Last Updated:November 29, 2025, 14:06 IST
Solar Radiation Attack on Airbus A320: एयरबस की न्यूयार्क आ रही फ्लाइट में सोलर रेडिएशन अटैक के बाद पूरी एविएशन इंडस्ट्री में हड़कंप मचा हुआा है. यूरोपियन यूनियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी के डायरेक्टिव के बाद पूरी दुनिया में एयरबस के A320 फैमली के एयरक्राफ्ट को अपग्रेड किया जा रहा है. यूरोप के बाद भारत में भी डीजीसीए ने डायरेक्टिव जारी कर दिए है. वहीं, इस मसले पर जैसे-जैसे खबरें बाहर आ रही है, पैसेंजर्स की बेचैनी बढ़ती जा रही है. इस बचैनी की वजह वह तमाम सवाल हैं, जिनके जवाब पैसेंजर खोज रहे हैं. तो आपके जहन में भी ये सवाल तो जान लीजिए उनके जवाब.
(फाइल फोटो)Solar Radiation Attack on Airbus A320: आकाश में उड़ते विमानों के लिए सूर्य की किरणें अब एक अनजान दुश्मन बन गईं हैं. बीती 30 अक्टूबर को जेटब्लू एयरलाइंस की न्यूयॉर्क जा रही फ्लाइट को सूर्य से निकलने वाली सोलर रेडिएशन ने ताजा झटका दिया है. इस झटके की वजह से फ्लाइट पिच डाउन हुई और 15 पैसेंजर घायल हो गए. इस घटना के बाद पूरी दुनिया में हड़कंप मचा हुआ है. जांच में पता चला कि यह समस्या एलीवेटर एंड एइलरॉन कंप्यूटर (ELAC) से जुड़ी है, जो विमान की पिच और रोल को कंट्रोल करता है.
इस घटना के बाद पहले यूरोपीय यूनियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी (EASA) और फिर डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने इमरजेंसी एयरवर्थिनेस डायरेक्टिव जारी कर प्लेन्स को अगली उड़ान से पहले अपडेट करने का निर्देश दिया है. एयरबस ने 6,000 से अधिक A320 प्लेन्स के सॉफ्टवेयर को अपडेट करना शुरू कर दिया है. पुराने मॉडल्स में हार्डवेयर बदलाव भी जरूरी हो सकता है, जिसमें कुछ घंटों से लेकर दिनों तक का समय लग सकता है. भारत में इंडिगो, एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की 200-250 उड़ानें प्रभावित हुई हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोलर साइकल के चरम पर पहुंचने से ऐसी घटनाएं बढ़ सकती हैं.
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पैसेंजर्स के जहन में कुछ सवाल उठना शुरू हो गए है. आइए जाने कौन से हैं वह सवाल और क्या है उनके सही जवाब:
सोलर रेडिएशन प्लेन के फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम को कैसे प्रभावित करता है? क्या यह ‘बिट फ्लिप’ जैसी समस्या पैदा करता है?
एयरबस A320 के ELAC सिस्टम में सोलर रेडिएशन हाई-एनर्जी पार्टिकल्स के रूप में कंप्यूटर मेमोरी को नुकसान पहुंचाता है. ये पार्टिकल्स डेटा बिट्स को फ्लिप करके 0 को 1 या उल्टा कर देते हैं, जिससे पायलट के साइड-स्टिक कमांड्स गलत सिग्नल बन जाते हैं. इससे अनकंट्रोल्ड पिच-डाउन हो सकता है, जैसा जेटब्लू की फ्लाइट में हुआ. जहां तक ‘बिट फ्लिप’ की बात है तो एयरबस की जांच से साबित हुआ कि L104 सॉफ्टवेयर एडिशन इस रेडिएशन के लिए संवेदनशील है, जो फ्लाइट कंट्रोल डेटा को करप्ट कर सकता है. इससे विमान की स्ट्रक्चरल लिमिट्स पार हो सकती हैं.
