Last Updated:January 15, 2026, 07:28 IST
Rafale Deal: भारत सरकार जल्द ही फ्रांस से 114 राफेल खरीदने को मंजूरी देने वाली है. अगर यह मंजूरी मिल जाती है तो भारत के सैन्य इतिहास की यह सबसे बड़ी डील होगी. इससे लड़ाकू विमानों की कमी से जूझ रही एयरफोर्स को बड़ी राहत मिलेगी. इस संभावित डील के मुताबिक विमान के 80 फीसदी हिस्से को भारत में बनाने की योजना है. इसके लिए दसॉल्ट एविएशन भारत में कारखाने लगाएगी. यह डील करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये ही होने वाली है.
भारत जल्द 114 राफेल विमान खरीदने को मंजूरी देने वाला है.Rafale Deal: लड़ाकू विमानों की कमी से जूझ इंडियन एयरफोर्स की परेशानी दूर होने वाली है. सरकार जल्द ही फ्रांस से अत्याधुनिक 114 राफेल विमानों की खरीद को मंजूरी देने वाली है. इससे संबंधित प्रस्ताव पर रक्षा मंत्रालय जल्द ही अपनी मुहर लगाने वाला है. इसके बाद केंद्रीय कैबिनेट इसको अपनी मंजूरी देती है. अगर यह मंजूरी मिल जाती है कि भारत के सैन्य इतिहास का यह सबसे बड़ा डील होगा. माना जा रहा है कि इस डील की कुल लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये आएगी. एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस डील को जल्द ही मंजूरी मिलने की संभावना है. इसमें इस फाइटर जेट के 80 फीसदी से हिस्से को भारत में ही बनाने की योजना है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 12 से 18 विमान फ्लाई वे कंडीशन में आएंगे जबकि अन्य विमानों को भारत में ही बनाया जाएगा.
इस प्रोजेक्ट के लिए राफेल को बनाने वाली कंपनी द सॉल्ट एविएशन अपनी कुछ सुविधाएं भारत शिफ्ट करेगी. इस डील को लेकर फ्रांस के अधिकारियों के साथ भारत सरकार के अधिकारी बातचीत कर रहे हैं. अभी इस विमान की लागत पर ही चर्चा चल रही है. रिपोर्ट के मुताबिक यह डील 2016 की डील वाले रेट पर ही होगा लेकिन इसमें चार फीसदी की दर महंगाई को जोड़ा जा सकता है. ऐसे में बीते करीब 10 वर्षों में महंगाई को जोड़ा जाए तो यह कीमत काफी बढ़ सकती है.
सर्विसेबिलिटी में एफ-35 पर भारी
रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस राफेल के लिए भारत में मेंटेनेंश, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) फैसिलिटी की स्थापना की जाएगी. इससे इस विमान की सर्विसेबिलिटी काफी बढ़ जाती है. एएनआई की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की ओर से राफेल को फाइलन करने के पीछे एक सबसे बड़ी वजह इसकी सर्विसेबिलिटी है. यह रेट 90 फीसदी है. सर्विसेबिलिटी का मतलब यह विमान आपके साथ कितने भरोसेमंद तरीके और कितने लंबे समय तक साथ देगा. इस मामले में यह अमेरिकी के पांचवीं पीढ़ी के विमान के एफ-35 से भी आगे है. राफेल के बीते कई जंग में परीक्षण किया जा चुका है. कंपनी का दावा है कि बीते करीब 15 साल से सर्विस में होने के बावजूद आज तक दुनिया के किसी भी देश में एक भी राफेल विमान को नहीं मार किया गया है. यह अभी तक किसी दुर्घटना की शिकार नहीं हुई है.
सरकार के सूत्रों का कहना है कि भारत का पूरा जोर राफेल के अधिक से अधिक कल पुर्जे भारत में बनें, जिससे मेक इन इंडिया प्रोग्राम को बल मिले. ऐसी भी संभावना है कि भारत में लगने वाले इस सुविधाओं से बनने वाले विमानों का फ्रांसीसी कंपनी निर्यात करे. इससे भारत में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और इस रख रखाव के लिए कल पुर्जों की कभी कमी नहीं आएगी. मौजूदा परिस्थिति में लड़ाकू विमान की कमी से जूझ रही भारतीय एयरफोर्स के लिए राफेल ही सबसे बेहतर विकल्प है. इसी कारण भारत में बीते करीब 15 सालों से केवल राफेल की ही चर्चा हो रही है. भारतीय एयरफोर्स के पास अभी 36 राफेल विमान है. नौसेना के लिए भी 26 मरीन राफेल की डील हुई है.
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न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स...और पढ़ें
First Published :
January 15, 2026, 07:24 IST

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