Last Updated:January 21, 2026, 13:40 IST
DGP Viral Videos Photos: कर्नाटक के निलंबित डीजीपी (सिविल राइट्स एनफोर्समेंट) के. रामचंद्र राव से जुड़े कथित आपत्तिजनक वीडियो मामले में अब कर्नाटक राज्य महिला आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. नागलक्ष्मी चौधरी ने इस पूरे मामले को कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम 2013 (POSH Act) के तहत कार्रवाई योग्य बताते हुए राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग की है.

बेंगलुरु: महिला आयोग की अध्यक्ष ने इस संबंध में राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र लिखकर सात दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट तलब की है. आयोग ने साफ शब्दों में कहा है कि इस तरह के मामलों में कठोर दंड आवश्यक है, ताकि महिलाओं की गरिमा बनी रहे और समाज में जीरो टॉलरेंस का स्पष्ट संदेश जाए. महिला आयोग के पत्र में उल्लेख किया गया है कि मीडिया और सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे वीडियो फुटेज में एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को पुलिस वर्दी में अपने कार्यालय के भीतर महिलाओं के साथ अभद्र और अशोभनीय व्यवहार करते हुए देखा जा रहा है.

आयोग ने कहा कि एक उच्च पदस्थ पुलिस अधिकारी, जिसका कर्तव्य महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, यदि इस प्रकार के व्यवहार में लिप्त पाया जाता है, तो यह न केवल कानून के शासन को कमजोर करता है बल्कि समाज में गलत संदेश भी देता है. आयोग ने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती हैं और नागरिक समाज में पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं.

महिला आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह मामला POSH Act 2013 के अंतर्गत आता है, क्योंकि आरोप कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ अनुचित व्यवहार से जुड़े हैं. आयोग ने सरकार से आग्रह किया है कि कानून के तहत स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाए और दोषी पाए जाने पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए.
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वीडियो सामने आने के बाद कर्नाटक सरकार ने डीजीपी के. रामचंद्र राव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी सार्वजनिक रूप से कहा है कि मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा चुकी है और किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा. इस बीच, अधिवक्ता नरेश कुमार ने भी डीजीपी रामचंद्र राव के खिलाफ कर्नाटक राज्य महिला आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत में डीजीपी को सेवा से बर्खास्त करने, स्वतंत्र जांच कराने और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है.

महिला आयोग ने अपने पत्र में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया है कि यदि ऐसे मामलों में ढिलाई बरती जाती है, तो इससे महिलाओं के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ेगी और समाज में यह संदेश जाएगा कि प्रभावशाली पदों पर बैठे लोग जवाबदेही से बच सकते हैं. अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और पुलिस प्रशासन महिला आयोग की रिपोर्ट और सिफारिशों पर आगे क्या कार्रवाई करता है.
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1 hour ago
