'ऐसा कोई सगा नहीं...', क्या कहती है ट्रंप की कुंडली और दुनिया में क्या होने वाला है?

2 hours ago

Donal Trump: डोनाल्ड ट्रंप सिर्फ ईरान और खलीफा के लिए खतरनाक साबित नहीं हो रहे. वो पूरी दुनिया के लिए खतरनाक हो गए हैं. ये डर ऐसा है कि कई ज्योतिषियों ने तो ट्रंप की जन्म कुंडली भी देख ली है. जिसके बाद उन्होंने दावा किया है कि ट्रंप की कुंडली में ही दुनिया की तबाही लिखी है. दरअसल कुछ ज्योतिषियों ने उनकी कुंडली खंगाली तो उनके निजी जिंदगी बारे में तमाम हैरान करने वाली बातें सामने आईं. ज्योतिषियों के मुताबिक वर्तमान में ट्रंप के टैरिफ का सबसे आक्रामक और परेशान करने वाला समय चल रहा है जो सितंबर तक रहेगा.

क्या कहती है ट्रंप की कुंडली

ज्योतिषिय गणना से पता चलता है कि ट्रंप की राशि वृश्चिक है, उनका जन्म सिंह लग्न में हुआ है. उनकी कुंडली के दशम भाव में राहु और मंगल की उपस्थिति उन्हें एक 'अजेय' लेकिन चंचल मन वाला 'अस्थिर' योद्धा बनाती है. राहु के चलते ट्रंप अचानक से अपने फैसले लेते हैं. उनकी कुंडली में फिलहाल गुरु की अंतर्दशा और राहु का गोचर चल रहा है. उनकी ये स्थिति दिखाती है कि वो अपने देश का तो 'विस्तार' चाहते हैं, लेकिन दूसरों के लिए 'अवरोध' पैदा करते रहेंगे.

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दूसरे साल का अनुमान

ये तो हुई ज्योतिष शास्त्र की बात. लेकिन अर्थशास्त्र भी दुनिया पर ट्रंप की नीतियों के विनाशकारी असर की कहानी बता रहा है. वैसे तो ट्रंप ने अपने एक साल के कार्यकाल में पूरी दुनिया को अपनी उलट-पुलट नीतियों से परेशान करके रखा है लेकिन दूसरे साल के कार्यकाल में प्रवेश करते ही उसका प्रभाव बढ़ गया है.

अर्थ व्यवस्था के लिए अमंगलकारी

20 जनवरी से 23 जनवरी के बीच यानी 4 दिनों में ट्रंप की धमकियों से विश्व अर्थव्यवस्था को लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर का सीधा नुकसान हुआ है. एक तरफ ट्रंप ने खुद को मालामाल किया है, दूसरी तरफ दुनिया को 2 ट्रिलियन डॉलर की चोट पहुंचाई. ट्रंप की धमकी का सबसे ज्यादा असर अमेरिकी शेयर बाजारों पर ही पड़ा. यानी ट्रंप ने अमेरिका का ही सबसे ज्यादा नुकसान किया है.

केवल एक दिन यानी 20 जनवरी को अमेरिकी शेयर बाज़ारों में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट आई. 20 जनवरी को शेयर बाजार में गिरावट से 1.5 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का नुक़सान हुआ. ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस में भी शेयर बाजार 1 प्रतिशत से ज्यादा गिरे.

भारत पर असर!

ट्रंप की धमकियों का असर अमेरिका और यूरोप के अलावा भारत पर भी पड़ा है. इस दौरान भारतीय बाजार में भी लगातार गिरावट का सिलसिला जारी रहा. 20 जनवरी से 23 जनवरी के बीच सेंसेक्स में 1700 प्वाइंट से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. इस दौरान भारतीय निवेशकों को 16 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.

लोग मुनाफे के लिए शेयर बाजार में निवेश करते हैं लेकिन ट्रंप के धौंस जमाने वाले बयानों से नुकसान हो रहा है. रुपया भी लगातार गिर रहा है. अब ये एक डॉलर के मुकाबले 92 रुपये के आसपास पहुंच गया है.

शेयर बाज़ार के अलावा एविएशन सेक्टर भी अब इसकी चपेट में आ गया है. ईरान पर हमले की आशंका के बीच दुनिया की कई एयरलाइंस ने मिडिल ईस्ट जाने वाली उड़ानों को रद्द कर दिया है. ये उड़ान अगले कई दिनों तक रद्द रह सकती हैं. इसका असर एविएशन सेक्टर के अलावा दुनिया के पर्यटन और कारोबार पर भी पड़ेगा.

