ऑपरेशन सिंदूर में यहां दिखी थी कमी, अब सेना के हाथ में कंट्रोल, 30,000 की 'फौज' तैनात!

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Last Updated:January 27, 2026, 10:22 IST

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना ने अपनी मारक क्षमता बढ़ाने और देश की सीमा और सुरक्षित बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं. इसी क्रम में सीमा पर ड्रोन निगरानी, रॉकेट फोर्स, एयर कमांड सेंटर और भैरव बटालियंस की तैनाती कर सुरक्षा को मजबूत किया गया है. सेना चीन और पाकिस्तान से लगी सीमा पर करीब 30 हजार ड्रोन्स की तैनाती का काम कर रही है.

ऑपरेशन सिंदूर में दिखी ये कमी, सेना के हाथ में कंट्रोल, 30,000 की 'फौज' तैनात!मात्र 88 घंटे चले इस ऑपरेशन में पाकिस्तान की करम टूट गई. उसके कई एयरबेस और फाइटर जेट तबाह हो गए थे. (फाइल फोटो)

बीते साल मई महीने में पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत की ओर से चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर में महज 88 घंटे के भीतर पाकिस्तान की कमर टूट गई थी. वह घुटने के बल आकर गिड़गिड़ाने लगा. उसको भारी नुकसान झेलना पड़ा था. लेकिन, ऐसा नहीं है कि इस जंग से भारत को कोई सीख नहीं मिली. इस जंग में भारत के एक क्षेत्र में थोड़ी कम दिखी. वह क्षेत्र था कम ऊंचाई और सीमा के नजदीक वाले इलाकों में पाकिस्तान की ओर से किए गए ड्रोन हमले. हालांकि भारतीय सेना ने करीब-करीब सभी हमले नाकाम कर दिए. लेकिन, भविष्य में इस क्षेत्र की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत महसूस हुई थी.

अब भारतीय सेना ने इस कमी को दूर करने के लिए एक बड़ी रणनीति तैयार की है. उसने देश की सीमाओं से 35 किलोमीटर के दायरे में और तीन किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ने वाली वस्तुओं की निगरानी का काम अपने कंधे पर ले लिया है. यह फैसला ऑपरेशन सिंदूर के बाद उठाए गए कई कदमों में से एक है, जिसमें तैनाती रणनीति में बदलाव और रॉकेट रेजिमेंट्स की शुरुआत शामिल है.

सेना के हाथ में ड्रोन और एंटी ड्रोन एक्टिविटी

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार सेना अब सीमाओं पर 35 किमी भूमि और तीन किमी वायु क्षेत्र में 97 फीसदी ड्रोन तथा एंटी-ड्रोन गतिविधियों का संचालन कर रही है. चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर एयर कमांड एंड कंट्रोल सेंटर्स स्थापित किए जा रहे हैं, जो न केवल सीमा पार ड्रोन गतिविधियों की निगरानी करेंगे, बल्कि ड्रोन लॉन्च करने और दुश्मन ड्रोनों को नष्ट करने में भी सक्षम होंगे.

सेना पश्चिमी थिएटर में 10,000 ड्रोनों को संचालित करने की क्षमता हासिल करने पर काम कर रही है, जबकि 3,488 किमी लंबी चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर 20,000 से अधिक ड्रोनों की योजना है. क्षेत्रीय कोर कमांडर भारतीय वायुसेना के कमांडर के साथ मिलकर एयरफोर्स, खुफिया एजेंसियों और अन्य संगठनों के साथ समन्वय करेंगे.

यह निगरानी व्यवस्था ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान द्वारा तुर्की और चीनी ड्रोनों से भारतीय सेना और वायुसेना ठिकानों पर हमले की कोशिश के बाद लागू की गई है. पीएलए (चीनी सेना) भी पूर्वी थिएटर में LAC पर भारतीय गतिविधियों की निगरानी के लिए ड्रोन तैनात कर रही है.

ऑपरेशन सिंदूर

ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में शुरू हुआ था, जब भारत ने सात मई की सुबह पाकिस्तान और पीओके में आतंकी तथा सैन्य ठिकानों पर हमले किए. यह ऑपरेशन 10 मई को युद्धविराम के साथ समाप्त हुआ. इस दौरान लड़ाकू विमान, मिसाइल, सशस्त्र ड्रोन और भयंकर तोपखाने युद्ध शामिल थे. यह पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले का जवाब था, जिसमें 26 हिंदू मारे गए थे.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना ने कई बदलाव किए हैं. दो रॉकेट फोर्स यूनिट्स, दो संयुक्त हथियार ब्रिगेड्स (रुद्र ब्रिगेड्स) और 21 भैरव बटालियंस तैनात किए गए हैं. भारतीय तोपखाने ब्रिगेड्स की रेंज 150 किमी से बढ़ाकर 1,000 किमी कर दी गई है. रॉकेट फोर्स की स्थापना चीन द्वारा मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में रॉकेट रेजिमेंट्स तैनात करने और पाकिस्तान द्वारा ऑपरेशन सिंदूर में फतह-1 तथा फतह-2 रॉकेट्स के उपयोग के बाद हुई.

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संतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स...और पढ़ें

First Published :

January 27, 2026, 10:14 IST

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