सोलर रेडिएशन का जोखिम कितना बड़ा है और प्लेन के स्ट्रक्चर को कितना नुकसान पहुंच सकता है?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, जोखिम मीडियम से लेकर हाई तक का है. नवंबर 2025 में सोलर साइकल के पीक पर है, जहां फ्लेयर्स साल में 10-20 बार हो सकते हैं. ऊंचाई पर उड़ते प्लेन 28,000 फीट से ऊपर रेडिएशन के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं. स्ट्रक्चर को सीधा नुकसान नहीं, लेकिन अनकंट्रोल्ड मूवमेंट से एलीवेटर ओवर-लोड हो सकता है, जो विमान की स्ट्रक्चरल लिमिट्स पार कर दुर्घटना का कारण बन सकता है. EASA के अनुसार, बार-बार एक्सपोजर इलेक्ट्रॉनिक्स को डिग्रेड कर सकता है, लेकिन तत्काल खतरा फ्लाइट कंट्रोल फेलियर का है.
क्या यह समस्या सिर्फ एयरबस के A320 में ही है? क्या बोइंग के एयरक्राफ्ट इस समस्या से अछूते हैं?
नहीं, यह समस्या A320 विशेष की नहीं, लेकिन ELAC L104 सॉफ्टवेयर से जुड़ी है. A319, A320, A321 सभी प्रभावित हैं. बोइंग के 737 MAX जैसे विमान भी फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम पर निर्भर हैं, इसलिए सोलर रेडिएशन से बिट फ्लिप का खतरा है, लेकिन अभी कोई खास इंसिडेंट या डायरेक्टिव नहीं आया है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि बोइंग के सिस्टम्स में रेडिएशन-टॉलरेंट डिजाइन बेहतर है, लेकिन कोई भी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित नहीं है.
भारत की कौन-कौन सी एयरलाइंस इस समस्या से प्रभावित हैं और इसका फ्लाइट्स पर क्या असर पड़ रहा है?
भारत में इंडिगो के 200, एयर इंडिया के 113 और एयर इंडिया एक्सप्रेस के 25 प्लेन्स मुख्य रूप से प्रभावित हैं. भारत में A320 के कुल 338 प्लेन्स हैं. इससे 200-250 उड़ानें प्रभावित हुई हैं. इंडिगो ने 143 अपडेट पूरे कर लिए है. दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे हब्स पर अपग्रेडेशन की वजह से फ्लाइट्स का डिले जारी है. एयर इंडिया अब तक करीब 42 अपडेट कर चुका है. डीसीजीए ने अब A320 के साथ एयरबस के करीब 41 वैरियंट्स को अपग्रेड करने का आदेश दिया है, जिसकी वजह से वीकेंड ट्रैवल प्रभावित हो सकता है.
ELAC को अपडेट में कितना समय लगेगा और फ्लाइट ऑपरेशन कब तक सामान्य हो जाएंगे?
नए A320neo में सॉफ्टवेयर रोल बैक 30 मिनट से 3 घंटे लगेगा. पुराने CEO मॉडल्स में हार्डवेयर बदलाव से 1-2 दिन लग जाएंगे. एयरबस के अनुसार, 85% विमान जल्दी ठीक हो जाएंगे. भारत में इंडिगो-एयर इंडिया ग्रुप 56% अपडेट कर चुके. सभी एयरक्राफ्ट्स का अपग्रेडेशन सोमवार से मंगलवार तक पूरा होगा. वहीं ग्लोबल फ्लीट में अधिकांश 30 नवंबर तक अपग्रेड हो जाएंगे, लेकिन 1,000 पुराने प्लेन्स में हफ्ते लग सकते हैं. EASA डेडलाइन अगली उड़ान से पहले है.
सोलर रेडिएशन की वजह से किस तरह की समस्या हो सकती है, उससे निपटने के लिए प्लेन्स कितने सक्षम हैं?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, सोलर रेडिएशन की वजह से बिट फ्लिप से अनकंट्रोल्ड पिच-डाउन, ऑटोपायलट फेलियर, संचार ब्लैकआउट जैसी समस्या आ सकती हैं. इंपैक्ट बड़ा हुआ तो स्ट्रक्चरल डैमेज भी हो सकता है. डबल ELAC रिडंडेंसी, क्रू ट्रेनिंग और क्विक रिकवरी प्रोटोकॉल से स्थिति को संभाला भी जा सकता है. अपडेट के बाद, प्लेन्स एरर चेकिंग और रेडिएशन शील्डिंग से 99% सुरक्षित हो जाएंगे. पायलट मैनुअल ओवरराइड कर सकते हैं, लेकिन सोलर स्टॉर्म अलर्ट पर ऊंचाई घटाना जरूरी है.
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Anoop Kumar MishraAssistant Editor
Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to ...और पढ़ें
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November 29, 2025, 14:06 IST

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