वैश्विक मंदी का संकेत

दुनिया में एक और युद्ध छिड़ने की आशंका के बीच अब मंदी की आहट भी सुनाई देने लगी है. आपको ट्रंप की कुंडली में क्या लिखा है ये बहुत ध्यान से पढ़ना चाहिए क्योंकि ये हर किसी की जिंदगी से जुड़ा विषय है. पिछले एक महीने के दौरान दुनिया में मंदी की आशंका बढ़ती जा रही है.

- एक महीने पहले यानी दिसंबर 2025 में ग्लोबल इन्वेस्टमैंट बैंक जे पी मॉर्गन ने दुनिया में मंदी को लेकर कहा था कि इसकी आशंका 35 प्रतिशत है.

- लेकिन पिछले कुछ दिनों के उथल-पुथल के बाद इसने अपने आंकड़ों में बहुत ज्यादा बदलाव किया है. जे पी मॉर्गन के नए आंकड़ों के अनुसार दुनिया में मंदी आने की आशंका बढ़कर अब 60 प्रतिशत हो गई है.

महज एक महीने में मंदी की आशंका 35 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गई है. मंदी की आशंका में इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण यूरोपीय देशों को अमेरिका की तरफ से टैरिफ की धमकी है. यानी आप सीधे तौर पर कह सकते हैं कि ट्रंप ही वो इकलौते शख्स हैं जो मंदी को आमंत्रण दे रहे हैं. जिनकी वजह से मंदी आने वाली है. जे पी मॉर्गन के मुताबिक इस टैरिफ से दुनिया का व्यापार धीमा हो जाएगा. अगर टैरिफ के साथ-साथ युद्ध भी शुरू हो गया तो मंदी की आशंका में और ज्यादा बढ़ोतरी होना तय है.

मंदी आने का असर दुनिया के हर कोने और हर सेक्टर में दिखाई देता है. अर्थव्यवस्था का कोई भी क्षेत्र इससे बच नहीं पाता है. जे पी मॉर्गन ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर तो उम्मीद जताई है. लेकिन जब पूरी दुनिया एक दूसरे से जुड़ी हुई है तो इसका असर भारत पर भी पड़ना तय है.

कोरोना काल को छोड़ दें तो दुनिया में आखिरी मंदी साल 2008-09 में आई थी. उसका अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा.

2008 की मंदी का असर कैसा था?

अमेरिका में 87 लाख लोगों की नौकरियां चली गईं. पूरी दुनिया में करोड़ों लोगों की जॉब छिन गई. 2008-09 की मंदी ने न केवल अर्थव्यवस्था को झटका दिया, बल्कि सामाजिक, राजनीतिक और वैश्विक व्यवस्था को भी प्रभावित किया. अगर 2026 में मंदी आती है तो इसके पीछे भी अमेरिकी नीतियां ही जिम्मेदार होंगी.

ग्लोबल वार्मिंग और तूफान

अमेरिका के लिए संकट सिर्फ मंदी का नहीं है. बल्कि एक संकट ग्लोबल वार्मिंग और तूफान का भी है. अमेरिका फिलहाल बर्फीले तूफान की चपेट में है. 18 राज्यों में इमरजेंसी लागू है. जबकि 2 दिनों में करीब 8 हजार उड़ानें रद्द करनी पड़ीं. 20 करोड़ से ज्यादा लोग इस तूफान की चपेट में आ सकते हैं. यानी अमेरिका के लगभग दो-तिहाई लोग तूफान के खतरे का सामना कर रहे हैं.

ट्रंप की कुंडली में दुनिया का विनाश लिखा है?

अमेरिका अब पहले से ज्यादा तूफान और जंगल की आग का सामना कर रहा है. लेकिन इस पर ट्रंप का ध्यान नहीं है. AccuWeather के मुताबिक 70 वर्षों में अमेरिका का औसत तापमान 1.66 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है. लेकिन ट्रंप को ग्लोबल वॉर्मिंग से कोई फर्क नहीं पड़ता. जलवायु संकट की उन्हें कतई चिंता नहीं है.

ऐसा कोई सगा नहीं जिसे ट्रंप ने...

उन्हें दुनिया की प्रॉब्लम अपनी प्रॉब्लम नहीं लगती. उनका फोकस कमजोर को दबाने मजबूर लोगों पर कब्जा करने पर है. धमकाना ट्रंप की पुरानी आदत है. पिछले कुछ दिनों से उन्होंने धमकाने का नया रिकॉर्ड बनाया और ईरान जैसे दुश्मन छोड़िए दोस्तों को भी नहीं बख्शा है.

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