अफगानिस्तान युद्ध को लेकर NATO से भिड़ा US, इटली की PM मेलोनी ने निकाल दी ट्रंप की सारी हेकड़ी

4 weeks ago

Meloni's Response To Trump: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर कड़ी सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अफगानिस्तान में सैन्य अभियानों के दौरान नाटो के सहयोगी देशों ने अमेरिका का पूरा समर्थन नहीं किया. जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि इटली सरकार राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों से हैरान है, जिनमें कहा गया है कि नाटो सहयोगी अफगानिस्तान में अभियानों के दौरान पीछे रह गए थे. 

मेलोनी ने ट्रंप पर साधा निशाना 

मेलोनी ने कहा कि ऐसे दावे 11 सितंबर 2001 के आतंकवादी हमलों के बाद गठबंधन की ओर से दिखाई गई अभूतपूर्व एकजुटता को नजरअंदाज करते हैं. मेलोनी ने कहा कि 11 सितंबर 2001 के आतंकवादी हमलों के बाद नाटो ने अपने इतिहास में पहली और एकमात्र बार अनुच्छेद 5 को सक्रिय किया. यह अमेरिका के प्रति एकजुटता का एक असाधारण कार्य था. 

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मेलोनी ने इटली की तत्काल और निरंतर सैन्य प्रतिबद्धता की बात करते हुए कहा कि रोम ने हजारों सैनिक तैनात किए और नाटो के नेतृत्व वाले मिशन के सबसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक रीजनल कमांड वेस्ट का नेतृत्व संभाला. मेलोनी ने यह भी कहा कि लगभग बीस वर्षों की प्रतिबद्धता के दौरान हमारे राष्ट्र ने एक ऐसी कीमत चुकाई है जिस पर विवाद नहीं किया जा सकता. उन्होंने अफगान बलों के लिए युद्ध अभियानों, सुरक्षा मिशनों और प्रशिक्षण प्रयासों के दौरान मारे गए 53 इतालवी सैनिकों और 700 से अधिक घायल सैनिकों का हवाला दिया. 

अफगानिस्तान में नाटो देशों के योगदान को कम आंकना गलत

प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा कि अफगानिस्तान में नाटो देशों के योगदान को कम आंकने वाले बयान अस्वीकार्य हैं, खासकर अगर वे किसी सहयोगी राष्ट्र से आते हैं. रोम और वाशिंगटन के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों की बात करते हुए मेलोनी ने कहा कि दोस्ती के लिए सम्मान की जरूरत होती है, जो अटलांटिक गठबंधन के मूल में एकजुटता सुनिश्चित करने के लिए एक मौलिक शर्त है.

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22 जनवरी को दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में शामिल हुए डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू के दौरान नाटो सहयोगियों पर बयान दिया था. ट्रंप ने कहा था कि हमें उनकी कभी जरूरत नहीं पड़ी, हमने उनसे कभी कुछ नहीं मांगा. वे कहेंगे कि उन्होंने अफगानिस्तान में कुछ सैनिक भेजे, लेकिन वे थोड़ा पीछे और अग्रिम मोर्चों से कुछ दूर रहे. डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें इस बात को लेकर संदेह है कि अगर कभी मदद मांगी गई तो नाटो अमेरिका का साथ देगा या नहीं.

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