DNA: पहले पूछा धर्म फिर मारा चाकू, अमेरिका में पहलगाम जैसा हमला, दरवाजे तक पहुंची नफरती सोच

1 hour ago

Parkland Attack: डॉनल्ड ट्रंप के देश में पहलगाम जैसा हमला हुआ है. वो भी ऐसे टाइम पर जब दुनिया के बड़े मंचों पर जब अमेरिका कट्टरपंथ और विवादित चेहरों को गले लगाता है. जब प्रेसिडेंट ट्रंप पाकिस्तान की आतंकी सेना के प्रमुख आसिम मुनीर से हाथ मिलाकर फोटो खिंचवाते हैं. आतंकवादी से सीरिया के राष्ट्रपति बने अहमद अल-शरा को वाइट हाउस में दावत देते हैं तो उसका असर ज़मीनी स्तर पर कितना भयानक होता है. ये उसका सबसे बड़ा उदाहरण है..जो दुनिया के सामने आज दिख रहा है.

अमेरिका के पार्कलैंड में हुआ अटैक

अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में एक शख्स को धर्म पूछकर मारा गया. वॉशिंगटन के पार्कलैंड में ये हमला हुआ है. एक शख्स पर और उसके पालतू कुत्ते पर जानलेवा हमला किया गया. रविवार की सुबह करीब 6:30 बजे, एडि एनिट्शके नाम के एक व्यक्ति अपनी कार के पास थे, तभी एक मुस्लिम हमलावर ने उनसे उनका नाम पूछा. एडि ने जैसे ही खुद को 'ईसाई' बताया, उस शख्स ने दो चाकुओं से उन पर हमला कर दिया. इस बर्बरता की हद तो तब हो गई जब उसने एडि को बचाने आए उनके पालतू कुत्ते को भी बुरी तरह गोद डाला. पुलिस के मुताबिक, हमलावर कट्टरपंथी विचारधारा से प्रेरित था, जिसे बाद में जवाबी कार्रवाई में ढेर कर दिया गया.

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पहले धर्म पूछा फिर मारा चाकू

सीसीटीवी फुटेज में नजर आ रहा है कि एक शख्स सुबह के वक्त अपने कुत्ते को टहला रहा है. तभी एक दूसरा शख्स आकर उससे पूछता है- "तुम्हारा धर्म क्या है?" पहले तो एडि नाम का यह पीड़ित, जवाब में कहता है कि "धर्म से क्या मतलब है?" तो हमलावर कहता है- "तुम्हारा कोई तो धर्म होगा?" एडि जवाब में उसे जैसे ही "क्रिश्चियन" कहता है कि हमलावर अचानक चाकू से उस पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर देता है. पीड़ित व्यक्ति और हमलावर भाग कर रोड क्रॉस करते हैं. हमलावर फिर हमले शुरू कर देता है. पीड़ित का पालतू कुत्ता जब भौंकता है तो वह उस पालतू कुत्ते पर भी चाकू से हमले करता है. घायल एडि और उनका कुत्ता फिलहाल अस्पताल में हैं, लेकिन यह हमला आने वाले बड़े खतरे की तरफ इशारा है.

यह घटना महज एक सामान्य आपराधिक घटना नहीं है. इसे उस बदलती वैश्विक राजनीति से जोड़कर देखने की जरूरत है, जहां कट्टरपंथ को 'डिप्लोमेसी' का नाम दिया जा रहा है. जब सत्ता के गलियारे कट्टरपंथियों के प्रति नरम होते हैं, तो रेडिकलाइजेशन की आग पार्कलैंड जैसी गलियों तक पहुंच जाती है.

अमेरिका के दरवाजे तक पहुंची नफरत

पार्कलैंड की इस घटना ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है कि ट्रंप द्वारा कट्टरपंथियों को सहलाए और गुदगुदाए जाने से क्या मजहबी नफरत अब अमेरिका के आम नागरिकों के घरों के दरवाजे तक पहुंच गई है?

एक तरफ वाइट हाउस में विवादित चेहरों का स्वागत, और दूसरी तरफ गलियों में मासूमों का कत्लेआम. वॉशिंगटन के पार्कलैंड में एक ईसाई व्यक्ति और उसके बेजुबान कुत्ते पर हुआ हमला कोई इकलौती घटना नहीं है. अगर हम इतिहास और भूगोल के पन्ने पलटें, तो पार्कलैंड से लेकर भारत के पहलगाम तक, कट्टरपंथ का एक ही डरावना पैटर्न नज़र आता है.

सिडनी में भी 15 लोग मारे गए थे

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में इसी तरह कट्टरपंथियों और आतंकियों ने धर्म पूछकर 26 लोगों को गोलियों से भून दिया था. तब यही ट्रंप के अमेरिका ने इसे कश्मीरी लड़ाकों की कार्रवाई बताया था. धर्म पूछ कर मारने वाले आतंकी मुस्लिम कट्टरपंथी थे. 14 दिसंबर 2025 को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी के बॉन्डी बीच में धर्म पूछकर पिता-पुत्र की जोड़ी  ने 15 लोगों को गोलियों से भून दिया था. वे दोनों भी इस्लामी कट्टरपंथी थे और अब पार्कलैंड के ताजा मामले में हमलावर ने पहले धर्म पूछा और फिर खूनी खेल खेला. इन सबमें एक बात कॉमन है...चेहरा एक ही है...पैटर्न भी एक है, लेकिन यह बात ट्रंप को समझ नहीं आ रही है.

पार्कलैंड की घटना ने साफ कर दिया है कि जब तक कट्टरपंथ की जड़ पर प्रहार नहीं होगा, तब तक कोई भी सड़क और कोई भी नागरिक सुरक्षित नहीं है. चाहे वो भारत का कश्मीर हो या अमेरिका का वॉशिंगटन, नफरत का यह वायरस हर जगह एक ही भाषा बोल रहा है.

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