Last Updated:January 25, 2026, 15:43 IST
Anke Gauda Padma Awardee: अंके गौड़ा ने बस की कंडक्टरी, फिर मास्टर्स की डिग्री पूरी की. साथ ही उन्होंने किताबों के लिए अपनी सारी प्रॉप्रर्टी बेंच डाली. उन्होंने 20 लाख किताबों की लाइब्रेरी खड़ी कर दी. कर्नाटक के रहने वाले गौड़ा ने गांव में खड़ा किया 'ज्ञान का मंदिर'. उनके लाइब्रेरी में सुप्रीम कोर्ट के जज भी आते है.
20 लाख किताबों की फ्री-लाइब्रेरी चलाने वाले अंके गौड़ा को केंद्र सरकार ने दिया पद्म सम्मान. (फाइल फोटो)20 Lakh Book Library : कर्नाटक के मांड्या जिले के एक छोटे से गांव हरलहल्ली (Haralahalli) में आज देश-दुनिया के शोधकर्ता, छात्र और लेखक खींचे चले आ रहे हैं. इस छोटे से गांव को ‘ज्ञान की राजधानी’ बनाने का श्रेय जाता है 75 वर्षीय अंके गौड़ा (Anke Gowda) को, जिन्होंने अकेले दम पर लगभग 20 लाख (2 मिलियन) किताबों का एक विशाल निजी पुस्तकालय खड़ा कर दिया है. उनकी इस निस्वार्थ सेवा और साहित्य के प्रति अटूट प्रेम को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री सम्मान से नवाजा है.
अंके गौड़ा का यह सफर बेहद प्रेरणादायक है. किताबों को इकट्ठा करने का उनका जुनून तब शुरू हुआ जब वे महज 20 साल के थे और एक बस कंडक्टर के रूप में काम करते थे. किताबों के प्रति उनकी भूख इतनी बढ़ी कि उन्होंने बाद में कन्नड़ साहित्य में मास्टर डिग्री (MA) हासिल की. इसके बाद उन्होंने करीब तीन दशकों तक एक शुगर फैक्ट्री में काम किया, लेकिन उनकी आय का सबसे बड़ा हिस्सा हमेशा किताबों की खरीदारी में ही खर्च हुआ.
पुस्तकों के लिए बेच दी अपनी संपत्ति
किताबों के प्रति उनका समर्पण इतना गहरा था कि अपने संग्रह को विस्तार देने के लिए उन्होंने मैसूर में स्थित अपनी निजी संपत्ति तक बेच दी. इस कठिन लेकिन गौरवशाली यात्रा में उनकी पत्नी विजयलक्ष्मी और बेटे सागर ने उनका पूरा साथ दिया. आज उनकी इस लाइब्रेरी में करीब 5 लाख दुर्लभ विदेशी किताबें और विभिन्न भाषाओं के 5,000 शब्दकोश (डिक्शनरी) मौजूद हैं, जो इसे दुनिया के सबसे मूल्यवान निजी संग्रहों में से एक बनाते हैं.
सुप्रीम कोर्ट के जज भी आते हैं यहां
अंके गौड़ा की यह लाइब्रेरी केवल छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े विद्वानों के लिए भी शोध का केंद्र बन गई है. वे बताते हैं कि उनके यहाँ न केवल सिविल सेवा (UPSC) के उम्मीदवार आते हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के जज भी संदर्भ (Reference) के लिए किताबों की तलाश में यहाँ पहुंचते हैं.
बिना इंट्री फीस वाला लाइब्रेरी
इस पुस्तकालय की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां ज्ञान प्राप्त करने के लिए कोई सदस्यता शुल्क या प्रवेश शुल्क नहीं देना पड़ता. अंके गौड़ा का कहना है, ‘कोई भी यहां आ सकता है, पढ़ सकता है और ज्ञान अर्जित कर सकता है. मेरा मकसद सिर्फ लोगों तक शिक्षा पहुंचाना है.
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दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व...और पढ़ें
First Published :
January 25, 2026, 15:43 IST

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