DNA: खलीफा से 'खलीफा' का 'परमाणु वाला धोखा'!...एर्दोआन को अब 'एटम बम' बनाना है!

1 hour ago

Iran Nuclear Arms: एक सवाल दुनियाभर में जोर पकड़ रहा है कि क्या तुर्किये के खलीफा ईरान के खलीफा के साथ कोई परमाणु खेल खेल रहे हैं. क्या तुर्किये, ईरान के यूरेनियम को अपने कब्जे में लेकर अपना परमाणु हथियार बनाने की फिराक में हैं. ये सवाल क्यों उठ रहे हैं. अगर ऐसा हुआ तो क्या होगा और 21वीं सदी नई न्यूक्लियर रेस क्यों शुरू हो गई है.

सबसे पहले आपको ये जानना चाहिए कि ईरान और तुर्किए में परमाणु वाले खेल की ये थ्योरी आई कहां से. विदेशी मीडिया के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच तुर्किये में बैठक होने वाली है. खबर आ रही है कि ये मीटिंग इसी हफ्ते होने वाली है.

क्यों रखी जा रही मीटिंग

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ये बैठक ईरान और अमेरिका के बीच जारी टेंशन को कम करने के मकसद से रखी जा रही है. और इसमें तुर्किये मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. लेकिन एक दिलचस्प कहानी ये निकल कर आ रही है कि इसके पीछे तुर्किये का एक स्वार्थ छिपा है, जिसे समझने के लिए आपको तुर्किये का ऑफर जानना चाहिए.

खबर है कि तुर्किये इस बैठक में एक ऑफर रखने वाला है, जिसके मुताबिक तुर्किये ईरान को ये ऑफर दे सकता है कि वो अपना 440 किलो संवर्धित यूरेनियम स्थायी रूप से तुर्किये को सौंप दे और भविष्य के लिए सुरक्षा की गारंटी ले ले.

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— Zee News (@ZeeNews) February 2, 2026

ये प्रस्ताव अमेरिका और ईरान के बीच टेंशन को तो कम कर सकता है. लेकिन सवाल तो ये भी खड़े होते हैं क्या इस डील के तहत ईरान के 60% संवर्धित यूरेनियम को लेकर क्या तुर्किये खुद का परमाणु हथियार बनाने की प्लानिंग कर रहा है. ये थ्योरी सिर्फ विदेशी मीडिया की चर्चाओं पर आधारित नहीं है. क्यों तुर्किये की परमाणु महत्वाकांक्षाएं भी बीते कुछ वक्त में चरम पर हैं. खलीफा एर्दोगन लंबे वक्त से परमाणु बम हासिल करने की होड़ में हैं.

क्या थी एर्गोदन की 2019 वाली स्पीच

2019 में तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्गोदन ने खुद कहा था कि "कुछ देशों के पास परमाणु हथियार हैं, लेकिन वो हमें रखने से मना करते हैं. यह अस्वीकार्य है." 2024 में एर्दोगन के धर्मगुरु हयरेटिन करमन ने भी कहा था कि तुर्कीये को परमाणु हथियार हासिल करने चाहिए. जुलाई 2025 में तुर्किये में एक सर्वे भी करवाया गया था जिसमें 71% लोगों ने परमाणु हथियार विकसित करने का समर्थन किया था.

तुर्किये का ईरान को ऑफर.. और एर्गोदन की परमाणु बम बनाने की जिद्द से साफ पता चल रहा है कि तुर्किये क्या खेल खेल रहा है. ईरान के लिए आगे कुआं पीछे खाई है.अगर तुर्किए के ऑफर को मान लेता है तो यह सीधे-सीधे अमेरिका और इजरायल को अटैक का बहाना देने के समान होगा और अगर वो तुर्किए का ऑफर ठुकरा देता है तो संकट के समय सहारा खोने का खतरा है। लेकिन बीच ईरान को लेकर एक और नई खबर है.

