अरब स्प्रिंग की परछाईं ईरान तक पहुंची! क्यों याद आ रहे हैं मिस्र, लीबिया, सीरिया और यमन?

17 hours ago

What Is Arab Spring: मध्य पूर्व देशों में एक बार फिर राजनीतिक उथल-पुथल के संकेत दिखाई देने लगे हैं. ईरान में बढ़ते जन आक्रोश, विरोध प्रदर्शनों और सत्ता के खिलाफ उठती आवाजों के बीच अरब स्प्रिंग की यादें फिर ताजा हो गई हैं. अब सवाल उठ रहा है कि क्या अरब स्प्रिंग जैसी स्थिति ईरान तक पहुंच रही है और क्यों लोग बार-बार मिस्र, लीबिया, सीरिया और यमन का उदाहरण देकर अरब स्प्रिंग की बात कर रहे हैं. आइए समझते है पूरा माजरा...

जानें क्या था अरब स्प्रिंग?

बता दें, अरब स्प्रिंग साल 2010–11 के दौरान मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में शुरू हुआ जन आंदोलन था. इसकी शुरुआत ट्यूनीशिया से हुई थी जब बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार और तानाशाही शासन से त्रस्त लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन शुरू किया था. देखते ही देखते यह आंदोलन मिस्र, लीबिया, सीरिया, यमन, बहरीन और अन्य देशों तक फैल गया था. इन आंदोलनों का मुख्य उद्देश्य लोकतांत्रिक सुधार, अभिव्यक्ति की आजादी, सामाजिक न्याय और तानाशाही शासन का अंत था. हालांकि, हर देश में इसके नतीजे अलग-अलग रहे थे.

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अगर मिस्र की बात करें तो मिस्र में अरब स्प्रिंग के कारण लंबे समय से सत्ता में रहे राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को पद छोड़ना पड़ा था. हालांकि बाद में राजनीतिक अस्थिरता और सैन्य हस्तक्षेप ने देश को फिर संकट में डाल दिया था. लीबिया में अरब स्प्रिंग ने गृहयुद्ध का रूप ले लिया था और तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी की हत्या के बाद भी देश स्थिर नहीं हो सका. सीरिया में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन एक भीषण गृहयुद्ध में बदल गए जिसमें लाखों लोग मारे गए और करोड़ों को अपना घर छोड़ना पड़ा. यमन में भी सत्ता परिवर्तन की मांग ने लंबे गृहयुद्ध और मानवीय संकट को जन्म दिया जो आज भी जारी है. इन देशों का अनुभव यह दिखाता है कि अरब स्प्रिंग ने जहां कुछ जगहों पर सत्ता परिवर्तन किया, वहीं कई देशों में इसके परिणाम विनाशकारी साबित हुए.

ईरान तक क्यों पहुंची अरब स्प्रिंग की परछाईं?

हाल के दिनों में ईरान में भी आर्थिक संकट, महंगाई, बेरोजगारी, प्रतिबंधों का असर और सामाजिक आजादी पर पाबंदियों के खिलाफ जनता का गुस्सा बढ़ा है. खासकर युवाओं और महिलाओं के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों ने सरकार के लिए चिंता बढ़ा दी है. विश्लेषकों का मानना है कि जिस तरह अरब स्प्रिंग के दौरान जनता ने सत्ता के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई थी ठीक उसी तरह की असंतोष की भावना ईरान में भी दिख रही है.

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सोशल मीडिया और वैश्विक संपर्क ने इस असंतोष को और तेज किया है. लेकिन इस बीच बता दें कि ईरान की राजनीतिक और धार्मिक व्यवस्था अरब देशों से अलग है. यहां सत्ता संरचना मजबूत सुरक्षा तंत्र और धार्मिक नेतृत्व के इर्द-गिर्द केंद्रित है. यही वजह है कि कई लोगों मानते हैं कि ईरान में अरब स्प्रिंग जैसी स्थिति दोहराना आसान नहीं है.

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