अमरावती से ठाणे तक सियासी भूचाल: नवनीत राणा से गठबंधन टूटा, वैचारिक विरोधी AIMIM आया साथ

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Last Updated:January 12, 2026, 18:55 IST

Maharashtra Nikay Chunav 2026: महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है. अमरावती में गठबंधन टूटना, सोलापुर में ऐन मौके पर दलबदल, अकोला में वैचारिक विरोधियों की नजदीकी और ठाणे में खुलेआम टकराव ये सभी घटनाएं बताती हैं कि महाराष्ट्र की नगर निकाय राजनीति अब राज्य और भविष्य की सत्ता की दिशा तय करने का मंच बन चुकी है. इन चुनावों के नतीजे आने वाले महीनों में राज्य की राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं.

 नवनीत राणा से गठबंधन टूटा, AIMIM आया साथनगर निकाय चुनाव में महाराष्ट्र की राजनीति उलट-पलट गई है. (फाइल फोटो)

मुंबई. महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनाव इस बार सिर्फ स्थानीय सत्ता की लड़ाई नहीं रह गए हैं, बल्कि इन्होंने राज्य की राजनीति की असल तस्वीर सामने रख दी है. अमरावती, सोलापुर, अकोला और ठाणे चारों जगहों पर अलग-अलग घटनाक्रम एक ही बात की ओर इशारा कर रहे हैं स्थानीय राजनीति में अब न दोस्त स्थायी हैं और न ही दुश्मनी… असल में निकाय चुनाव की राजनीति में सबसे ज्यादा असर बीजेपी पर पड़ता दिख रहा है.

अमरावती: भाजपा-राणा गठबंधन टूटा, फिर आमने-सामने पोटे बनाम राणा
अमरावती में भाजपा और युवा स्वाभिमान पार्टी के बीच गठबंधन टूटते ही सियासी तल्खी खुलकर सामने आ गई है. भाजपा नेता और पूर्व मंत्री प्रवीण पोटे ने रवि राणा और नवनीत राणा पर बिना नाम लिए तीखा हमला बोला. पोटे ने साफ कहा कि भाजपा को ‘चमचों’ की जरूरत नहीं है और राणा की राजनीतिक भूख कभी खत्म नहीं होती. गठबंधन के समय भाजपा द्वारा छोटी पार्टी को नौ सीटें देने का जिक्र कर पोटे ने संकेत दिया कि पार्टी ने उदारता दिखाई, लेकिन बदले में वफादारी नहीं मिली. इस बयान के बाद अमरावती में एक बार फिर राणा बनाम पोटे की पुरानी राजनीतिक लड़ाई तेज होने के आसार हैं.

सोलापुर: चुनाव से तीन दिन पहले एनसीपी उम्मीदवार बीजेपी में शामिल
सोलापुर में राजनीति ने सबसे तेज मोड़ लिया. मतदान से महज तीन दिन पहले एनसीपी (अजीत पवार गुट) के आधिकारिक उम्मीदवार तुषार जक्का भाजपा में शामिल हो गए. इससे वार्ड 9डी का मुकाबला, जो पहले त्रिकोणीय माना जा रहा था वो लगभग एकतरफा हो गया है. जक्का ने एनसीपी पर प्रचार में सहयोग न मिलने का आरोप लगाया, जबकि एनसीपी ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें ‘पैसों का लालच’ दिया गया. इस घटनाक्रम ने न सिर्फ स्थानीय समीकरण बदले, बल्कि एनसीपी कार्यकर्ताओं के बीच गहरा असंतोष भी पैदा कर दिया.

अकोला: वैचारिक विरोधी साथ-साथ, भाजपा-AIMIM की ‘मजबूरी की राजनीति’
अकोला के अकोट में भाजपा-AIMIM को लेकर पहले ही देशभर में चर्चा थी. अब नगर परिषद में स्वीकृत पार्षद पद के लिए AIMIM के पांच पार्षदों ने भाजपा उम्मीदवार का समर्थन कर दिया. भले ही दोनों दल खुलकर गठबंधन से इनकार कर रहे हों, लेकिन कांग्रेस ने इसे ‘छिपा हुआ गठजोड़’ करार दिया है. कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा और AIMIM चुनाव के बाद सत्ता संतुलन के लिए एक साथ आ जाते हैं. अकोट में यह घटनाक्रम इस बात का उदाहरण बन गया है कि स्थानीय राजनीति में वैचारिक दूरी अक्सर सत्ता की जरूरतों के आगे छोटी पड़ जाती है.

ठाणे: शिंदे बनाम भाजपा, सड़कों पर उतरी सियासत
ठाणे जिले की अंबरनाथ नगर परिषद में हालात सबसे ज्यादा विस्फोटक नजर आए. एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने अजीत पवार गुट के 4 पार्षदों के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा किया, जिससे भाजपा हाशिए पर चली गई. उप महापौर चुनाव के दौरान शिवसेना और भाजपा कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए. नारेबाजी, धक्का-मुक्की और ‘गद्दार’ जैसे शब्दों ने माहौल को गर्म कर दिया. व्हिप को लेकर विवाद, समय से पहले लगाए गए बैनर और ‘पिता, पिता ही रहेंगे’ जैसे सियासी संदेशों ने साफ कर दिया कि ठाणे में यह सिर्फ नगर परिषद की नहीं, बल्कि राज्य की बड़ी राजनीतिक लड़ाई का रिहर्सल है.

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Delhi,Delhi,Delhi

First Published :

January 12, 2026, 18:53 IST

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