एक राष्ट्रपति ने दावा किया है कि अगले 48 घंटे में अमेरिका ईरान पर हमला कर देगा. उस राष्ट्रपति ने इस दावे के पीछे एक दलील दी है. दलील ये- कि जब भी एपस्टीन का शोर होता है, यूएस में बड़ा स्कैंडल सामने आता है, तब अमेरिका कहीं ना कहीं हमला करता है. दावा करे वाले सर्बिया के राष्ट्रपति हैं. नाम है- अलेक्जेंडर वुसिक.

सर्बियाई राष्ट्रपति वुसिक ने कहा है, जब भी किसी बड़े देश के शीर्ष नेतृत्व पर 'निजी' संकट आता है, तो अक्सर दुनिया में कहीं न कहीं बम फटने लगते हैं. साल 1998 में तत्कालीन अमेरिका राष्ट्रपति बिल क्लिंटन का वाइट हाउस की कर्मचारी मोनिका लेविंस्की के साथ स्कैंडल सामने आया था. तभी दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए अमेरिका ने इराक और सूडान पर क्रूज मिसाइलों से हमला किया था. अब वर्ष 2026 है. डॉनल्ड ट्रंप और एपस्टीन फाइल्स का विवाद सामने आया है. ऐसे में वुसिक ने अगले 48 घंटों में ईरान पर हमले की आशंका जताई है.

ईरान पर हमला कर सकते हैं ट्रंप

वुसिक का तर्क सीधा है- जब घर में बदनामी का शोर बढ़ता है, तो सरहद पर तोपें चलाकर उस शोर को दबा दिया जाता है. इस समय अमेरिका में 'एपस्टीन फाइल्स' को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के नाम की चर्चा है, और वुसिक का मानना है कि इसी दबाव में ईरान पर हमला हो सकता है.

अब आप कहेंगे कि ये सिर्फ एक थ्योरी है. लेकिन इन कड़ियों को जोड़कर देखिए. शुक्रवार को पेंटागन में एक ऐसी बैठक हुई, जिसे दुनिया की नज़रों से बचाने की पूरी कोशिश की गई.

अमेरिकी ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ डैन केन और इजरायली सैन्य प्रमुख एयाल ज़मीर के बीच हुई. इस बैठक को लेकर सबसे अहम बात यह है कि ज़मीर मीटिंग के लिए प्राइवेट जेट से 'सीक्रेट' यात्रा पर अमेरिका पहुंचे. मीटिंग का एजेंडा ईरान के परमाणु सैन्य ठिकानों पर सैन्य हमला था. इजरायल ने अमेरिका को अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. और वो रुख साफ तौर से यही है कि ईरान पर अगर अभी हमला कर उसे शांत नहीं किया गया तो फिर ये कभी नहीं किया जा सकेगा.

नेतन्याहू ने भी की हाईलेवल बैठक

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक की, जिसमें सेना प्रमुख एयाल ज़मीर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे. ज़मीर अमेरिका के सीक्रेट दौरे से लौटे हैं. मोसाद निदेशक डेविड बार्निया भी इस बैठक में उपस्थित थे. खबर ये है कि इजरायल अमेरिका को ईरान पर हमला करने के लिए 'मना' रहा है. लेकिन अमेरिका सुरक्षा कारणों और चुनाव के बाद की राजनीति के कारण थोड़ा हिचक रहा है.

खबर है कि अमेरिका और ईरान के बीच अनौपचारिक बातचीत भी चल रही है. अमेरिकी हिचक का यह एक बड़ा कारण है. ट्रंप भी कह रहे हैं कि तेहरान यूएस के साथ गंभीरता से बातचीत कर रहा है और उन्हें उम्मीद है कि शर्तें मंज़ूर होंगी.

तो क्या इजरायल रुक जाएगा? सूत्रों की मानें तो इजरायल अब 'प्लान-बी' पर काम कर रहा है. यानी अगर अमेरिका साथ नहीं आता, तो इजरायल अकेले ही ईरान पर हमला कर सकता है.

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