Ajit Pawar Plane Crash: लैंडिंग गियर में गडबड़ी या फिर... अजित पवार प्‍लेन क्रैश को लेकर सामने आई यह बड़ी वजह

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Last Updated:January 28, 2026, 13:49 IST

क्‍या आईएलएस की गैरमौजूदगी की वजह से बारामती एयरपोर्ट पर हादसा हुआ? हादसे के बाद सामने आए इनपुट को देखने के बाद यहीं संभावना जताई जा रही है कि सही एलाइंनमेंट ना होने की वजह से यह हादसा हुआ है.

लैंडिंग गियर में गडबड़ी या... अजित पवार प्‍लेन क्रैश को लेकर सामने आई यह वजह

Ajit Pawar Plane Crash: क्‍या प्‍लेन के लैंडिंग गियर में कोई गड़बड़ी थी या बारामती एयरस्ट्रिप पर ILS की कमी बनी जानलेवा? महाराष्‍ट्र के उपमुख्‍यमंत्री अजित पवार के प्‍लेन क्रैश मामले में यह सवाल सबसे बड़ा हो चुका है. शुरुआती संकेत बताते हैं कि लैंडिंग के दौरान प्‍लेन ने रनवे पर सीधे उतरने के बजाय एक बड़ा घुमाव लिया. साथ ही, प्‍लेन के सेकेंड एप्रोच की बात भी सामने आई है.

एविएविशन एक्‍सपर्ट्स के अनुसार, सेकेंड एप्रोच का मतलब है कि लैंडिंग के लिए दो अटैंप्‍ट किए गए. संभव है कि पहले अटैंप्‍ट में पायलट प्‍लेन को रवने से अलाइन नहीं कर पाया हो, जिसकी वजह से पायलट ने पहले गो अराउंड में जाने का फैसला किया, फिर लैंडिंग के लिए दूसरा अटैंप्‍ट लिया हो. और, इसी अटैंप्‍ट में गलत एप्रोच के चलते प्‍लेन क्रैश हो गया हो.

गलत एलाइनमेंट या मिस अप्रोच की नौबत क्‍यों आई?

एयरपोर्ट एक्‍सपर्ट्स के अनुसार, बारामती में एक छोटा एयरस्ट्रिप है, जिसमें बड़े एयरपोर्ट जैसे बेहतर लैंडिंग सिस्टम नहीं हैं. बारामती एयरपोर्ट पर इंस्‍ट्रुमेंट लैंडिंग सिस्‍टम (ILS) उपलब्ध नहीं है. आईएलएस एक रेडियो आधारित गाइडेंस सिस्टम होता है, जिसकी मदद से पायलट प्‍लेन को रनवे से एलाइन करते हैं. लो विजिबिलिटी की स्थिति में आईएलएस सिस्‍टम पायलट को सटीक तरीके से रनवे पर लैंडिंग कराने में मदद करता है. आईएलएस पायलट को दो बेहद अहम सिग्‍नल देता है, जिसमें पहला लोकलाइजर (Localizer) और दूसरा ग्‍लाइड स्‍लोप (Glide Slope) है. लोकलाइजर बताता है कि प्‍लेन रनवे की सेंटर लाइन से बाएं या दाएं तो नहीं जा रहा है. वहीं ग्‍लाइड स्‍लोप बताता हैं कि प्‍लेन सही ऊंचाई के एंगल से नीचे आ रहा है या नहीं.

फिर प्‍लेन क्रैश से जुड़े इन सवालों के क्‍या हैं जवाब?

आईएलएस सिस्‍टम नहीं होने पर पायलट किस तरह कराते हैं लैंडिंग?
जब आईएलएस मौजूद नहीं होता, तो पायलट को विजुअल अप्रोच करना पड़ता है. यानी रनवे को आंखों से पहचानकर, दूरी, एंगल और दिशा का अंदाज लगाते हुए प्‍लेन को मैन्युअली अलाइन करना पड़ता है. यह प्रक्रिया सुरक्षित तो है, लेकिन पूरी तरह पायलट की विजुअल जजमेंट और मौसम की स्थिति पर निर्भर करती है.

लैंडिंग से पहले मैप में तेज घुमाव दिख रहा है, उसके क्‍या मायने हैं?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, क्रैश से पहले प्‍लेन के ट्रैक में जो बड़ा हरा घुमाव दिख रहा है, वह सामान्य सीधी लैंडिंग का पैटर्न नहीं है. यह संकेत देता है कि प्‍लेन पहली कोशिश में रनवे के साथ सही अलाइनमेंट नहीं बना पाया. ऐसी स्थिति में पायलट आमतौर पर लैंडिंग को रद्द कर देता है, एबोर्टेड अप्रोच या गो अराउंड कहा जाता है.

एबोर्टेड अप्रोच या गो-अराउंड में जाने के बाद पायलट के पास क्‍या विकल्‍प होते हैं?
गो-अराउंड में जाने के बाद प्‍लेन को दोबारा एक निश्चित ऊंचाई पर पहुंचना पड़ता है. फिर, एक आर्क या लूप में घुमाकर रनवे की दिशा में लाया जाता है. यही पैटर्न इस केस में भी दिख रहा है. इसका मतलब यह हो सकता है कि पहली लैंडिंग सुरक्षित नहीं लगी और पायलट ने दोबारा कोशिश करने का फैसला किया.

क्‍या छोटा एयर स्ट्रिप और आईएलएस की गैरमाजूदगी बनी क्रैश की वजह?
एविएशन एक्‍सपर्ट्स के अनुसार, छोटे एयरस्ट्रिप्स पर पायलट को ज्यादा सटीक एप्रोच करनी पड़ती है. अगर अलाइनमेंट थोड़ा भी बिगड़ा, तो लैंडिंग रिस्की हो सकती है. आईएलएस की गैरमौजूदगी, विजुअल एप्रोच और दूसरी बार अलाइन करने की कोशिश, ये तीनों फैक्टर मिलकर क्रैश की परिस्थितियां बना सकते हैं.

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Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to ...और पढ़ें

First Published :

January 28, 2026, 13:34 IST

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