Last Updated:January 26, 2026, 11:32 IST
Highway Based Landing Strip: भारत पूर्वोत्तर में डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में जुटा है. एयरबेस और सैन्य बेस के साथ ही अब एक बड़ा कदम उठाया गया है. अब असम में नेशनल हाईवे पर भी फाइटर जेट्स लैंड कर सकेंगे. सामरिक तौर पर यह बेहद अहम है. इसे इस तरह से तैयार कया गया है कि युद्ध के समय में Su-30MKI, राफेल, MiG-29, TEJAS और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट C-130 हरक्यूलस जैसे जेट्स लैंड कर सकेंगे.
Highway Based Landing Strip: राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बाद अब असम में हाईवे-बेस्ड एयरक्राफ्ट लैंडिंग स्ट्रिप तैयार किया जा रहा है. (फाइल फोटो) Highway Based Landing Strip: बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से चिकन नेक (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) की चर्चा तेज हो गई है. बांग्लादेशी नेताओं की ओर से कई मौकों पर चिकन नेक की बात की जा चुकी है. मोहम्मद यूनुस ने चीन यात्रा के दौरान सेवन सिस्टर्स यानी पूर्वोत्तर के 7 प्रदेशों का उल्लेख किया था. इसके बाद से इस क्षेत्र को लेकर सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं. भारत ने अब इस सेक्टर में डिफेंस सिस्टम को मजबूत और अपग्रेड करना शुरू कर दिया है. बता दें कि चीन और बांग्लादेश की सीमा से लगते इलाके ईस्टर्न कमांड के तहत आते हैं. इंडियन आर्म्ड फोर्सेज इस क्षेत्र में डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करना शुरू कर दिया है. असम में अब नेशनल हाईवे पर जरूरत पड़ने पर राफेल और तेजस जैसे फाइटर जेट्स लैंड कर सकेंगे.
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्वोत्तर भारत के पहले हाईवे बेस्ड आपातकालीन रनवे का उद्घाटन कर इतिहास रचने की तैयारी में हैं. यह अत्याधुनिक सुविधा असम के डिब्रूगढ़-मोरान खंड पर एनच-127 पर विकसित की गई है और इसे क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे के साथ-साथ राष्ट्रीय रक्षा तैयारियों के लिहाज से एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है. ‘इंडियन डिफेंस न्यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, पीएम मोदी की 14 फरवरी को प्रस्तावित यात्रा के दौरान वे स्वयं अपने विमान से इस रनवे पर उतर सकते हैं, जिससे यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ सकती है. इस हाईवे रनवे की चौड़ाई 30 मीटर है और इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि सामान्य दिनों में सड़क यातायात जारी रहे, जबकि जरूरत पड़ने पर इसे कुछ ही समय में एयरस्ट्रिप में बदला जा सके. प्रधानमंत्री की संभावित लैंडिंग को देखते हुए तैयारियां तेज कर दी गई हैं. रनवे वाले हिस्से पर केंद्रीय डिवाइडर हटाए जा चुके हैं, दोनों ओर मजबूत फेंसिंग लगाई गई है और सुरक्षा कारणों से अस्थायी दुकानों को भी ट्रांसफर किया गया है. अधिकारियों ने बताया कि रनवे पूरी तरह ऑपरेशन के लिए तैयार है और सुरक्षा मानकों के अनुरूप सभी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं.
आगरा-लखनऊ हाईवे पर C-130J Hercules लैंड कर चुका है. (फाइल फोटो/AP)
4.5 किलोमीटर लंबा हाईवे रनवे
डिब्रूगढ़ से वरिष्ठ भाजपा नेता पाराग दत्ता ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक क्षण होगा, जिसका असमवासी लंबे समय से इंतजार कर रहे थे. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इससे पहले 8 जनवरी को संकेत दिया था कि इस रनवे का उद्घाटन प्रधानमंत्री या रक्षा मंत्री द्वारा किया जा सकता है. जून 2025 में जिले के दौरे के दौरान उन्होंने इसे डिब्रूगढ़ हवाई अड्डे के लिए एक महत्वपूर्ण बैकअप बताया था, ताकि प्राकृतिक आपदाओं या तकनीकी कारणों से उड़ानें बाधित होने की स्थिति में यह सुविधा काम आ सके. राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (NHIDCL) के तहत 4.5 किलोमीटर लंबे इस हाईवे रनवे का निर्माण अत्याधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक से किया गया है. इसे दोहरे उपयोग (नागरिक और सैन्) के लिए विकसित किया गया है. आपात स्थितियों में यह कुछ ही घंटों में एक कार्यशील एयरफील्ड में तब्दील हो सकता है, जिससे राहत एवं बचाव कार्यों के साथ-साथ सैन्य अभियानों में भी मदद मिलेगी.
आर्म्ड फोर्सेज के लिए वरदान
रणनीतिक दृष्टि से यह सुविधा पूर्वोत्तर सीमांत क्षेत्र में भारतीय सशस्त्र बलों की ऑपरेशनल कैपेबिलिट को मजबूती देगी. युद्ध या प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों में यहां से सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, मिग-29, स्वदेशी तेजस जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों के साथ-साथ सी-130 हरक्यूलिस और एएन-32 जैसे परिवहन विमानों की लैंडिंग संभव होगी. यह पहल भारत की ‘डिस्पर्स्ड एयर ऑपरेशंस’ नीति के अनुरूप है, जिससे पारंपरिक हवाई अड्डों पर निर्भरता कम होगी और सुरक्षा जोखिमों में कमी आएगी. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और इज़राइल जैसे देशों में हाईवे एयरस्ट्रिप मॉडल पहले से मौजूद हैं. हालिया वैश्विक संघर्षों ने यह दिखाया है कि केंद्रीकृत एयरबेस दुश्मन हमलों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, जबकि वैकल्पिक रनवे सैन्य अभियानों की निरंतरता बनाए रखने में सहायक होते हैं. इसी रणनीतिक सोच के तहत असम अब उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों की कतार में शामिल हो गया है, जहां 2020 से ऐसे हाईवे रनवे सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं.
सिविल एविएशन के लिए भी अहम
नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में भी यह परियोजना अहम साबित होगी. कोहरे, चक्रवात या तकनीकी खराबी के कारण जब डिब्रूगढ़ या जोरहाट जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर संचालन प्रभावित होगा, तब यह रनवे एक सुरक्षित विकल्प प्रदान करेगा. इससे आपात चिकित्सा उड़ानों, राहत सामग्री की आपूर्ति और त्वरित बचाव अभियानों में तेजी आएगी. स्थानीय समुदाय इस परियोजना को आर्थिक विकास का उत्प्रेरक मान रहा है. इससे पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और सहायक उद्योगों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. भाजपा नेताओं ने इसे असम को राष्ट्रीय रक्षा आधुनिकीकरण के मानचित्र पर अग्रणी राज्य बनाने वाली पहल बताया है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें
Location :
New Delhi,Delhi
First Published :
January 26, 2026, 11:27 IST

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