नई दिल्ली (UNICEF Parenting Guide). ‘मेरा बच्चा मोबाइल में लगा रहता है’ या ‘पता नहीं आज-कल इसे इतना गुस्सा क्यों आता है’- क्या आप भी अक्सर यही शिकायत करते हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि बच्चे का शरीर दूध-बादाम से ताकतवर बन रहा हो, लेकिन उसका ‘मन’ कमजोर हो रहा हो? यूनिसेफ की लेटेस्ट रिपोर्ट ऐसी हकीकत सामने लाई है, जिसे हर माता-पिता को सुनना चाहिए. डिजिटल दौर में बच्चों का दिमाग ऐसी स्थिति में है, जहां पढ़ाई का बोझ और स्क्रीन की दुनिया उन्हें अकेला बना रही है.
बच्चों के मन की शांति केवल उनकी मुस्कान नहीं, बल्कि उनके सफल भविष्य की सबसे बड़ी गारंटी है. हम अक्सर बच्चों की शारीरिक चोट पर तो तुरंत पट्टी बांध देते हैं, लेकिन उनके भावनात्मक जख्मों को यह कहकर टाल देते हैं कि ‘अरे, अभी छोटा है, खुद ठीक हो जाएगा.’ यहीं हम गलती कर बैठते हैं. यूनिसेफ ने 7 ऐसे धाकड़ तरीके बताए हैं, जो आपके और आपके बच्चे के बीच की दूरियां तो खत्म करेंगे ही, साथ ही उसे मानसिक रूप से ‘सुपरहीरो’ भी बना देंगे.
अच्छे ग्रेड्स से ज्यादा जरूरी है बच्चे की मेंटल हेल्थ
अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा सिर्फ शानदार नंबर ही न लाए, बल्कि जिंदगी की हर मुश्किल घड़ी में मुस्कुराते हुए खड़ा भी रहे तो ये 7 सीक्रेट्स सिर्फ आपके लिए हैं. जानिए आप अपने बच्चे के बेस्ट फ्रेंड और मेंटर कैसे बन सकते हैं-
1. सिखाएं भावनाओं को स्वीकार करना
बच्चों को यह समझाना बहुत जरूरी है कि गुस्सा, उदासी या डर महसूस करना सामान्य है. जब बच्चा रोए या परेशान हो तो उसे ‘चुप हो जाओ’ कहने के बजाय उससे पूछें कि वह ऐसा क्यों महसूस कर रहा है. उनकी भावनाओं को खारिज न करें.
2. जरूरी है ओपन कम्युनिकेशन
दिनभर में कम से कम 15-20 मिनट का समय ऐसा रखें, जिसमें कोई गैजेट न हो. बच्चे से उसकी स्कूल की बातों के अलावा उसके मन की बातें भी पूछें. जब बच्चा महसूस करता है कि उसे सुना जा रहा है तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है.
3. समझाएं रूटीन का महत्व
एक निश्चित रूटीन बच्चों को सिक्योरिटी का अहसास कराता है. सोने, जागने, खेलने और पढ़ाई का समय तय होने से उनके दिमाग पर फालतू का तनाव नहीं रहता. यूनिसेफ के अनुसार, अनुशासन से मानसिक स्थिरता बेहतर होती है.
4. तारीफ से बढ़ता है मनोबल
बच्चे की छोटी-छोटी उपलब्धियों और उनके अच्छे व्यवहार की तारीफ करें. केवल नंबरों के पीछे भागने के बजाय उनके प्रयासों की सराहना करें. इससे उनमें हार न मानने की प्रवृत्ति (Resilience) विकसित होती है. यह तारीफ सिर्फ अकेले में नहीं, बल्कि पब्लिकली भी करें.
5. स्क्रीन टाइम पर जरूरी है कंट्रोल
मोबाइल या टीवी का बहुत ज्यादा इस्तेमाल बच्चों में एकाग्रता की कमी और चिड़चिड़ापन पैदा करता है. उन्हें आउटडोर गेम्स, पेंटिंग या कहानियों की किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करें. प्रकृति के करीब रहना मानसिक स्वास्थ्य के लिए रामबाण है.
6. खुद बनें बच्चे के रोल मॉडल
बच्चे वही सीखते हैं जो वे देखते हैं. अगर माता-पिता खुद तनाव में चिल्लाते हैं तो बच्चा भी वही सीखेगा. अपनी भावनाओं को शांति से संभालें. तभी बच्चा आपको देखकर विपरीत परिस्थितियों में शांत रहना सीखेगा. इस बात को न भूलें कि बच्चे पर घर के व्यवहार का बहुत असर पड़ता है.
7. प्रोफेशनल मदद लेने में न हिचकिचाएं
अगर आपको लगता है कि बच्चे के व्यवहार में अचानक बहुत ज्यादा बदलाव आया है (जैसे भूख न लगना, नींद न आना या बिल्कुल चुप हो जाना) तो किसी विशेषज्ञ या काउंसलर से सलाह लें. इसे सामाजिक शर्मिंदगी न समझें. इससे बच्चे को बहुत मदद मिलेगी.

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