Finland Education: 7 साल तक सिर्फ मौज-मस्ती! न होमवर्क की टेंशन, न एग्जाम का डर, फिर भी दुनिया में नंबर-1

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Last Updated:February 16, 2026, 08:39 IST

Finland Education System vs Indian Education System: फिनलैंड का एजुकेशन सिस्टम दुनिया में नंबर-1 क्यों माना जाता है? रट्टा मारने के कल्चर से दूर, कैसे यह बच्चों को भविष्य के लिए तैयार करता है? भारतीय शिक्षा प्रणाली और फिनलैंड के मॉडल में काफी अंतर है.

7 साल तक सिर्फ मौज-मस्ती! न होमवर्क की टेंशन, न Exam का डर, दुनिया में नंबर 1Zoom

Finland Education: भारतीय और फिनलैंड के एजुकेशन सिस्टम में बहुत अंतर है

नई दिल्ली (Finland Education System vs Indian Education System). क्या आपने कभी ऐसे स्कूल की कल्पना की है, जहां न सुबह-सुबह भारी बस्ते का बोझ हो, न होमवर्क की टेंशन और न ही साल के आखिर में रिजल्ट का डर? सुनने में यह किसी फिल्म की कहानी लग सकती है, लेकिन फिनलैंड ने इसे हकीकत बना दिया है. जहां दुनियाभर के छात्र किताबों में सिर खपाए रहते हैं, वहीं फिनलैंड के बच्चे खेल-कूद और लाइफ स्किल्स सीखकर दुनिया के सबसे होनहार छात्र बन रहे हैं (General Knowledge).

फिनलैंड में शिक्षा को बोझ नहीं, बल्कि सेलिब्रेशन माना जाता है. भारत में जहां 90% नंबर लाने की होड़ लगी रहती है, वहीं फिनलैंड ने समानता और खुशी को अपना मूल मंत्र बनाया है. यहां कॉम्पिटिशन नाम की कोई चीज नहीं है. वहां हर बच्चे को खास माना जाता है. भारतीय सिस्टम में जेईई और नीट के लिए बचपन से ही पसीना बहाना शुरू हो जाता है. लेकिन फिनलैंड में 16 साल की उम्र तक कोई बड़ा एग्जाम होता ही नहीं. तो क्या फिनलैंड का बच्चा पीछे रह जाता है? बिल्कुल नहीं! वे ग्लोबल इंडेक्स में हमेशा टॉप पर रहते हैं.

फिनलैंड vs भारत: 5 पॉइंट्स में समझें पूरा खेल

फिनलैंड और भारतीय एजुकेशन सिस्टम में बहुत अंतर है. फिनलैंड का एजुकेशन सिस्टम समझकर हर बच्चे का वहीं जाकर पढ़ाई करने का दिल करेगा.

1- परीक्षाओं का कोई दबाव नहीं

फिनलैंड में 16 साल की उम्र तक बच्चों की कोई औपचारिक परीक्षा नहीं होती. वहां शिक्षकों का मानना है कि परीक्षा लेने से छात्र केवल रट्टा मारना सीखते हैं. इसके विपरीत, भारत में नर्सरी क्लास से ही बच्चों के कंधों पर परीक्षा का बोझ डाल दिया जाता है, जिससे उनकी सीखने की क्रिएटिविटी खत्म हो जाती है.

2. होमवर्क का बोझ नहीं

फिनिश (Finnish) स्कूलों में बच्चों को बहुत कम या न के बराबर होमवर्क दिया जाता है. उनका मानना है कि स्कूल के बाद का समय बच्चों के खेलने और परिवार के साथ बिताने के लिए होना चाहिए. भारत में स्थिति ठीक उलट है. यहां स्कूल के बाद ट्यूशन और फिर घंटों होमवर्क से बच्चों का बचपन सीमित हो जाता है.

3. शिक्षकों का उच्च स्तर

फिनलैंड में शिक्षक बनना सबसे कठिन काम है. वहां केवल मास्टर डिग्री धारक और टॉप 10% ग्रेजुएट्स ही शिक्षक बन सकते हैं. शिक्षकों को स्वायत्तता (Autonomy) दी जाती है कि वे अपने तरीके से पढ़ा सकें. भारत में टीचर्स की ट्रेनिंग और क्वॉलिटी में अभी भी बहुत सुधार की जरूरत है.

4. फिनलैंड में समानता पर जोर

फिनलैंड में प्राइवेट स्कूलों का कॉन्सेप्ट लगभग न के बराबर है. अमीर हो या गरीब, सभी बच्चे एक ही तरह के स्कूलों में पढ़ते हैं. वहां स्कूलों के बीच कोई रैंकिंग नहीं होती. भारत में शिक्षा को मार्केट बना दिया गया है और निजी-सरकारी स्कूलों के बीच का अंतर एक बड़ी चुनौती है.

5. देर से शुरुआत, बेहतर परिणाम

फिनलैंड में बच्चे 7 साल की उम्र में स्कूल जाना शुरू करते हैं. उससे पहले उन्हें केवल खेल-कूद के माध्यम से सिखाया जाता है. भारत में प्री-स्कूलिंग का चलन बढ़ रहा है, जहां 3-4 साल के बच्चों को भी लिखना और पढ़ना सिखाया जाने लगता है.

क्या आप जानते हैं कि फिनलैंड में स्कूल के बीच में 15 मिनट का ‘प्ले ब्रेक’ हर 45 मिनट के बाद अनिवार्य है?

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Deepali Porwal

With more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academic sys...और पढ़ें

First Published :

February 16, 2026, 08:39 IST

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