Play School Admission: 2 या 3 साल, बच्चे को प्ले स्कूल भेजने की सही उम्र क्या है? जान लीजिए फायदे और नुकसान

1 hour ago

नई दिल्ली (Play School Admission Guidelines). सभी माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे की शिक्षा की शुरुआत सबसे बेहतरीन हो. अक्सर देखा जाता है कि जैसे ही बच्चा 2 साल का होता है, आस-पड़ोस और रिश्तेदार उसे प्ले स्कूल भेजने की सलाह देने लगते हैं. लेकिन क्या वाकई सिर्फ कैलेंडर की तारीखें या बच्चे की उम्र यह तय करने के लिए काफी हैं कि वह घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर एक नई दुनिया में कदम रखने के लिए तैयार है? क्या आप बच्चे को प्ले स्कूल भेजने की सही उम्र जानते हैं?

प्ले स्कूल बच्चे के सोशल और मेंटल डेवलपमेंट की पहली सीढ़ी है. यहां जल्दबाजी करना बच्चे के स्वभाव पर निगेटिव असर डाल सकता है. प्ले स्कूल भेजने का फैसला केवल ‘उम्र’ पर नहीं, बल्कि बच्चे की ‘तैयारी’ पर बेस्ड होना चाहिए. हर बच्चा अलग होता है. कोई 2 साल में बाहर घुलने-मिलने के लिए तैयार हो जाता है तो किसी को 3 साल तक अपनी मां का साथ चाहिए होता है. पेरेंट के तौर पर आपको बच्चे के व्यवहार, उसकी संवाद करने की क्षमता और उसकी शारीरिक जरूरतों समझनी चाहिए.

उम्र का पैमाना: क्या कहता है प्ले स्कूल में एडमिशन का नियम?

आमतौर पर प्ले स्कूल के लिए 2 से 3 साल की उम्र को स्टैंडर्ड माना जाता है. भारत में नई शिक्षा नीति (NEP) के अनुसार भी औपचारिक शिक्षा (कक्षा 1) 6 साल की उम्र में शुरू होनी चाहिए, जिससे पहले के तीन साल (3 से 6 साल) प्री-स्कूलिंग के लिए होते हैं. हालांकि, प्ले स्कूल (जो कि प्री-नर्सरी से भी पहले है) में बच्चे को तभी भेजना चाहिए, जब वह कम से कम 2.5 साल का हो जाए. इससे पहले बच्चा शारीरिक और भावनात्मक रूप से बहुत कोमल होता है.

क्या बच्चा प्ले स्कूल के लिए शारीरिक रूप से तैयार है?

प्ले स्कूल में एडमिशन के लिए सिर्फ उम्र ही नहीं, बच्चे की शारीरिक स्वतंत्रता भी मायने रखती है. क्या आपका बच्चा बिना किसी सहारे के अच्छी तरह से चल सकता है? क्या वह अपनी बुनियादी जरूरतों (जैसे भूख या प्यास) को इशारों या छोटे शब्दों में बता सकता है? हालांकि कई प्ले स्कूल ‘पॉटी ट्रेनिंग’ (Potty Training) में मदद करते हैं, लेकिन अगर बच्चा खुद अपनी जरूरत बताने में सक्षम है तो स्कूल में उसका अनुभव बहुत सुखद रहता है.

सामाजिक और भावनात्मक तैयारी

प्ले स्कूल भेजने से पहले देखें कि क्या आपका बच्चा ‘सेपरेशन एंग्जायटी’ (Separation Anxiety) से उबर चुका है? अगर बच्चा आपकी अनुपस्थिति में कुछ घंटों के लिए दादा-दादी या किसी भरोसेमंद व्यक्ति के साथ रह लेता है तो वह स्कूल के लिए तैयार है. इसके अलावा, क्या उसमें अन्य बच्चों के साथ खेलने की उत्सुकता दिखती है? अगर वह घर आए मेहमानों या पार्क में बच्चों को देखकर खुश होता है तो यह स्कूल भेजने का सही संकेत है. अगर नहीं तो आपको इंतजार करना होगा.

