा कार म्यूजियम में 30 फीट ऊंची एक विशाल पीली कुर्सी पर्यटकों को आकर्षित कर रही है. गिनीज रिकॉर्ड धारक के. सुधाकर द्वारा निर्मित यह कुर्सी भारतीय कारीगरी का अद्भुत नमूना है. म्यूजियम के अंदर सैंडल, बर्गर और कैमरे के आकार की चलती-फिरती कारें भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं.

हैदराबाद. निज़ामों के शहर हैदराबाद में ऐतिहासिक मीनारों और लजीज बिरयानी के अलावा एक ऐसी चीज़ भी है जो पर्यटकों को सिर उठा कर देखने पर मजबूर कर देती है. यहाँ के प्रसिद्ध सुधा कार म्यूजियम के प्रवेश द्वार पर खड़ी एक विशालकाय पीली कुर्सी इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर चर्चाओं के बाज़ार तक खूब सुर्खियां बटोर रही है. पहली नज़र में यह किसी फंतासी फिल्म का हिस्सा लगती है, लेकिन हकीकत में यह भारतीय इंजीनियरिंग और स्थानीय कारीगरी का एक बेजोड़ नमूना है. 30 फीट ऊंची यह कुर्सी न केवल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत की रचनात्मक सोच को भी दर्शाती है.

अक्सर दुनिया की सबसे बड़ी कुर्सी के रूप में प्रचारित की जाने वाली यह कलाकृति लगभग 30 फीट ऊंची है. हालांकि आधिकारिक रिकॉर्ड्स के अनुसार दुनिया की सबसे ऊंची कुर्सी ऑस्ट्रिया में स्थित है, लेकिन भारत के लिहाज़ से यह अपनी तरह का इकलौता और सबसे विशाल ढांचा माना जाता है. इसे मशहूर आर्टिस्ट के. सुधाकर यादव ने तैयार किया है. सुधाकर वही शख्स हैं जिनका नाम दुनिया की सबसे ऊंची साइकिल (लगभग 41 फीट) बनाने के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में पहले से दर्ज है. उनकी यह नई कलाकृति अब हैदराबाद के पर्यटन मानचित्र पर एक नया मील का पत्थर साबित हो रही है.

कारीगरी और मज़बूती का मेल
इस विशाल कुर्सी को बनाने के पीछे का मकसद किसी रिकॉर्ड को तोड़ना मात्र नहीं था. सुधाकर यादव के अनुसार, वे दुनिया को यह दिखाना चाहते थे कि भारत के स्थानीय कारीगर बिना किसी भारी औद्योगिक मदद या जटिल मशीनों के भी इतने बड़े और सटीक ढांचे तैयार कर सकते हैं. लकड़ी और धातु के सटीक तालमेल से बनी यह कुर्सी इतनी मज़बूत है कि यह तेज़ हवाओं और मौसम के कठिन थपेड़ों को आसानी से झेल लेती है. इसे बनाने में इस्तेमाल की गई तकनीक और सामग्री स्थानीय स्तर पर ही जुटाई गई थी, जो इसे और भी खास बनाती है.

अतरंगी कारों का संसार
यह विशाल कुर्सी तो बस एक शुरुआत है. म्यूजियम के अंदर कदम रखते ही पर्यटकों को एक अलग ही जादुई दुनिया नज़र आती है. यहाँ कारों को बैंगन, बर्गर, कंप्यूटर, कैमरे और यहाँ तक कि लेडीज सैंडल के आकार में ढाला गया है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ये सभी अतरंगी गाड़ियाँ केवल सजावट के लिए नहीं हैं, बल्कि ये सड़क पर चलने की पूरी स्थिति में हैं. ऐसी अजब-ग़ज़ब चीज़ें न केवल तेलंगाना के पर्यटन को बढ़ावा देती हैं, बल्कि यह भी साबित करती हैं कि कल्पना और मेहनत का मेल हो तो साधारण चीज़ों से भी आसमान छुआ जा सकता है.

About the Author

vicky Rathore

Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra...और पढ़ें

Location :

Hyderabad,Hyderabad,Telangana

First Published :

February 20, 2026, 08:16 IST

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