पिछले एक साल से भारत-अमेरिका के बीच चल रहे तनावपूर्ण रिश्तों में सुधाव हुआ है. जिसके नतीजे में अमेरिका ने भारत के साथ ट्रेड डील कर ली है और टैरिफ भी कम कर दिया है. 2025 में अमेरिका ने भारतीय सामान पर 25% लगाया, इसके अलावा रूस तेल खरीदने को लेकर अतिरिक्त 25 फीसद टैरिफ लगाया. जिसके बाद भारत पर कुल टैरिफ 50 फीसद हो गया. साथ ही भारत पर तेल खरीद को लेकर दबाव भी बनाया, जिससे व्यापार बातचीत और कूटनीतिक संवाद तनाव में आ गया. 2026 का फरवरी महीना इन दो अर्थव्यस्थाओं के लिए शुभ साबित हुआ. अमेरिका ने भारत पर टैरिफ भी कम कर दिया और डील भी हुई है. जिससे रिश्तों में फिर गर्मजोशी और भरोसे की भावना लौटने लगी है, हालांकि कई महत्वपूर्ण विवरण अभी स्पष्ट नहीं हैं.
अमेरिका-भारत के बीच हुए हालिया दो तरफा समझौते को लेकर दुनियाभर से जवाब आ रहे हैं. दक्षिण एशिया विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन ने इसे एक महत्वपूर्ण भरोसा बढ़ाने वाला कदम बताया है, जो महीनों से तनावग्रस्त संबंधों में शायद सबसे बड़ी जीत साबित हो सकता है. अमेरिकी कांग्रेस वुमन ने टैरिफ के कारण दोनों देशों के बीच सार्थक सहयोग बाधित होने की चेतावनी दी है, जबकि US चैंबर ऑफ कॉमर्स ने टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं में कमी की पहल की सराहना की है.
माइकल कुगेलमैन ने डील पर क्या कहा?
दक्षिण एशिया विश्लेषक माइकल कुगेलमैन ने सोमवार को कहा कि यह समझौता लगभग एक साल में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में 'सबसे बड़ी जीत' है. उन्होंने इस समझौते को महीनों के तनावपूर्ण संबंधों के बाद विश्वास बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम बताया. ऐलान के बाद ANI से बात करते हुए कुगेलमैन ने कहा कि यह समझौता बहुत समय से पेंडिंग था, उन्होंने याद दिलाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी की थी और दोनों नेताओं ने एक व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने का वादा किया था. साथ ही कहा कि इसके बाद के महीनों में संबंधों में कई तनाव आए थे.
कुगेलमैन ने कहा कि यह समझौता दो तरफा रिश्तों में टकराव के अन्य क्षेत्रों को संबोधित करने के लिए रफ्तार पैदा करने में भी मदद करेगा. इसी समय, विश्लेषक ने आगाह किया कि समझौते के कई प्रमुख पहलू अभी भी स्पष्ट नहीं हैं. उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के जरिए की गई सटीक प्रतिबद्धताओं के बारे में सीमित जानकारी है, खासकर ऊर्जा आयात और बाजार पहुंच के संबंध में.
डील के कई अहम पहलू अभी भी नहीं पता
कुगेलमैन ने कहा कि हालांकि भारत ने हाल के महीनों में रूसी तेल का आयात कम किया है, लेकिन ऐसी खरीद को पूरी तरह से बंद करने की कल्पना करना मुश्किल है, और यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि भारत ने कृषि जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों को खोलने पर सहमति व्यक्त की है या नहीं. हमें असल में डील के कई अहम पहलुओं के बारे में पता नहीं है. प्रेसिडेंट ट्रंप ने इशारा किया था कि भारत ने असल में बहुत सी चीजें बंद करने का फैसला किया है, जो सुनने में थोड़ा मुश्किल लग रहा था. मुझे यह सोचना मुश्किल लगता है कि भारत बस रूसी तेल का इंपोर्ट बंद कर देगा.
