UGC New Rule 2026: 24 घंटे में मीटिंग, 15 दिन में रिपोर्ट, 7 दिन में कार्रवाई...क्यों गुस्से में है सवर्ण समाज?

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Last Updated:January 28, 2026, 13:08 IST

UGC New Rule 2026, UGC Protest 2026: देश भर में यूजीसी के नए नियमों का विरोध हो रहा है. इन नियमों को लेकर सवर्ण समाज के युवा काफी गुस्‍से में हैं. यूजीसी मुख्‍यालय से लेकर देश के अलग अलग हिस्‍सों में प्रदर्शन हो रहे हैं. आइए समझते हैं कि नए नियमों में कैसे कैसे प्रावधान किए गए हैं? आखिर इन नियमों में ऐसा क्‍या है जिससे जनरल कैटेगरी के लोगों में नाराजगी है.

 24 घंटे में मीटिंग, 7 दिन में कार्रवाई...क्यों है गुस्‍सा?UGC Bill 2026 Controversy, UGC New Rule 2026, UGC Protest 2026: यूजीसी के नए नियमों का विरोध.

UGC New Rule 2026, UGC Protest 2026: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने एक नया नियम जारी किया है -Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026. ये नियम कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए बनाए गए हैं, लेकिन इनके आने के बाद से सवर्ण यानी जनरल कैटेगरी में भारी गुस्सा है. दिल्ली में UGC ऑफिस के बाहर प्रोटेस्ट हो रहे हैं.सोशल मीडिया पर #UGCRollback ट्रेंड कर रहा है और सुप्रीम कोर्ट में भी PIL दाखिल हो चुकी है. लोग कह रहे हैं कि ये नियम रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन को बढ़ावा दे रहे हैं. आइए समझते हैं नियम क्या हैं, क्यों लाए गए और विरोध क्यों हो रहा है?

नियम कब और क्यों आए?

UGC ने ये नियम 13 जनवरी 2026 को नोटिफाई किए जो तुरंत लागू हो गए.इन्‍हें पुराने 2012 के नियमों की जगह लागू किया गया.सुप्रीम कोर्ट ने रोहित वेमुला और पायल तड़वी (2019) जैसे मामलों में सख्ती दिखाई थी. इन दोनों मामलों में जातिगत भेदभाव के आरोप लगे थे और छात्रों ने सुसाइड कर लिया था.जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुराने नियम कमजोर हैं, इसलिए सख्त और बाइंडिंग नियम बनाएं. UGC के डेटा के मुताबिक 2019-20 से 2023-24 तक जातिगत भेदभाव के केस 173 से 378 तक हो गए.इसलिए ये नियम NEP 2020 के तहत इक्विटी बढ़ाने के लिए लाए गए.

मुख्य नियम क्या-क्या हैं?

ये नियम सभी UGC मान्यता वाले कॉलेज-यूनिवर्सिटी पर लागू हैं.
– हर इंस्टीट्यूशन में Equal Opportunity Centre (EOC)बनाना अनिवार्य होगा.ये कमेटी पिछड़े, वंचित छात्रों को पढ़ाई, फीस, हॉस्टल आदि में मदद देगी.
– Equity Committee (समता समिति)बनानी होगी.अध्यक्ष कॉलेज/यूनिवर्सिटी का हेड होगा. कमेटी में SC/ST, OBC, महिलाएं, दिव्यांग जरूर शामिल होंगे. कमेटी का कार्यकाल 2 साल होगा.
– Equity Squad भी बनेगा, जो कैंपस पर भेदभाव पर नजर रखेगा.
– भेदभाव की शिकायत आने पर 24 घंटे में मीटिंग होनी जरूरी है.
– 15 दिन में जांच रिपोर्ट हेड को देनी होगी.
– हेड को 7 दिन में कार्रवाई शुरू करनी होगी.
– EOC हर 6 महीने में रिपोर्ट देगा और कॉलेज को सालाना UGC को रिपोर्ट भेजनी होगी.
– UGC एक राष्ट्रीय निगरानी कमेटी बनाएगा.
– नियम न मानने पर कॉलेज या यूनिवर्सिटी का ग्रांट रोकने, नए डिग्री प्रोग्राम बंद करने या मान्यता रद्द के प्रावधान हैं. ये टाइमलाइन इसलिए सख्त है ताकि शिकायतें लटके नहीं और असल में एक्शन हो.

