Viral Post: ना IIT, ना NIT, भोपाल के टियर 3 कॉलेज से किया बीटेक, गूगल में नौकरी के बाद बताया फॉर्मूला

2 hours ago

Last Updated:January 29, 2026, 12:12 IST

Viral Post, Google Job: गूगल में नौकरी मिलना आसान नहीं है. अक्सर माना जाता है कि गूगल में नौकरी के लिए आईआईटी, एनआईटी जैसे बड़े संस्थानों की डिग्री होना जरूरी है. लेकिन आर्ची गुप्ता ने साबित कर दिया कि गूगल में नौकरी के लिए संस्थान का नाम मायने नहीं रखता है.

ना IIT, ना NIT, टियर 3 कॉलेज से किया बीटेक, गूगल में नौकरी का बताया सीक्रेटGoogle Success Story: गूगल में नौकरी से कई बार रिजेक्ट होने पर भी आर्ची ने हार नहीं मानी

नई दिल्ली (Viral Post, Google Job). आर्ची गुप्ता की कहानी उन करोड़ों युवाओं के लिए किसी फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी है, जो छोटे शहरों की तंग गलियों और ‘टियर-3’ कॉलेजों के साधारण क्लासरूम में बैठकर गूगल-माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों के सपने देखते हैं. अक्सर समाज यकीन दिला देता है कि अगर आपके पास IIT या NIT का ‘गोल्डन टैग’ नहीं है तो बड़ी कंपनियों के दरवाजे आपके लिए बंद हैं. लेकिन आर्ची ने न केवल इस दीवार को गिराया, बल्कि उस पर अपनी सफलता का झंडा भी गाड़ दिया.

आर्ची गुप्ता की गूगल सक्सेस स्टोरी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. उन्होंने एक ऐसे कॉलेज से बीटेक किया, जहां बड़ी कंपनियों के नाम तक नहीं सुनाई देते थे. आर्ची ने साबित कर दिया कि गूगल का रास्ता किसी ‘शॉर्टकट’ से नहीं, बल्कि कोडिंग की रातों और रिजेक्शन के दर्द से होकर गुजरता है. यह कहानी उन सबके लिए जोरदार जवाब है जो संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं. अगर आपको कोडिंग का जादू आता है और दिमाग में कुछ कर गुजरने की जिद है तो कुछ भी आपकी उड़ान को सीमित नहीं कर सकता.

आर्ची गुप्ता ने कैसे भेद दिया Google का चक्रव्यूह?

आर्ची गुप्ता की ‘सक्सेस स्टोरी’ किसी चमत्कार का परिणाम नहीं है, बल्कि सालों की तपस्या और सही रणनीति की जीत है.

जब कैंपस में नहीं आई कोई कंपनी, तब खुद बनीं ब्रांड

टियर-3 कॉलेज के स्टूडेंट्स का सबसे बड़ा डर ‘प्लेसमेंट’ होता है. आर्ची के कॉलेज में भी नामी कंपनियां नहीं आती थीं. उन्होंने हार मानकर बैठने के बजाय ‘ऑफ-कैंपस’ की कठिन डगर चुनी. उन्हें पता था कि यहां हजारों छात्रों से मुकाबला है, इसलिए उन्होंने खुद को एक ऐसे ‘ब्रांड’ के रूप में तैयार किया जिसे गूगल नजरअंदाज न कर सके.

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किस्मत के भरोसे नहीं, कोडिंग के दम पर मिली जीत

आर्ची ने अपनी सफलता का जो सीक्रेट शेयर किया है, वह काफी सरल लेकिन असरदार है:

डेटा स्ट्रक्चर्स का ‘डोज’: उन्होंने एल्गोरिदम और डेटा स्ट्रक्चर्स (DSA) को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया. रिजेक्शन को बनाया सीढ़ी: उन्हें एक-दो नहीं, कई बार ‘No’ सुनना पड़ा, लेकिन उन्होंने हर ‘No’ से अपनी कमियां सीखीं. निरंतरता (Consistency): आर्ची का मानना है कि आप एक दिन में गूगल के लिए तैयार नहीं होते, आपको हर रोज खुद को थोड़ा बेहतर बनाना होता है.

संघर्ष की गवाह हैं आर्ची की तस्वीरें

आर्ची ने अपने पोस्ट में करियर के अलग-अलग पड़ावों की फोटो शेयर की हैं. इनमें एक साधारण कोडिंग डेस्क से लेकर गूगल के शानदार ऑफिस तक का सफर साफ दिखता है. वे कहती हैं- कोई शॉर्टकट नहीं था, कोई किस्मत का खेल नहीं था; बस मेरी मेहनत थी जो रंग लाई. दुनियाभर की टेक कंपनियां अब ‘स्किल-फर्स्ट’ अप्रोच अपना रही हैं. अगर आप कोडिंग की दुनिया की पेचीदगियों को सुलझा सकते हैं तो गूगल खुद आपका स्वागत करेगा.

About the Author

Deepali Porwal

With more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academic sys...और पढ़ें

First Published :

January 29, 2026, 12:12 IST

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ना IIT, ना NIT, टियर 3 कॉलेज से किया बीटेक, गूगल में नौकरी का बताया सीक्रेट

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