एग्रीकल्चर सेक्टर पर अभी भी सवालिया निशान
हमने हाल के महीनों में देखा है कि भारत ने रूसी तेल का इंपोर्ट कम किया है, खासकर नवंबर के आखिर में रूस पर नए अमेरिकी प्रतिबंध लगने के बाद. यह कोई हैरानी की बात नहीं है कि ट्रंप ने कहा कि भारत ज्यादा अमेरिकी सामान इंपोर्ट करेगा, लेकिन कई दूसरे अहम मुद्दे हैं जिनके बारे में हमें नहीं पता. इस समय, हमें नहीं पता कि भारत ने अपने एग्रीकल्चर सेक्टर जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील सेक्टरों तक पहुंच खोलने पर सहमति दी है या नहीं.
कांग्रेस वुमन भी ट्रंप को लताड़ा
कुगेलमैन ने आगे बताया कि रूसी तेल इंपोर्ट पर अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 परसेंट टैरिफ के भविष्य को लेकर सवाल बने हुए हैं, टैरिफ रेट को 18 परसेंट तक कम करने के अलावा, इस बात पर जोर देते हुए कि डील का पक्का आकलन तभी संभव होगा जब दोनों पक्षों द्वारा दी गई रियायतों पर ज्यादा क्लैरिटी सामने आएगी. मुझे लगता है कि अभी सबसे बड़े सवालों में से एक यह है कि रूसी तेल के इंपोर्ट के लिए अमेरिका ने भारत पर जो 25 परसेंट टैरिफ लगाया था, उसका क्या होगा? हमें नहीं पता कि उसे हटाया जाएगा या नहीं. हमें बस इतना पता है कि शुरुआती 25 परसेंट टैरिफ को घटाकर 18 परसेंट कर दिया जाएगा.
दोनों देशों के बीच सहयोग बर्बाद हुआ
अमेरिकी कांग्रेसवुमन सिडनी कामलेगर-डोव ने ट्रंप प्रशासन से द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए तेजी से कार्रवाई करने का अपील की है. रूसी तेल खरीदने के चलते लगाए गए अतिरिक्त 25 फीसद टैरिफ की आलोचना करते हुए कहा,'अमेरिका के इस कदम के चलते दोनों देशों के बीच सार्थक सहयोग में बाधा डाली थी और एक साल जो सार्थक सहयोग चल सकता था उसको भी बर्बाद कर दिया.'
US चैंबर ऑफ कॉमर्स ने क्या कहा?
US चैंबर ऑफ कॉमर्स की अध्यक्ष और CEO सुजैन पी क्लार्क ने कहा,'हम US और भारतीय सरकारों को टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने की उनकी घोषणा पर बधाई देते हैं, जिससे इन दोनों महान देशों में अमेरिकी और भारतीय कंपनियों और श्रमिकों को फायदा होगा.' उन्होंने इस कोशिश के पीछे के नेतृत्व की तारीफ की. उन्होंने कहा,'हम राष्ट्रपति ट्रम्प और प्रधानमंत्री मोदी और उनके अधिकारियों, जिसमें राजदूत (विनय) क्वात्रा और (सर्जियो) गोर शामिल हैं, के प्रयासों की सराहना करते हैं.'
अर्थशास्त्री स्टीव हैंके ने बताया टैरिफ अभी भी बड़ी चिंता है
अर्थशास्त्री स्टीव हैंके ने सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी. हैंके ने लिखा,'अपने टैरिफ कम करवाने के बदले में भारत US से 500 बिलियन डॉलर मूल्य की ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि और अन्य चीजें खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है.' हैंके ने कहा कि टैरिफ अभी भी चिंता का विषय हैं. उन्होंने कहा,'भारत पर US टैरिफ अभी भी बहुत अधिक हैं.' एक अलग पोस्ट में उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका भारतीय सामानों पर टैरिफ 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा और भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा.

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