सवर्ण समाज क्यों हैं इतने गुस्से में?

यूजीसी के नए नियमों का विरोध करने वाले जनरल कैटेगरी के छात्रों और संगठनों का कहना है कि नियम एकतरफा हैं.
भेदभाव की डेफिनिशन सिर्फ SC/ST/OBC पर: नियम कहते हैं caste-based discrimination सिर्फ इन कैटेगरी के खिलाफ होगा. जनरल कैटेगरी अगर भेदभाव का शिकार हो जैसे एंटी-ब्राह्मण स्लोगन्स, ग्रैफिटी या हॉस्टेज जैसी घटनाएं हो तो कोई प्रोटेक्शन नहीं है यानी वो सिर्फ आरोपी बन सकते हैं पीड़ित नहीं.

फॉल्स/झूठी शिकायत पर कोई सजा नहीं: पहले ड्राफ्ट में था लेकिन फाइनल में हटा दिया गया. विरोध करने वालों को डर है कि इसका गलत इस्तेमाल होगा और पर्सनल दुश्मनी निभाने के लिए भी शिकायत कर दी जाएगी और 24 घंटे में मीटिंग होने से बिना सबूत के एक्शन हो सकता है.
कमेटी में जनरल का कोई प्रतिनिधित्व नहीं: Equity Committee में SC/ST/OBC/महिलाएं/दिव्यांग जरूरी है लेकिन जनरल कैटेगरी का कोई सदस्य अनिवार्य नहीं है. इससे फैसले एकतरफा होने का डर है.
कॉलेज पर डर का माहौल: ग्रांट/मान्यता रद्द होने का डर से कॉलेज मेरिट पर फैसला नहीं ले पाएंगे, बल्कि डर के मारे झुक जाएंगे.
UGC एक्ट 1956 से बाहर: यूजीसी के नए नियमों का विरोध करने वालों का कहना है कि UGC का काम सिर्फ अकादमिक स्टैंडर्ड्स है, जातिगत भेदभाव पर इतनी सख्ती नहीं बनती.प्रदर्शन करने वालों में सवर्ण सेना जैसे संगठन शामिल हैं जो कह रहे हैं कि ये रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन है और कैंपस को जाति की लड़ाई का मैदान बना देगा.

किसका क्‍या तर्क है?

नए नियमों के समर्थकों का कहना है कि कैंपस में SC/ST/OBC छात्रों के साथ भेदभाव असल समस्या है. पुराने नियम सिर्फ कागजी थे. अब OBC को शामिल करना बड़ा कदम है. फॉल्स कंप्लेंट पर सजा हटाई ताकि पीड़ित बिना डर के शिकायत करें. ये NEP 2020 के तहत इक्विटी लाने का हिस्सा है.
इधर विरोधियों का कहना कि ये नियम जनरल कैटेगरी को संभावित अपराधी बना देते हैं. आर्टिकल 14 (समानता) का उल्लंघन है.फॉल्स केस बढ़ेंगे.कैंपस में डर और डिवीजन आएगा.

अब सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल की गई है.यूजीसी के नए नियमों को लेकर वकील विनीत जिंदल और मृत्युंजय तिवारी ने याचिका दाखिल की है जिसमें कहा गया है कि रेगुलेशन 3(c)non-inclusionary है और जनरल कैटेगरी को प्रोटेक्शन नहीं देता. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा.कानून का दुरुपयोग नहीं होने देंगे. सब संविधान के दायरे में है. इधर यूजीसी के नियमों के विरोध में तमाम युवाओं प्रदर्शन जारी है. दिल्ली UGC हेडक्वार्टर पर भी कुछ प्रदर्शनकारी पहुंचे थे. मामला अभी गरम है. UGC का कहना है कि ये नियम सिर्फ भेदभाव रोकने के लिए हैं.मिसयूज नहीं होगा, लेकिन विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है.आगे क्या होता है, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर निर्भर.

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Dhiraj Raiअसिस्टेंट एडिटर

न्यूज़18 हिंदी (Network 18) डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. न्‍यूज 18 में एजुकेशन, करियर, सक्‍सेस स्‍टोरी की खबरों पर. करीब 15 साल से अधिक मीडिया में सक्रिय. हिन्दुस्तान, दैनिक भास्कर के प्रिंट व ...और पढ़ें

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January 28, 2026, 13:08 IST

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