असम मिशन: ह‍िमंता को पटखनी देने के ल‍िए कांग्रेस ने प्र‍ियंका को सौंपी कमान

4 weeks ago

नई दिल्ली: असम की राजनीति में एक बार फिर वही पुराने रिश्ते और अधूरी लड़ाइयां सुर्खियों में हैं. 2026 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को सीधी चुनौती देने की तैयारी कर ली है. खास बात यह है कि जिस हिमंता ने कभी कांग्रेस के भीतर रहकर पार्टी को मजबूती दी थी, आज उन्हीं को घेरने की कमान कांग्रेस ने गांधी परिवार की सबसे सक्रिय नेता प्रियंका गांधी वाड्रा को सौंपी है. प्रियंका को असम की स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि यह चुनाव सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि साख और हिसाब बराबर करने का भी है.

हिमंता बिस्वा सरमा का कांग्रेस अतीत इस मुकाबले को और दिलचस्प बना देता है. वह कभी पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के सबसे भरोसेमंद मंत्री और कांग्रेस के मजबूत रणनीतिकार माने जाते थे. लेकिन 2015 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने के बाद हिमंता ने असम में पार्टी की जड़ें कमजोर कर दीं. अब कांग्रेस ने उसी जमीन पर प्रियंका गांधी को उतार दिया है, जो सीधे हिमंता की राजनीति, उनकी सरकार और उनके पुराने कांग्रेस कनेक्शन को निशाने पर लेंगी. यही वजह है कि 2026 का चुनाव अब ‘हिमंता बनाम प्रियंका’ की लड़ाई बनता दिख रहा है.

क्या है पूरा मामला?

ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) ने आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के तहत पांच राज्यों के लिए स्क्रीनिंग कमेटियों का गठन किया है. असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए बनने वाली स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्षता प्रियंका गांधी वाड्रा को सौंपी गई है. इस कमेटी में सप्तगिरी शंकर उलाका, इमरान मसूद और सिरिवेल्ला प्रसाद को सदस्य बनाया गया है.

यह स्क्रीनिंग कमेटी असम के सभी संभावित उम्मीदवारों के नामों की जांच कर उन्हें केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) को भेजेगी. पार्टी का दावा है कि इस प्रक्रिया से टिकट वितरण ज्यादा पारदर्शी और रणनीतिक होगा. कांग्रेस नेतृत्व साफ तौर पर असम को 2026 में एक बड़े सियासी लक्ष्य के रूप में देख रहा है.

प्रियंका गांधी की एंट्री से असम का चुनाव हाई-वोल्टेज हो गया है. (फाइल फोटो PTI)

क्यों प्रियंका गांधी को सौंपी गई असम की कमान?

कांग्रेस का मानना है कि असम में भाजपा और हिमंता बिस्वा सरमा की आक्रामक राजनीति का जवाब उसी स्तर पर देना जरूरी है. प्रियंका गांधी की पहचान एक ऐसी नेता के रूप में है, जो सीधे जनता, खासकर महिलाओं और युवाओं से संवाद बनाती हैं. असम के चाय बागान मजदूर, अल्पसंख्यक समुदाय और युवा मतदाता कांग्रेस के संभावित वोट बैंक माने जाते हैं, जहां प्रियंका की मौजूदगी असर दिखा सकती है.

इसके अलावा प्रियंका की तैनाती हिमंता के लिए व्यक्तिगत चुनौती भी है. हिमंता कांग्रेस छोड़ते वक्त राहुल और प्रियंका गांधी पर खुलकर हमलावर रहे हैं. अब कांग्रेस उसी प्रियंका को आगे कर यह संदेश देना चाहती है कि पार्टी हिमंता की राजनीति को उन्हीं की भाषा में जवाब देगी.

हिमंता बिस्वा सरमा का राजनीतिक सफर: कांग्रेस से भाजपा तक

हिमंता बिस्वा सरमा का राजनीतिक करियर कांग्रेस से ही शुरू हुआ था. 2001 से 2014 तक वह तरुण गोगोई सरकार में मंत्री रहे और स्वास्थ्य, शिक्षा, वित्त जैसे अहम विभाग संभाले. लंबे समय तक उन्हें असम कांग्रेस का भविष्य माना जाता था. लेकिन पार्टी नेतृत्व से मतभेद के चलते 2015 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी.

भाजपा में शामिल होने के बाद हिमंता ने तेजी से राजनीतिक ऊंचाइयां हासिल कीं. 2021 में वह असम के मुख्यमंत्री बने और भाजपा को राज्य में मजबूत किया. आज वह कांग्रेस के सबसे मुखर आलोचकों में गिने जाते हैं. यही वजह है कि कांग्रेस अब उन्हें उन्हीं की पुरानी जमीन पर घेरने की रणनीति बना रही है.

हिमंता बिस्वा सरमा का राजनीतिक करियर कांग्रेस से ही शुरू हुआ था. (फाइल फोटो PTI)

हिमंता बनाम प्रियंका: सियासी जंग कितनी कठिन?

प्रियंका गांधी की एंट्री से असम का चुनाव हाई-वोल्टेज हो गया है. कांग्रेस हिमंता सरकार को बाढ़ प्रबंधन, कथित भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) जैसे मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है. वहीं भाजपा इसे गांधी परिवार की “बाहरी दखल” बताकर पलटवार करेगी. अगर प्रियंका असम में लगातार रैलियां और संगठनात्मक बैठकें करती हैं, तो कांग्रेस के बिखरे कार्यकर्ता एकजुट हो सकते हैं. टिकट वितरण में पारदर्शिता और मजबूत चेहरों को आगे लाने से पार्टी को नई ऊर्जा मिल सकती है.

2026 चुनाव का बड़ा संदेश

प्रियंका गांधी को असम की स्क्रीनिंग कमेटी की कमान सौंपना सिर्फ संगठनात्मक फैसला नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संकेत है. कांग्रेस यह दिखाना चाहती है कि वह हिमंता बिस्वा सरमा को हल्के में नहीं ले रही. 2026 का चुनाव असम में सत्ता से ज्यादा प्रतिष्ठा की लड़ाई बनता जा रहा है. हिमंता बनाम प्रियंका की यह जंग तय करेगी कि असम में कांग्रेस दोबारा खुद को खड़ा कर पाएगी या भाजपा का दबदबा कायम रहेगा.

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