Last Updated:February 03, 2026, 13:35 IST
Supreme Court CJI Justice Sutuakant on Whatsapp-Meta News: सोशल मीडिया ऐप WhatsApp-Meta डेटा शेयरिंग मामले में आज यानी मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान दलीलें सुनने के बाद सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि व्हाट्सऐप को नागरिकों की निजता से खिलवाड़ नहीं करने देंगे.
WhatsApp–Meta डेटा शेयरिंग से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को कड़ी बहस देखने को मिली.Supreme Court CJI Suryakant on Whatsapp: सुप्रीम कोर्ट में व्हाट्सऐप को कड़ी फटकार लगाई है. मेटा के मालिक मार्क जुकरबर्ग के वकील पर सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत जमकर बरसे और कहा कि अगर व्हाट्सऐप एक भी बात इधर-उधर गई तो उसे नहीं छोड़ा जाएगा. सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने अमेरिकी कंपनी व्हाट्सऐप-मेटा से कहा कि आप हमारे देश की प्राइवेसी के साथ खेल नहीं सकते. हम आपको हमारे डेटा का सिंगल डिजिट भी इधर-उधर करने की अनुमति नहीं देंगे. सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से तुषार मेहता तो व्हाट्सऐप-मेटा की ओर से मुकुर रोहतगी पेश हुए थे. चलिए जानते हैं सुप्रीम कोर्ट में आज यानी मंगलवार को क्या-क्या हुआ?
मामले की सुनवाई के दौरान व्हाट्सऐप-फेसबुक-मेटा की ओर से पेश वकील मुकुर रोहतगी ने दलील दी कि सीसीआई की ओर से लगाया गया जुर्माना पूरा जमा कर दिया गया है, हालांकि यह अपील के अधीन है. उन्होंने यह भी कहा कि CCI ने 25 जनवरी के आदेश को चुनौती नहीं दी है.’
सीजेआई ने व्हाट्सऐप को हड़काया
इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, ‘ हम आपको एक भी जानकारी साझा करने की अनुमति नहीं देंगे. आप इस देश के नागरिकों के अधिकारों से नहीं खेल सकते. यह संदेश आपके व्हाट्सएप पर भी साफ़ तौर पर जाना चाहिए.’ अहम निर्देश देते हुए CJI ने निर्देश दिया कि सभी अपीलों को तीन-जजों की पीठ के समक्ष अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए. प्रतिवाद (काउंटर) चार सप्ताह के भीतर दाखिल किया जाए.
दरअसल, CCI द्वारा Meta पर लगाया गया जुर्माना जमा किया जा चुका है, लेकिन अगले आदेश तक उस राशि की निकासी पर रोक रहेगी.
डेटा प्राइवेसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा, “क्या यह कोई विकल्प है कि आप व्हाट्सएप सेवा से बाहर निकल जाएं और फिर भी हम आपका डेटा साझा करें? विकल्प बहुत सरल है- या तो आप एक अंडरटेकिंग दें. हम एक शब्द भी डेटा साझा करने की अनुमति नहीं देंगे. आप नागरिकों के निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकते.’
सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या हुआ
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मेटा के वकील मुकुर रोहतगी ने दलील देते हुए कहा, उपभोक्ताओं के पास ऑप्ट-आउट का विकल्प मौजूद है और अदालत जिन निर्देशों की बात कर रही है, वे 15 नवंबर के आदेश से जुड़े हुए हैं. मामले की अगली सुनवाई अब तीन-सदस्यीय पीठ के समक्ष होगी, जहां डेटा गोपनीयता और टेक कंपनियों की जिम्मेदारी पर बड़ा फैसला आने की संभावना है. इस मामले में अब अगले सोमवार 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी.
प्राइवेसी पॉलिसी पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी:
मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले की सुनवाई के दौरान WhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बहुत चालाकी से इस तरह तैयार की गई है कि आम यूज़र भ्रमित हो जाए. आपकी प्राइवेसी पॉलिसी इस तरह बनाई गई है कि कोई गरीब बुज़ुर्ग महिला, जो सड़क पर सब्ज़ी बेचती हो,या जो केवल तमिल समझती हो,या जो ग्रामीण क्षेत्र से आती हो- वह आपकी मंशा को आखिर कैसे समझ पाएगी?’
सूचित सहमति (Informed Consent) पर ज़ोर
सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा कि नागरिकों की निजता और सूचित सहमति से किसी भी तरह का समझौता अस्वीकार्य है. कोर्ट ने यह भी साफ किया कि तकनीकी कंपनियां यूज़र्स की अज्ञानता या भाषा की बाधाओं का फायदा नहीं उठा सकतीं. अदालत की यह टिप्पणी डेटा प्राइवेसी, डिजिटल अधिकारों और विदेशी टेक कंपनियों की जवाबदेही के लिहाज़ से बेहद अहम मानी जा रही है.
WhatsApp–Meta पर CJI सूर्यकांत का कड़ा संदेश:
भारतीय नागरिकों की निजता से कोई समझौता नहीं होगा. WhatsApp और Meta से जुड़े डेटा शेयरिंग मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए साफ शब्दों में कहा कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. डेटा शेयरिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी. भारतीय नागरिकों के अधिकारों का हनन स्वीकार्य नहीं है. यदि कोई कंपनी भारत के संविधान का पालन नहीं कर सकती, तो उसके पास भारत छोड़ने का विकल्प खुला है.सीजेआई की बेंच में कौन-कौन शामिल?
सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत जस्टिस जॉयमाला बागची जस्टिस विपुल एम पंचोलीकिसकी ओर से कौन पेश हुआ?
सरकार की तरफ से – तुषार मेहता व्हाट्सऐप की तरफ से- मुकुल रोहतगी सीसीजाई की तरफ से- समर बंसलAbout the Author
Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho...और पढ़ें
First Published :
February 03, 2026, 13:34 IST

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