Last Updated:February 22, 2026, 09:48 IST
उत्तराखंड की होली काफी खास होती है इसमें होली के साथ कई अन्य पर्व भी मनाए जाति है. उत्तराखंड में होली 2026 की शुरुआत 24 फरवरी से होलाष्टक के साथ होगी. 27 फरवरी को रंगभरी एकादशी पर पहले भगवान को रंग चढ़ाया जाएगा. 3 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को मुख्य होली मनाई जाएगी. रंग डालने का शुभ समय सूर्योदय से सुबह 11:30 बजे तक रहेगा.

अल्मोड़ा: उत्तराखंड की होली पूरे देश में अपनी अलग पहचान रखती है. यहां होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह संगीत, भक्ति और परंपराओं का सुंदर संगम है. खासकर कुमाऊँ क्षेत्र में होली बहुत ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जाती है. यहाँ होली कई दिनों तक चलती है और हर दिन की अपनी अलग महत्ता होती है. गाँवों और शहरों में लोग मिलकर होली गीत गाते हैं, ढोलक बजाते हैं और आपसी प्रेम का संदेश देते हैं.
रंगभरी एकादशी से होली की शुरुआत
कुमाऊँ में होली की शुरुआत आमलकी या रंगभरी एकादशी से मानी जाती है. इस दिन सबसे पहले भगवान को रंग चढ़ाया जाता है. मंदिरों में भगवान के वस्त्रों पर अबीर-गुलाल लगाया जाता है. मान्यता है कि जब तक भगवान रंग स्वीकार नहीं करते, तब तक लोग होली नहीं खेलते. पहले भगवान के कपड़ों में रंग डाला जाता है, फिर वही रंग लगे वस्त्र धारण करके होली की शुरुआत की जाती है. यह परंपरा बहुत ही पवित्र और श्रद्धा से जुड़ी हुई है.
होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होगा
पंडित दामोदर जोशी के अनुसार वर्ष 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होगा. होलाष्टक के दिनों में मांगलिक कार्य नहीं किए जाते, लेकिन होली के गीत और तैयारियाँ पूरे जोश से चलती रहती हैं. आमलकी या रंगभरी एकादशी 27 फरवरी 2026 को है. इसी दिन सूर्योदय से सुबह 11 बजकर 30 मिनट तक भगवान के वस्त्रों में रंग डालने का शुभ समय रहेगा. इस समय को बहुत ही शुभ माना गया है.
3 मार्च 2026 को होलिका दहन
इसके बाद 3 मार्च 2026 को होलिका दहन किया जाएगा. होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. इस दिन लोग लकड़ी और उपलों से होलिका सजाते हैं और शाम को उसे जलाया जाता है। लोग अग्नि की परिक्रमा करते हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. बच्चे और बड़े सभी इस दिन बड़े उत्साह से शामिल होते हैं.
4 मार्च 2026 को मुख्य होली
4 मार्च 2026 को धुलेंडी यानी मुख्य होली मनाई जाएगी. इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं, गले मिलते हैं और मिठाई बांटते हैं. कुमाऊँ की होली में बैठकी होली और खड़ी होली की खास परंपरा होती है. बैठकी होली में लोग बैठकर शास्त्रीय रागों में होली गीत गाते हैं, जबकि खड़ी होली में लोग खड़े होकर गोल घेरा बनाकर नाचते-गाते हैं.
यहाँ की होली शालीनता, संस्कृति और भाईचारे का प्रतीक
उत्तराखंड की होली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ रंग खेलने से पहले भगवान को याद किया जाता है. यहाँ की होली शालीनता, संस्कृति और भाईचारे का प्रतीक है. यही वजह है कि कुमाऊँ की होली पूरे राज्य में ही नहीं, बल्कि देशभर में अपनी खास पहचान बनाए हुए है.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-...और पढ़ें
Location :
Almora,Almora,Uttarakhand
First Published :
February 22, 2026, 09:13 IST

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