Last Updated:February 15, 2026, 09:12 IST
Rafale Deal: भारत के रक्षा मंत्रालय ने फ्रांस से 114 राफेल विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी है. इस पर करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे. इसे एक सबसे बड़ी डील बताया जा रहा है लेकिन बीते साल अमेरिका और सऊदी अरब के बीच हुई सैन्य डील की तुलना में यह काफी छोटा है. सऊदी अरब ने अमेरिका के साथ 142 बिलियन डॉलर की डील की है.

Rafale Deal: पिछले दिनों भारत के रक्षा मंत्रालय के रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट्स की खरीद को मंजूरी दे दी. उम्मीद की जा रही है कि इस सौदे पर करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की राशि खर्च होगी. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सोमवार से शुरू हो रही भारत यात्रा से पहले इस सौदे को मंजूरी काफी अहम माना जा रहा है. भारत के रक्षा इतिहास में इससे पहले कभी भी इतनी बड़ी डिफेंस डील नहीं हुई है. इसे दुनिया की भी कुछ चुनिंदा बड़ी डील्स में शामिल किया जा रहा है. लेकिन, यह दुनिया की सबसे बड़ी डील नहीं है.
बीते साल पाकिस्तान के यार माने जाने वाले सऊदी अरब ने अमेरिका के साथ एक सैन्य डील की थी. हालांकि, सऊदी अरब के साथ भारत के भी रिश्ते अच्छे हैं, लेकिन 2025 में ही सऊदी और पाकिस्तान के बीच बने सैन्य गठबंधन के बाद से यह कहा जाने लगा कि दोनों मुल्क यानी पाकिस्तान और सऊदी मिलकर एक इस्लामिक नाटो की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं. इसी कारण सऊदी को पाकिस्तान का यार कहा जाने लगा.
खैर, मुद्दे पर लौटते हैं. बीते साल मई में अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी विदेश यात्रा के लिए सऊदी अरब को चुना था. इसी दौरान दोनों देशों के बीच 142 बिलियन डॉलर के हथियार सौदे पर हस्ताक्षर किए गए थे. भारत और फ्रांस के बीच हो रहा राफेल सौदा करीब 36 से 40 बिलियन डॉलर का है. यानी इस सौदे से करीब चार गुना बड़ा है अमेरिका-सऊदी रक्षा सौदा.
अमेरिका-सऊदी डील
ट्रंप के दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच 600 अरब डॉलर की रणनीतिक निवेश साझेदारी पर मुहर लगी थी. इसी साझेदारी का हिस्सा था 142 अरब डॉलर का रक्षा समझौता. इस रक्षा समझौते में सऊदी की एयरफोर्स को एडवांस बनाने के लिए अमेरिका से कई अहम हथियार और तकनीक खरीदने की बात थी. इस डील में अमेरिकी फिफ्थ जेन फाइटर जेट एफ-35 भी देने की बात सामने आई थी. अगर ऐसा होता है कि अरब क्षेत्र में इजरायल के बाद यह बेहद एडवांस फाइटर जेट हासिल करने वाला सऊदी अरब दूसरा देश बन जाएगा. इसके अलावा अमेरिका ने सऊदी को अपनी पैट्रियट मिसाइलें और एडवांस डिफेंस सिस्टम देने की भी बात कही है. सऊदी की जमीनी सेना को मजबूत करने के लिए अमेरिका उसे 300 से अधिक बेहद एडवांस टैंक भी बेचेगा.
सऊदी के साथ डील के पीछे क्या है वजह
डोनाल्ड ट्रंप से पहले जो बाइडन प्रशासन ने सऊदी अरब के मानवाधिकार रिकॉर्ड को देखते हुए उसे एडवांस हथियार देने से मना कर दिया था. लेकिन, इस वक्त डोनाल्ड ट्रंप का अमेरिका सऊदी पर मेहरबान हैं. इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह ईरान को बताया जा रहा है. अमेरिका अरब मुल्कों के बीच ही ईरान के बदले सऊदी अरब को तैयार करना चाहता है, जिससे एक शक्ति संतुलन बन सके. फरवरी 2026 की स्थिति यह है कि अमेरिका ने सऊदी को 730 पैट्रियट मिसाइलें बेचने की मंजूरी दे दी है. इस पर करीब नौ बिलियन डॉलर खर्च होंगे. इसका मकसद ईरानी मिसाइलों और ड्रोन से मु्काबला करना है.
सऊदी का मिशन 2030
सऊदी अरब की योजना 2030 तक अपनी सेना को पूरी तरह से बदल देने की है. वहां के क्राउन प्रिंस अहमद बिन सलमान ने यह योजना बनाई है. इसी क्रम में उन्होंने अमेरिका के साथ इतनी बड़ी डील की है. इसी क्रम में एफ-35 खरीदने की भी बातचीत चल रही है. 2026 के लिए सऊदी अरब ने रक्षा पर 64 बिलियन डॉलर खर्च करने का बजट तय किया है.
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न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स...और पढ़ें
First Published :
February 15, 2026, 09:04 IST

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