CM इस साल पूरा नहीं कर पाएंगी केजरीवाल का यह अधूरा काम, 10 साल से अटका मामला

1 week ago

Last Updated:March 27, 2025, 08:09 IST

Rekha Gupta News: दिल्ली में केजरीवाल सरकार के दौरान मयूर विहार-सराय काले खां बारापुल्ला फेज-3 प्रोजेक्ट भूमि अधिग्रहण और कोविड-19 के कारण अधूरा रहा. अब यह 2025 तक पूरा नहीं होगा. सीएम रेखा गुप्‍ता सरकार से उम्...और पढ़ें

CM इस साल पूरा नहीं कर पाएंगी केजरीवाल का यह अधूरा काम, 10 साल से अटका मामला

लोगों को लंबे वक्‍त से बारापुला प्रोजेक्‍ट का इंतजार है. (File Photo)

हाइलाइट्स

मयूर विहार-सराय काले खां प्रोजेक्ट 2025 तक पूरा नहीं होगा.बारापुला फेज-3 के तहत 9 साल से पुल निर्माण का काम अटका है.प्रोजेक्ट की लागत 964 करोड़ से बढ़कर 1,509 करोड़ हो चुकी है.

Rekha Gupta News: अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी ने दिल्‍ली की सत्‍ता पर 10 साल राज किया. इस दौरान वो मयूर विहार और सराय काले खां को जोड़ने वाला बारापुल्ला फेज-3 एलिवेटेड रोड का निर्माण पूरा नहीं कर सके. 3.5 किलोमीटर लंबे इस ब्रिज को बनाने में इतनी कानूनी अड़चने आई कि यमुना के एक छोर को दूसरे छोर से जोड़ने वाला यह ब्रिज 9 साल से अधर में ही लटका हुआ. सीएम रेखा गुप्‍ता ने दिल्‍ली की कमान संभाली तो लगा कि जल्‍द से जल्‍द लोगों को बड़ी राहत मिलेगी. हालांकि हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स की रिपोर्ट के अनुसार कम से कम इस साल तो नई सीएम चाहकर भी इस प्रोजेक्‍ट को पूरा नहीं कर पाएंगी. इस प्रोजेक्‍ट की लागत अपने मूल 964 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,509 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. हालांकि केंद्र और दिल्‍ली में एक ही पार्टी की सरकार होने के चलते जल्‍द इसमें तेजी आने की उम्‍मीद है.

मयूर विहार-सराय काले खां बारापुल्ला फेज-3 प्रोजेक्‍ट इस अप्रैल में अपने दसवें साल में प्रवेश करने जा रहा है. लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि यह पुल 2025 में भी पूरा होने की संभावना नहीं है. अरविंद केजरीवाल की सरकार अब सीएम रेखा गुप्ता के कार्यकाल में भी यह प्रोजेक्ट अधर में लटका हुआ है. PWD अधिकारियों के अनुसार, अप्रैल 2015 में शुरू हुआ था और इसे अक्टूबर 2017 तक पूरा करना था. लेकिन भूमि अधिग्रहण की समस्याओं और फिर कोविड-19 महामारी ने इसकी राह में रोड़े अटकाए.

दो दिक्‍कतों से फंसा प्रोजेक्‍ट
एक PWD अधिकारी ने बताया कि नौ साल तक यह प्रोजेक्ट दो जगहों पर 8.5 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की बाधा से जूझता रहा. ये जमीन नंगली राजापुर गांव के किसानों की थी, जिसके चलते पुल में 790 मीटर का अंतर दो स्थानों पर बना रहा. हालांकि, अब भूमि अधिग्रहण की समस्या हल हो चुकी है, लेकिन नई चुनौतियां सामने आ खड़ी हुई हैं. अधिकारी ने बताया कि पुल के रास्‍ते में आने वाले पेड़ों को काटने की अनुमति अभी तक वन विभाग से नहीं मिली है. “यह अनुमति डेढ़ साल से अधिक समय से लंबित है. अगर अनुमति मिल भी जाए, तो इन खाली हिस्सों को पूरा करने में लगभग एक साल और लगेगा. वन विभाग के अधिकारियों ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया है.

एनएचएआई मॉडल पर करना होगा काम
PWD सूत्रों के मुताबिक यमुना नदी के किनारे वाली जमीन पर प्रोजेक्‍ट का काम फिर से शुरू हो चुका है. यहां 14 डबल पियर्स बनाए गए हैं और नदी के बीच का ढांचा भी पूरा हो चुका है. अब पुल का वजन संभालने वाले टावरों पर काम चल रहा है, जो मानसून से पहले पूरा हो सकता है. हालांकि दूसरा हिस्सा अभी भी शुरू नहीं हुआ है. सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI) के मुख्य वैज्ञानिक और ट्रैफिक इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख डॉ. एस वेलमुरुगन ने कहा, “दिल्ली को इन समस्याओं से निपटने के लिए योजना स्तर पर काम करना होगा. NHAI मॉडल को अपनाना चाहिए, जो प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करता है.

First Published :

March 27, 2025, 08:09 IST

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