बच्चे की संवाद करने की क्षमता

इस बात को समझें कि प्ले स्कूल में आपका बच्चा शिक्षकों और अन्य बच्चों के बीच रहेगा. अगर वह साधारण निर्देश (जैसे यहां बैठो या खाना खाओ या खड़े हो जाओ आदि) समझ लेता है और अपनी बात भी कह पाता है तो वह स्कूल के माहौल में जल्दी ढल जाएगा. संवाद की कमी कभी-कभी बच्चे को स्कूल में चिड़चिड़ा बना सकती है क्योंकि वह अपनी परेशानी साझा नहीं कर पाता. इसलिए बच्चे को प्ले स्कूल भेजने से पहले इन बातों पर गौर करना बहुत जरूरी है.

जल्दबाजी के नुकसान और देरी के फायदे

बहुत जल्दी (जैसे 1.5 साल की उम्र में) स्कूल भेजने से बच्चा असुरक्षित महसूस कर सकता है. वहीं, सही समय पर भेजने से उसमें कॉन्फिडेंस बढ़ता है, उसकी शब्दावली (Vocabulary) बेहतर होती है और वह अनुशासन के शुरुआती पाठ सीखता है. प्ले स्कूल का मकसद पढ़ाई नहीं, बल्कि खेल-खेल में सीखना और सामाजिक होना है. प्ले स्कूल बच्चे को आगे की स्कूलिंग और उठने-बैठने जैसे डिसिप्लिन के लिए तैयार करता है. इससे बच्चा दूसरों के साथ घुलना-मिलना सीखता है.

Checklist for Parents: क्या बच्चा प्ले स्कूल जाने के लिए तैयार है?

अगर नीचे के स्टेटमेंट्स के लिए आपके ज्यादातर जवाब हां में हैं, तो इसका मतलब है कि आपका बच्चा प्ले स्कूल की नई दुनिया में कदम रखने के लिए तैयार है!

1. शारीरिक और व्यक्तिगत क्षमता (Physical Readiness)
[ ] क्या आपका बच्चा बिना सहारे के दौड़ सकता है और सीढ़ियां चढ़ सकता है?

[ ] क्या वह चम्मच से खुद खाना खाने की कोशिश करता है?

[ ] क्या वह अपनी जरूरत (प्यास, भूख या टॉयलेट) को इशारों या शब्दों में बता सकता है?

[ ] क्या वह दिन में 2-3 घंटे बिना सोए सक्रिय (Active) रह सकता है?

2. सामाजिक और भावनात्मक तैयारी (Social & Emotional Readiness)
[ ] क्या वह आपकी अनुपस्थिति में (जैसे दादा-दादी या नैनी के साथ) कुछ घंटों के लिए शांत रह पाता है?

[ ] क्या उसे दूसरे बच्चों के साथ खेलना या उन्हें देखना पसंद है?

[ ] क्या वह अपनी चीजें (जैसे खिलौने या खाना) दूसरों के साथ शेयर करने के लिए तैयार रहता है?

[ ] क्या वह नई जगह या नए लोगों को देखकर बहुत ज्यादा डरता तो नहीं है?

3. संवाद और समझ (Communication Skills)
[ ] क्या वह छोटे वाक्य बोल पाता है (जैसे मुझे पानी चाहिए या मम्मा देखो)?

[ ] क्या वह साधारण निर्देश समझकर उनका पालन करता है (जैसे जूते उतारो या बैठ जाओ)?

[ ] क्या वह अपनी पसंद और नापसंद जाहिर कर पाता है?

[ ] क्या वह कहानियां सुनने या चित्रों को देखने में रुचि दिखाता है?

4. एकाग्रता और दिनचर्या (Routine & Concentration)
[ ] क्या वह किसी एक एक्टिविटी (जैसे पेंटिंग, ब्लॉक जोड़ना या कहानी सुनना) पर 5-10 मिनट ध्यान दे सकता है?

[ ] क्या उसका सोने और जागने का एक निश्चित समय बन चुका है?

विशेषज्ञों की सलाह:
अगर बच्चा इनमें से कुछ चीजों में पीछे है तो घबराएं नहीं. आप घर पर ही खेल-खेल में उसे प्ले स्कूल के लिए तैयार कर सकते हैं:

प्ले डेट्स: उसे पार्क ले जाएं और दूसरे बच्चों के साथ घुलने-मिलने का मौका दें. कहानी सुनाना: रोज उसे चित्र वाली किताबें पढ़कर सुनाएं. इससे उसकी सुनने की क्षमता बढ़ेगी. स्वतंत्रता: उसे छोटे-छोटे काम खुद करने दें, जैसे अपने खिलौने समेटना.
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