अनंत अंबानी की 180 किलोमीटर की पदयात्रा: आस्था, भक्ति और दृढ़ता का प्रतीक

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Last Updated:April 05, 2025, 07:46 IST

Anant Ambani News: अनंत अंबानी ने जामनगर से द्वारका तक 180 किलोमीटर की पदयात्रा शुरू की है. कुशिंग सिंड्रोम और अस्थमा जैसी बीमारियों के बावजूद, यह यात्रा उनकी भक्ति और दृढ़ता का प्रतीक है.

 आस्था, भक्ति और दृढ़ता का प्रतीक

अनंत अंबानी द्वारका की एक आध्यात्मिक पैदल यात्रा पर जा रहे हैं.

हाइलाइट्स

अनंत अंबानी ने जामनगर से द्वारका तक 180 किलोमीटर की पदयात्रा शुरू की.कुशिंग सिंड्रोम और अस्थमा के बावजूद, यह यात्रा उनकी भक्ति का प्रतीक है.अनंत रोजाना करीब 20 किलोमीटर पैदल चल रहे हैं.

अनंत अंबानी ने एक आध्यात्मिक यात्रा शुरू की है. जामनगर से द्वारका के पवित्र द्वारकाधीश मंदिर तक 180 किलोमीटर की पदयात्रा. वह रोजाना करीब 20 किलोमीटर पैदल चल रहे हैं. और 6 से 7 घंटे पैदल यात्रा कर रहे हैं. उम्मीद है कि अनंत अंबानी अपने 30वें जन्मदिन से एक दिन पहले 8 अप्रैल तक पावन शहर द्वारकीधीश पहुंच सकते हैं.

यह कोई सेरेमोनियल मार्च यानी दिखावे वाली यात्रा नहीं है. यह तो बस शुद्ध भक्ति है. शरीर, मन और आत्मा को भगवान कृष्ण को समर्पित कर देना. हर कदम के साथ भारत के सबसे अमीर परिवार के वंशज अनंत अंबानी द्वारकाधीश की कृपा और सनातन धर्म के आदर्शों में खुद को लीन कर देते हैं. उनका ये चलना किसी को दिखाने के लिए नहीं है. ये तो शांति, एकांत और तपस्या में ईश्वर को खोजने का एक तरीका है.

इस यात्रा को और भी असाधारण बनाता है अनंत का जज्बा. वह कुशिंग सिंड्रोम (एक दुर्लभ हार्मोनल बीमारी) और मोटापे से जूझते हुए ये यात्रा कर रहे हैं. इतना ही नहीं, उन्हें बचपन से ही अस्थमा और फेफड़ों की गंभीर बीमारी भी है. उनकी ये पदयात्रा किसी को भी हिला कर रख दे, लेकिन अनंत के लिए ये यात्रा ताकत दिखाने के लिए नहीं है. उनके लिए ये आस्था को डर से ऊपर रखने, तकलीफ से बढ़कर भक्ति और आराम से बढ़कर अनुशासन का प्रतीक है.

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बागेश्वर धाम के मुख्य पुजारी धीरेंद्र शास्त्री के साथ अनंत अंबानी.

इस यात्रा के दौरान उन्हें स्थानीय लोगों का भरपूर प्यार और गर्मजोशी मिली है. कुछ लोग उनके साथ यात्रा में कुछ दूर तक शामिल हो गए तो कुछ ने प्रार्थनाएं कीं, आशीर्वाद दिया या द्वारकाधीश की यादगार चीजें भेंट कीं. कुछ लोग तो अपने घोड़ों के साथ भी आए ताकि इस प्रसिद्ध पदयात्रा के साथ अपनी तस्वीर खिंचवा सकें. दो सम्मानित धार्मिक हस्तियों ने भी अपनी उपस्थिति से उनका हौसला बढ़ाया. इनमें शामिल हैं बागेश्वर धाम के मुख्य पुजारी धीरेंद्र शास्त्री, जो अपने लोकप्रिय प्रवचनों और पूरे भारत के युवाओं तक अपनी पहुंच के लिए जाने जाते हैं, और दूसरे हैं वैष्णवाचार्य और पुष्टिमार्ग परंपरा से जुड़े पूजनीय आध्यात्मिक गुरु रसराज महाराज.

