जब भी दुनिया की सबसे पुरानी नदी की बात होती है, तो ज्यादातर लोगों के दिमाग में गंगा या नील का नाम आता है. भारत में तो गंगा को ही सबसे प्राचीन मान लिया जाता है. लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है. वैज्ञानिकों और भूवैज्ञानिकों के अनुसार, दुनिया की सबसे पुरानी नदी भारत या अफ्रीका में नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में बहती है. हैरानी की बात यह है कि यह नदी इंसानों से ही नहीं, बल्कि डायनासोर से भी पहले की है. करोड़ों सालों से यह नदी प्रकृति के तमाम बदलावों को झेलते हुए आज भी अपनी पहचान बनाए हुए है. आइए जानते हैं इस रहस्यमयी और अनोखी नदी के बारे में, जिसका इतिहास सुनकर आप भी चौंक जाएंगे.
गंगा नहीं, फिंके है दुनिया की सबसे प्राचीन नदी
दुनिया की सबसे प्राचीन नदी का दर्जा ऑस्ट्रेलिया की फिंके नदी, जिसे स्थानीय भाषा में लारापिंटा कहा जाता है, को दिया जाता है. माना जाता है कि यह नदी करीब 30 से 40 करोड़ साल पुरानी है. यह समय डायनासोर के धरती पर आने से भी पहले का है. विशेषज्ञों का मानना है कि जब पृथ्वी का स्वरूप बिल्कुल अलग था, तब से यह नदी बह रही है. आमतौर पर नदियां समय के साथ अपना रास्ता बदल लेती हैं या सूख जाती हैं, लेकिन फिंके नदी ने लाखों सालों तक अपनी पहचान बनाए रखी. यही वजह है कि इसे दुनिया की सबसे पुरानी नदी प्रणालियों में गिना जाता है.
रेगिस्तान में बहती अनोखी नदी
फिंके नदी ऑस्ट्रेलिया के बेहद सूखे इलाके में बहती है, इसलिए यह बाकी नदियों जैसी दिखाई नहीं देती. साल के ज्यादातर समय यह नदी बहती हुई नहीं, बल्कि रेत और पानी के छोटे-छोटे गड्ढों जैसी नजर आती है. इसमें बहुत कम पानी होता है और कई बार यह पूरी तरह सूखी हुई लगती है. भूवैज्ञानिक इसे दुनिया की सबसे अनोखी नदियों में से एक मानते हैं. यह नदी ऑस्ट्रेलिया के नॉर्दर्न टेरिटरी क्षेत्र में स्थित है और अपने अलग स्वरूप की वजह से वैज्ञानिकों के लिए भी शोध का विषय बनी हुई है.
कहां से निकलती है और कहां जाकर खत्म होती है
फिंके नदी की शुरुआत एलिस स्प्रिंग्स के पश्चिम में स्थित मैक्डोनेल रेंज से होती है. यहां से यह दक्षिण-पूर्व दिशा में बहते हुए मध्य ऑस्ट्रेलिया के बड़े हिस्से को पार करती है. आगे चलकर यह नदी सिम्पसन डेजर्ट की रेत में विलीन हो जाती है. यह एक मौसमी नदी है, यानी इसमें पानी मुख्य रूप से बारिश के बाद ही आता है. लंबे समय तक सूखी रहने के बावजूद, फिंके नदी मध्य ऑस्ट्रेलिया के प्राकृतिक संतुलन में अहम भूमिका निभाती है और वहां की पारिस्थितिकी का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
स्थानीय लोगों और इतिहास में खास जगह
फिंके नदी सिर्फ भूवैज्ञानिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण है. यह नदी पश्चिमी अर्रेंटे आदिवासी समुदाय के लिए पवित्र मानी जाती है. स्थानीय लोग इसके पारंपरिक संरक्षक हैं और उनकी कहानियों व परंपराओं में इस नदी का खास उल्लेख मिलता है. हालांकि वैज्ञानिक इस बात पर पूरी तरह सहमत नहीं हैं कि फिंके ही दुनिया की सबसे पुरानी नदी है, लेकिन इसकी निरंतरता इसे खास बनाती है. नील, सिंधु और अमेरिका की न्यू रिवर भी लाखों साल पुरानी मानी जाती हैं, लेकिन फिंके नदी आज भी लगभग उसी रूप में मौजूद है, जो इसे सबसे अलग बनाती है.

1 hour ago
