UGC New Rule 2026: आखिर यूजीसी के नियमों में किसने की छेड़छाड़, जिस पर देश भर में मच गया बवाल

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Last Updated:January 29, 2026, 16:13 IST

UGC Protest, UGC New Rule 2026: यूजीसी नियमों को लेकर सरकार की ओर से जो कमेटी बनाई गई थी उसके अध्‍यक्ष कांग्रेस नेता दिग्‍विजय सिंह थे.जब इन नियमों को लेकर विरोधी स्‍वर बुलंद हुए तो दिग्‍विजय सिंह इस मामले में पहले कह चुके हैं कि समिति ने कभी फर्जी शिकायत पर सजा हटाने की सिफारिश नहीं की थी. इसी बीच भाजपा के एक सांसद करण भूषण ने भी अपनी सफाई दी और लिखा कि संसदीय समिति का इन नियमों के निर्माण में कोई योगदान नहीं है जिसके बाद अब सवाल यह उठता है कि आखिर यूजीसी के नियमों में किसने छेड़छाड़ की,जिस पर देश भर में बवाल मच गया?

आखिर UGC के नियमों में किसने की छेड़छाड़, जिस पर देश भर में मच गया बवालUGC Act LIVE, Supreme Court, UGC Equity Regulations 2026, SC hearing on UGC regulations: यूजीसी के नियमों को लेकर विरोध.

UGC Protest, UGC New Rule 2026: यूजीसी नियमों के लिए बनी समिति के कई सदस्‍यों की सफाई आने के बाद अब सवाल यह उठ रहा है कि यूजीसी के नियमों में किसने की छेड़छाड़, जिस पर देश भर में बवाल मच गया? इन नियमों को लेकर छात्रों से लेकर राजनीतिक नेताओं तक UGC के नए इक्विटी रेगुलेशंस 2026 (Promotion of Equity in Higher Educational Institutions Regulations, 2026) को लेकर गुस्सा और भ्रम फैला हुआ है. ये नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए लाए गए, लेकिन अंतिम रूप में फर्जी शिकायतों पर सजा का प्रावधान हट जाने से विवाद भड़क उठा.
अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में त्वरित सुनवाई की और नियमों पर स्टे लगा दिया. कोर्ट ने कहा कि ये नियम अस्पष्ट (vague)हैं और दुरुपयोग की आशंका है. कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि 2012 के पुराने नियम लागू रहेंगे और मामले को आगे सुनवाई के लिए रखा गया. कोर्ट ने सुझाव दिया कि नियमों को फिर से ड्राफ्ट करने के लिए विशेषज्ञों की कमेटी बनाई जाए. अब गेंद शिक्षा मंत्रालय और UGC के पाले में है.

अंतिम नियमों में हटा दिया प्रावधान

दरअसल फरवरी 2025 में जारी ड्राफ्ट में फर्जी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर जुर्माना या अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान था जो पीड़ितों को डर से मुक्त करने के साथ-साथ दुरुपयोग रोकने के लिए बैलेंस बनाता था, लेकिन जनवरी 2026 में जारी अंतिम नियमों में यह प्रावधान पूरी तरह हटा दिया गया. साथ ही जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा को SC, ST और OBC तक सीमित कर दिया गया जिससे सामान्य वर्ग के छात्रों को सुरक्षा का अभाव महसूस हो रहा है. जिसकी वजह से कैंपसों में विरोध प्रदर्शन, सोशल मीडिया पर #RollbackUGC ट्रेंड, कई जगह BJP नेताओं के इस्तीफे और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गईं.

दिग्विजय सिंह ने क्‍या दी सफाई?

कांग्रेस सांसद और संसदीय स्थायी समिति शिक्षा के चेयरमैन दिग्विजय सिंह ने फेसबुक पर सफाई देते हुए कहा कि समिति ने कभी फर्जी शिकायत पर सजा हटाने की सिफारिश नहीं की थी. उन्होंने दावा किया कि समिति ने दो महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे-एक भेदभाव की परिभाषा में स्पष्ट उदाहरण और विस्तृत सूची शामिल करना. दूसरा इक्विटी कमेटियों में SC/ST/OBC की 50% से अधिक भागीदारी. UGC ने इन दोनों को अनदेखा कर दिया. दिग्विजय सिंह का कहना है कि फर्जी केस का डर UGC के फैसले से पैदा हुआ क्योंकि अगर परिभाषा स्पष्ट होती तो भ्रम नहीं फैलता. उन्होंने UGC और शिक्षा मंत्रालय पर जिम्मेदारी डाली कि वे स्थिति स्पष्ट करें.

करण भूषण ने कहा काई योगदान नहीं

भाजपा के सांसद करण भूषण ने भी स्पष्ट किया कि समिति की बैठक में वे उपस्थित नहीं थे, न हस्ताक्षर किए और ऐसा कोई कार्य नहीं हुआ जो समाज में विभाजन पैदा करे. करण भूषण सिंह ने एक्स पर लिखा कि संसदीय समिति का इन नियमों के निर्माण में कोई योगदान नहीं है और UGC को जनभावना का सम्मान कर सुधार करना चाहिए, ताकि जातिगत वैमनस्यता न फैले. उन्होंने कहा कि हम शिक्षण संस्थानों को जातिगत युद्ध का केंद्र नहीं बनने देंगे.

अब सवाल उठता है: छेड़छाड़ आखिर कहां हुई?

दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने सर्वसम्मति से रिपोर्ट दी जिसमें OBC को शामिल करने, दिव्यांगता को भेदभाव का आधार बनाने, इक्विटी कमेटी में 50% आरक्षण जैसी सिफारिशें थीं,लेकिन फर्जी शिकायत पर सजा का प्रावधान समिति ने नहीं हटाया.यह UGC ने अंतिम नियमों में खुद हटा दिया. समिति में कुल सदस्यों की संख्या करीब 30-31 थी जिसमें 21 सांसद लोकसभा से और 9-10 राज्यसभा से थे. इस कमेटी में BJP के लोकसभा और राज्‍यसभा के सबसे ज्यादा 16 सदस्‍य जैसे अभिजीत गंगोपाध्याय, रविशंकर प्रसाद, वसुंधरा राजे, अनुराग ठाकुर, अमित शाह, ओम बिरला, पीयूष गोयल, नितिन गडकरी आदि शामिल थे. विपक्षी सदस्यों में कांग्रेस के दिग्विजय सिंह सहित 4 सासंद, SP के 3 सांसद, TMC, CPM, AAP के सांसद शामिल थे.समिति की सिफारिशें सर्वसम्मति से आईं, लेकिन अंतिम नियम UGC/शिक्षा मंत्रालय के स्तर पर बदले गए जिससे विवाद बढ़ा.

यह विवाद सिर्फ नियमों का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय vs दुरुपयोग की आशंका का है. सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से उम्मीद है कि संतुलित समाधान निकलेगा लेकिन फिलहाल UGC और सरकार पर दबाव है कि वे स्पष्टता लाएं और छात्रों का भरोसा बहाल करें.

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Dhiraj Raiअसिस्टेंट एडिटर

न्यूज़18 हिंदी (Network 18) डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. न्‍यूज 18 में एजुकेशन, करियर, सक्‍सेस स्‍टोरी की खबरों पर. करीब 15 साल से अधिक मीडिया में सक्रिय. हिन्दुस्तान, दैनिक भास्कर के प्रिंट व ...और पढ़ें

First Published :

January 29, 2026, 16:13 IST

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