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पूरी यात्रा में अनंत धार्मिक मंत्रों में मग्न रहते हैं. हनुमान चालीसा, रामायण का सुंदरकांड और देवी स्तोत्र गुनगुनाते रहते हैं. इतनी कम उम्र में इस स्तर की धार्मिक और आध्यात्मिक परिपक्वता एक दुर्लभ उपहार है.

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी के छोटे बेटे अनंत धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से बहुत प्रेरित हैं और ये पदयात्रा उनकी शख्सियत को दर्शाती है. वो अक्सर भारत के पवित्र मंदिरों में जाते रहते हैं और एक उदार दानवीर भी हैं. उन्होंने कोलकाता के कालीघाट मंदिर, नाथद्वारा के श्रीनाथजी मंदिर और असम के कामाख्या मंदिर के जीर्णोद्धार और रखरखाव में योगदान दिया है. फरवरी में संपन्न हुए महाकुंभ के दौरान कई अखाड़ों को उनकी उदारता का लाभ मिला. वो पवित्र बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम के ट्रस्टी भी हैं.

यह पदयात्रा अकेले ही तय करने का सफर है, जिसमें अनंत के साथ बस कुछ खास सहयोगी और आध्यात्मिक गुरु ही हैं. रेत के हर कण में, खुले आसमान तले ली हर सांस में, अनंत एक ऐसी सच्चाई जी रहे हैं जिसे अपनाने की हिम्मत कम ही लोग करते हैं. असली ताकत अक्सर शांति से चलती है.

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आज की दुनिया में जहां शोर ही शोर है, ध्यान भटकाने वाली चीजें बेहिसाब हैं, और संस्‍कार बदलते रहते हैं, ऐसे में अनंत अंबानी का द्वारका तक पैदल चलकर जाना स्‍पष्‍टता, साहस और दृढ़ विश्वास का एक नायाब उदाहरण है. आज की पीढ़ी दिखावे की दुनिया में गहराई और अव्यवस्था में अर्थ खोज रही है. ऐसे में अनंत की पदयात्रा लोगों के लिए एक अहम संदेश लेकर आई है. ये यात्रा हमें याद दिलाती है कि आस्था कभी पुरानी नहीं होती और दृढ़ता दिखाने के लिए हमेशा शोर मचाने की जरूरत नहीं होती.

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अनंत की यह पैदल यात्रा कोई रस्म नहीं है. यह खुद के प्रति जिम्मेदारी है. हर दिन उठने और एक कठिन रास्ता चुनने की जिम्मेदारी. तारीफ के लिए नहीं, शांति के लिए. दुनिया को प्रभावित करने के लिए नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए. उनकी यात्रा दिखाती है कि वे शुक्रिया कहने के लिए दर्द से गुजरेंगे, अपनी आस्था दिखाने के लिए तकलीफ सहेंगे, और ईश्वर के सामने झुकेंगे इसलिए नहीं कि वे कमजोर हैं, बल्कि इसलिए क्योंकि वे घमंड से बढ़कर समर्पण को चुनते हैं.

इस पवित्र और निजी यात्रा से अनंत अंबानी ने एक पीढ़ी को संदेश दिया है. वो इस बात का उदाहरण हैं कि भक्ति ही जीवन के पथ पर मार्गदर्शक होती है और आस्था ही लोगों को जीवन के सारे अवरोधों को पार कराते हुए आगे ले जाती है.

Location :

Delhi,Delhi,Delhi

First Published :

April 05, 2025, 07:46 IST

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अनंत अंबानी की 180 किलोमीटर की पदयात्रा: आस्था, भक्ति और दृढ़ता का प्रतीक

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