संसद में हंगामे के बीच सभापति ने सदन की कार्यवाही के दौरान सभी सदस्यों को कड़ी नसीहत दी. उन्होंने कहा कि यह सदन देश के लोकतंत्र का उच्च सदन है और यहां की गरिमा और परंपराओं को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है.अध्यक्ष ने कहा कि सभी दलों के सदस्य कभी न कभी सत्ता में रहे हैं और शासन का अनुभव रखते हैं. इसके बावजूद अगर सदन की मर्यादाएं तोड़ी जाती हैं, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि विरोध करना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन विरोध का भी एक तरीका और मर्यादा होती है.उन्होंने सवाल उठाया कि सदन में इधर-उधर जाकर नारेबाजी करना, आसन के पास खड़े होना या बैनर लेकर आना क्या उचित है? अध्यक्ष ने कहा कि पहले भी सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद रहे हैं, विरोध हुए हैं, लेकिन सदन की मर्यादाएं कभी नहीं तोड़ी गईं.
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