ओह शिट, कॉकपिट के आखिरी शब्द, फिर आग का गोला बना प्लेन, अजित पवार की मौत की पूरी कहानी

1 hour ago

Last Updated:January 29, 2026, 08:15 IST

ओह शिट, कॉकपिट के आखिरी शब्द, फिर आग का गोला बना प्लेन, दादा की मौत की कहानीबुधवार को विमान हादसे में अजित पवार का निधन हो गया. फोटो- पीटीआई

Ajit Pawar Plane Crash  News: महाराष्ट्र के डिप्टी चीफ मिनिस्टर अजित पवार की मौत की एक-एक कहानी सामने आ रही है. सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने बुधवार को एक रिलीज जारी की, जिसमें प्लेन के आखिरी पलों की बातचीत बताई गई है. कैप्टन सुमित कपूर और को-पायलट शांभवी पाठक ने ग्राउंड कंट्रोल को बताया कि पहली लैंडिंग में रनवे नजर नहीं आया. दूसरी कोशिश में रनवे दिखा, क्लियरेंस मिला, लेकिन फिर कोई जवाब नहीं आया, और पल भर में प्लेन आग का गोला बन गया. कॉकपिट से जो आखिरी शब्द सुने गए थे वो था– ओह शिट. ये हादसा बुधवार सुबह हुआ. विमान मुंबई से बरामती जा रहा था. उड़ान सिर्फ 33 मिनट की थी. सुबह 8:10 बजे मुंबई एयरपोर्ट से टेकऑफ हुआ. फ्लाइट रडार24 के मुताबिक, प्लेन सीधा दक्षिण-पूर्व की तरफ गया, वेस्टर्न घाट को पार करते हुए 19,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंचा. फिर धीरे-धीरे नीचे उतरने लगा. बरामती एयरपोर्ट पहुंचने पर पहला कॉन्टैक्ट 8:18 बजे हुआ.

यह एयरपोर्ट ‘अनकंट्रोल्ड’ है. मतलब यहां कोई फुल टाइम ATC टावर नहीं है. छोटा एयरस्ट्रिप है, जहां लोकल एविएशन अकादमियों – रेड बर्ड एविएशन और कार्वर एविएशन के पायलट कैडेट्स ग्राउंड कंट्रोल संभालते हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक कोई एडवांस नेविगेशन सिस्टम नहीं है. मौसम की जानकारी भी बेसिक है. ATC ने प्लेन को कहा – विजुअल कंडीशंस में अपनी मर्जी से उतरो. पायलट ने पूछा – हवा कैसी है, विजिबिलिटी कितनी? जवाब मिला – हवा शांत है, विजिबिलिटी करीब 3000 मीटर. एविएशन एक्सपर्ट्स कहते हैं कि 3000 मीटर की विजिबिलिटी हो तो फिक्स्ड विंग प्लेन के लिए लैंडिंग में कोई बड़ी दिक्कत नहीं आती.

एटीसी से ये हुई बात

फाइनल अप्रोच में पायलट ने कहा – रनवे नजर नहीं आ रहा. फिर उसने फ्लाइट को गो-अराउंड किया – मतलब लैंडिंग छोड़कर दोबारा कोशिश की. फिर से अप्रोच किया. फिर कहा – अभी भी रनवे नहीं दिख रहा. जब दिखेगा तो बताएंगे. कुछ सेकेंड बाद कॉकपिट से कहा – अब रनवे दिख रहा है.

ATC ने 8:43 बजे रनवे 11 पर लैंडिंग क्लियर कर दी. लेकिन पायलट ने स्टैंडर्ड रीडबैक नहीं दिया – जो क्लियरेंस की कन्फर्मेशन होती है. फिर अगले ही मिनट 8:44 बजे ATC ने रनवे के ठीक पहले बाईं तरफ आग की लपटें देखीं. प्लेन रनवे से काफी पहले, बाईं तरफ गिरा और आग का गोला बन गया.

एक सीनियर डीजीसीए अधिकारी ने बताया – प्लेन रनवे थ्रेशोल्ड से पहले ही क्रैश हो गया, लेकिन एयरस्ट्रिप के अंदर था. टचडाउन से पहले कोई आग नहीं थी. कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर से आखिरी शब्द सुने गए – ओह शिट. प्लेन के ज्यादातर हिस्से जलकर खाक हो गए, सिर्फ टेल फिन बचा. टुकड़े कई मीटर दूर बिखरे पड़े थे.

स्थानीय लोगों ने बताया कि प्लेन लैंडिंग के दौरान अस्थिर लग रहा था. एक व्यक्ति ने बताया कि प्लेन हिचकोले खा रहा था. फिर अचानक तेज आवाज के साथ वह नीचे आ गया. सीसीटीवी फुटेज में भी प्लेन बैलेंस खोता दिख रहा है. पास के गांव वालों ने कहा कि चार-पांच जोरदार धमाके हुए, काला धुआं आसमान में भर गया. आग इतनी तेज थी कि किसी को बचाने का मौका नहीं मिला.

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर लैंडिंग सेफ न लगे तो गो-अराउंड करना स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल है. लेकिन यहां विजिबिलिटी 3000 मीटर थी, फिर भी रनवे नजर नहीं आया. यह बड़ा सवाल है. शायद खराब मौसम, फॉग या छोटी एयरस्ट्रिप की वजह से ऐसा हुआ होगा. कुछ लोग कहते हैं कि बरामती एयरपोर्ट वीआईपी मूवमेंट के लिए इस्तेमाल होता है, लेकिन ट्रेनिंग के लिए ज्यादा, नेविगेशन एड्स नहीं हैं. कोई मेडे कॉल नहीं आई. यानी इमरजेंसी डिक्लेयर नहीं की गई. एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने जांच शुरू कर दी है.

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संतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स...और पढ़ें

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January 29, 2026, 08:15 IST

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