Last Updated:January 09, 2026, 22:14 IST
ईडी (ED) ने साफ किया है कि उसकी हालिया कार्रवाई 'इंडियन पीएसी कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड' के खिलाफ है, न कि सीधे I-PAC पर. विपक्षी दल इसे राजनीतिक छापा बता रहे हैं, जबकि जांच एजेंसी इसे एक निजी कंपनी के वित्तीय लेन-देन की जांच मान रही है. यह कंपनी पश्चिम बंगाल और बिहार समेत 7 राज्यों में जीएसटी रजिस्टर्ड है. ईडी पैन कार्ड और जीएसटी रिकॉर्ड के आधार पर संदिग्ध मनी ट्रेल की जांच कर रही है.
ईडी ने सख्त रुख अख्तियार किया. नई दिल्ली. सियासत की बिसात पर चालें चलने वाली और बड़े-बड़े दिग्गजों की किस्मत बदलने वाली संस्था I-PAC अचानक खुद सुर्खियों में है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई ने राजनीतिक गलियारों में एक ऐसा तूफान खड़ा कर दिया है, जिसे विपक्षी दल चुनावी रंजिश और पॉलिटिकल एक्शन का नाम दे रहे हैं. माहौल कुछ ऐसा है जैसे किसी बड़ी सियासी फिल्म का क्लाइमेक्स चल रहा हो—एक तरफ फाइलों का ढेर, दूसरी तरफ राज्यों में फैला नेटवर्क और बीच में फंसी एक ऐसी कंपनी जिसका नाम सत्ता के गलियारों में गूंजता है. लेकिन क्या यह छापा सीधे उसी I-PAC पर है जिसे हम जानते हैं या परदे के पीछे की कहानी कुछ और ही है? ईडी (ED) के उच्च पदस्थ सूत्रों ने इस पूरे ड्रामे से परदा उठाते हुए साफ किया है कि यह कार्रवाई किसी पॉलिटिकल कमेटी पर नहीं बल्कि एक कॉर्पोरेट इकाई के खिलाफ है. जांच की आंच इंडियन पीएसी कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (Indian Pac Consulting Private Limited) तक पहुंची है. भले ही इसे राजनीतिक चश्मे से देखा जा रहा हो लेकिन कागजों पर यह जंग जीएसटी नंबरों, पैन कार्ड और करोड़ों के वित्तीय लेन-देन की है. जब सियासी दांव-पेंच और वित्तीय कानून आपस में टकराते हैं तो शोर मचना लाजिमी है, और इस बार यह शोर देश के सात राज्यों तक सुनाई दे रहा है.
I-PAC पर सीधा छापा नहीं: ईडी ने दी सफाई
ईडी सूत्रों के अनुसार, राजनीतिक दल जिस भ्रम की स्थिति को पैदा कर रहे हैं, वह हकीकत से परे है. एजेंसी का कहना है कि यह सर्च ऑपरेशन Indian Pac Consulting Private Limited के खिलाफ है, न कि सीधे I-PAC (Indian Political Action Committee) के खिलाफ. हालांकि कानूनी रूप से ये दोनों इकाइयां एक-दूसरे से जुड़ी हुई मानी जाती हैं लेकिन ईडी की कार्रवाई का आधार कंपनी का रजिस्टर्ड पैन नंबर (AADCI8016Q) है.
राज्यों में फैला कारोबारी नेटवर्क
ईडी के रिकॉर्ड के मुताबिक यह कंपनी एक बड़े कारोबारी नेटवर्क का हिस्सा है. जांच एजेंसी की नजरें कंपनी के उन वित्तीय लेन-देन पर हैं जो विभिन्न राज्यों में किए गए हैं.
· रजिस्ट्रेशन: यह कंपनी देश के कुल 7 राज्यों में पंजीकृत है.
· प्रभाव वाले क्षेत्र: पश्चिम बंगाल, गोवा, आंध्र प्रदेश, बिहार, मेघालय, दिल्ली और त्रिपुरा.
· GST कनेक्शन: कंपनी इन सभी राज्यों में अलग-अलग जीएसटी नंबरों के साथ काम कर रही है.
क्या है कानूनी पेच? 5 सवालों में समझें पूरा मामला
1. क्या ईडी ने प्रशांत किशोर की संस्था I-PAC पर छापा मारा है?
नहीं, तकनीकी रूप से छापा ‘Indian Pac Consulting Private Limited’ पर मारा गया है. I-PAC इस कंपनी से जुड़ी एक इकाई है, लेकिन कानूनी रूप से दोनों अलग-अलग हैं.
2. जांच का मुख्य आधार क्या है?
ईडी की यह कार्रवाई कंपनी के पैन नंबर और उससे जुड़े 7 जीएसटी रजिस्ट्रेशन के आधार पर वित्तीय अनियमितताओं की जांच के तहत की गई है.
3. क्या यह कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध है?
विपक्षी दल इसे राजनीतिक कार्रवाई बता रहे हैं, जबकि ईडी का कहना है कि यह पूरी तरह से एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के वित्तीय लेन-देन की रूटीन जांच है.
4. किन राज्यों में कंपनी के दफ्तरों पर नजर है?
जांच की आंच उन 7 राज्यों तक है जहां कंपनी जीएसटी के तहत रजिस्टर्ड है, जिनमें पश्चिम बंगाल, बिहार और दिल्ली जैसे प्रमुख राज्य शामिल हैं.
5. क्या I-PAC और कंसल्टिंग कंपनी एक ही हैं?
I-PAC एक राजनीतिक रणनीति इकाई है, जबकि Indian Pac Consulting एक रजिस्टर्ड प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है. ईडी की जांच मुख्य कंपनी के मामलों को लेकर है.
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पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और...और पढ़ें
First Published :
January 09, 2026, 22:14 IST

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