UGC New Rule: यूजीसी नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका, क्या दलील-क्या डिमांड? क्यों हो रहा विरोध

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Last Updated:January 27, 2026, 12:54 IST

UGC New Rule | UGC Protest | यूजीसी के नए नियमों को लेकर सड़क से सुप्रीम कोर्ट तक बवाल जारी है. यूजीसी यानी यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन के नए नियमों का खुलकर विरोध हो रहा है. अब सुप्रीम कोर्ट में भी इसके खिलाफ याचिका दायर हो चुकी है. याचिका में कहा गया है कि ये UGC एक्ट और उच्च शिक्षा में समान अवसर की भावना के खिलाफ है. विरोध करने वाले कहते हैं कि इससे भेदभाव कम नहीं, बल्कि ज्यादा हो सकता है.

UGC नियमों के खिलाफ SC में आई और याचिका, क्या दलील-क्या डिमांड? क्यों विरोधयूजीसी नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है.

UGC New Rule | UGC Protest | यूजीसी यानी यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन एक एक नियम से पूरे देश में बवाल है. यूजीसी के नए नियमों को लेकर सड़क से सुप्रीम कोर्ट त संग्राम है. एक ओर यूजीसी हेडक्वार्टर का घेराव हो रहा है, दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं लग रही हैं. देश के उच्च शिक्षा संस्थानों को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों का लगातार विरोध हो रहा है. इन नियमों को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई है. इसी सिलसिले में मंगलवार को एक और याचिका दाखिल की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि ये नियम सामान्य वर्ग के लिए भेदभावपूर्ण हैं.

वकील विनीत जिंदल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. उन्होंने कहा कि ये नियम सामान्य वर्ग के लिए भेदभावपूर्ण हैं और उनके मौलिक अधिकारों का हनन करने वाले हैं. याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि यूजीसी रेगुलेशंस-2026 के प्रावधान 3(सी) को लागू करने पर रोक लगाई जाए। इसके अलावा, 2026 के नियमों के अंतर्गत बनाई गई व्यवस्था सभी जाति के व्यक्तियों के लिए लागू हो. वहीं, यूजीसी का कहना है कि ये नियम यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए हैं.

इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट में सामान्य वर्ग के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए नियम 3(सी) को चुनौती दी गई. एक जनहित याचिका (पीआईएल) में यूजीसी के नए नियम के नियम 3(सी) को मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताते हुए रद्द करने की मांग की गई. बता दें कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 13 जनवरी को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन 2026’ लागू किया. इसके तहत कई संस्थानों को इक्विटी कमेटी बनाने और भेदभाव विरोधी नीति लागू करने के निर्देश दिए गए. इसके बाद सवर्ण समुदाय नाराज है.

याचिका में क्या दलील?
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि यह प्रावधान उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नाम पर कुछ वर्गों (खासकर सामान्य वर्ग) के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देता है और इससे कुछ समूहों को शिक्षा से बाहर किया जा सकता है. याचिका में कहा गया कि नियम 3(सी) संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है. साथ ही, यह यूजीसी अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के विपरीत है और उच्च शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने के मूल उद्देश्य को नुकसान पहुंचाता है.

यूजीसी के नियम का क्या मकसद?
यूजीसी के मुताबिक, यूजीसी के नए नियमों का उद्देश्य कैंपस पर जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान, विकलांगता आदि के आधार पर होने वाले भेदभाव को पूरी तरह समाप्त करना है. इन नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षा संस्थानों (विश्वविद्यालयों और कॉलेजों) में इक्विटी कमेटी गठित करने का प्रावधान है, जो शिकायतों की जांच करेगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई (जैसे डिग्री रोकना, संस्थान की मान्यता रद्द करना आदि) कर सकेगी. यूजीसी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच साल में विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव की शिकायतें 118 प्रतिशत बढ़ी हैं. ये नियम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तैयार किए गए थे, जहां एक पुरानी याचिका में कैंपस पर भेदभाव रोकने के लिए मजबूत तंत्र की मांग की गई थी.

विरोध करने वालों का क्या तर्क?
यूजीसी के नए नियमों को सवर्ण यानी जनरल कैटेगरी के खिलाफ बताया जा रहा है. जनरल कैटेगरी के छात्र नए नियमों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. उनके आरोप हैं कि यूजीसी के ये नए नियम सवर्णों के खिलाफ हैं. यूजीसी के नियमों में सिर्फ SC, ST और OBC के खिलाफ भेदभाव की बात है. जनरल कैटेगरी के छात्रों को भेदभाव का शिकार माना ही नहीं गया है, जिसको लेकर विरोध हो रहा है. सवर्ण समाज के लोगों का कहना है कि इन नियमों का फायदा उठाकर कोई भी एससी-एसटी और ओबीसी छात्र सवर्णों को फंसाने के लिए झूठी शिकायत कर सकता है.

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Shankar Pandit

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January 27, 2026, 12:54 IST

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