'अपने खिलाफ जंग को फंड कर रहा है यूरोप...', India-EU ट्रेड डील से चिढ़ा अमेरिका, क्यों कहा- रूस को हो रहा है फायदा

1 hour ago

India EU Relationship: पिछले कई सालों से रूस और यूक्रेन के बीच जंग छिड़ी है. इस जंग को खत्म करने का लगातार प्रयास भी किया जा रहा है, हालांकि दोनों देश एक दूसरे पर हमले कर रहे हैं. इसी बीच US ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने यूरोप पर आरोप लगाया है कि देश ऐसे ट्रेड डील कर रहा है जिससे इनडायरेक्टली मॉस्को को फायदा हो रहा है. 

जंग के खिलाफ कर रहा फंड
बेसेंट ने कहा कि यूरोप के देश भारत से रिफाइंड फ्यूल प्रोडक्ट्स इंपोर्ट कर रहे हैं जो सैंक्टेड रशियन क्रूड ऑयल का इस्तेमाल करके बनाए जाते हैं, जिससे रशियन तेल इनडायरेक्ट रास्तों से यूरोप के मार्केट में फिर से आ रहा है. उन्होंने इस तरीके को यूरोप का "अपने खिलाफ जंग को फंड करना" बताया. साथ ही साथ कहा कि कॉन्टिनेंट झगड़े का सबसे ज्यादा असर झेल रहा है, लेकिन इसने रूस पर इकोनॉमिक प्रेशर बढ़ाने के बजाय ट्रेड रिश्तों को प्राथमिकता देना जारी रखा है.

रूस को हो रही है मदद
बेसेंट ने कहा कि यह तरीका यूरोप की पॉलिसी में एक उलटी बात को सामने लाता है, उन्होंने कहा कि हालांकि यूरोप के नेता पब्लिकली यूक्रेन का सपोर्ट करते हैं, लेकिन चल रहे ट्रेड फ्लो मॉस्को पर फाइनेंशियल रुकावटों को कम कर रहे हैं. उन्होंने ये टिप्पणी भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच एक बड़े फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की घोषणा के बाद की है. जिसे सभी डील्स की मदर बताया गया है. यह बढ़ते ग्लोबल ट्रेड टेंशन और बदलते टैरिफ फ्रेमवर्क के बैकग्राउंड में हुआ है. 

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पीएम मोदी ने कही थी ये बात
इस ट्रेड डील का भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वागत करते हुए इसे साझा खुशहाली के लिए एक नया ब्लूप्रिंट कहा और कहा कि यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड पैक्ट है. ट्रेड एग्रीमेंट के साथ-साथ, भारत और EU ने एक स्ट्रेटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप और एक मोबिलिटी एग्रीमेंट को भी फाइनल किया, जिसमें PM मोदी ने कहा कि यह मजबूत पार्टनरशिप ग्लोबल लेवल पर पॉजिटिव रोल निभाएगी.

 भारत का 19वां ट्रेड एग्रीमेंट
यह फ्री ट्रेड पैक्ट लगभग दो दशक पहले शुरू हुई बातचीत को खत्म करता है और भारत का 19वां ट्रेड एग्रीमेंट है. इससे 27 देशों के EU ब्लॉक में भारतीय एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलने और कई घरेलू इंडस्ट्रीज़ में कॉम्पिटिशन को नया रूप मिलने की उम्मीद है. यह डेवलपमेंट ऐसे समय में हुआ है जब ग्लोबल कॉमर्स पर US के ऊंचे टैरिफ, कमजोर सप्लाई चेन और रूस-यूक्रेन युद्ध सहित चल रहे जियोपॉलिटिकल टेंशन का दबाव है. भारत पर अभी US के ऊंचे टैरिफ लग रहे हैं, जबकि यूरोपियन यूनियन पर भी अमेरिका की ऊंची ड्यूटी लगने की संभावना है. (ANI)

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