Last Updated:February 03, 2026, 19:24 IST
गृहमंत्री अमित शाह ने केरल से बीजेपी सांसद सदानंद मास्टर का वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह राज्यसभा में बता रहे हैं कि किस तरह 30 साल पहले राजनीतिक विरोध की वजह से उनके दोनों पैर काट दिए गए थे.शाह ने कहा कि विचारधारा के नाम पर किसी के पैर काट देना ऐसी क्रूरता है, जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं.

राज्यसभा में सोमवार एक ऐसा क्षण आया, जिसने वहां मौजूद हर सांसद और टीवी पर देख रहे हर देशवासी को स्तब्ध कर दिया. सदन में केरल से बीजेपी सांसद सदानंद मास्टर जब अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए, तो वह अपने असली पैरों पर नहीं, बल्कि कृत्रिम पैरों के सहारे खड़े थे. उनके पैरों को तीन दशक पहले राजनीतिक हिंसा में काट दिया गया था. सदानंद मास्टर ने अपने पहले भाषण में केरल में आरएसएस और बीजेपी कार्यकर्ताओं पर वामपंथी दलों द्वारा किए गए अत्याचारों की जो दास्तां सुनाई, उसने सभी को झकझोर कर रख दिया.खुद गृहमंत्री अमित शाह ने उनका वीडियो शेयर किया है और इसे रोंगटे खड़े कर देने वाला सच बताया है.
गृह मंत्री अमित शाह ने सदानंद मास्टर के भाषण की क्लिपिंग शेयर करते हुए ‘एक्स’ पर लंबा और भावुक नोट लिखा. शाह ने लिखा,’सदानंद मास्टर जी ने कल राज्यसभा में अपने भाषण के दौरान केरल में संघ और भाजपा के कार्यकर्ताओं पर दशकों से हो रही हिंसा का जो दृश्य दिखाया, उसे देख कर हर इंसान का दिल पसीज जाएगा. जिस अमानवीय पीड़ा और अत्याचार को सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं, उसे भाजपा और संघ के कार्यकर्ता केरल में दशकों से झेल रहे हैं. विचारधारा अलग होने या विचारों की सहमति न होने पर किसी के पैर काट देना, किसी की जान ले लेना, ऐसी क्रूर विचारधारा के खिलाफ भाजपा और संघ के कार्यकर्ताओं ने जो संघर्ष किया है, उसे शब्दों में वर्णित नहीं किया जा सकता.’
सदानंद का भाषण सुनना चाहिए
गृह मंत्री ने उन लोगों पर भी निशाना साधा जो अक्सर देश में असहिष्णुता की बात करते हैं.उन्होंने लिखा, लोकतंत्र और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाले हर व्यक्ति को यह संघर्ष और त्याग अवश्य देखना चाहिए. साथ ही, फ्रीडम ऑफ स्पीच और असहिष्णुता की झूठी दुहाई देने वालों को भी सदानंद मास्टर जी का यह भाषण सुनना चाहिए. शायद वे सदानंद जी और उनके जैसे असंख्य लोगों के संघर्ष को समझ पाएं.
1994 की वह खौफनाक रात-जब मास्टर के पैर काट दिए गए
बात 1994 की है. उस समय सदानंद केरल के कन्नूर जिले के मट्टनूर इलाके में आरसएस के जिला सह-कार्यवाह के रूप में सक्रिय थे. कन्नूर को केरल में राजनीतिक हिंसा का गढ़ माना जाता है, जहां सीपीएम (CPI-M) और आरएसएस के बीच दशकों से खूनी संघर्ष चला आ रहा है. सदानंद मास्टर के बढ़ते प्रभाव से वामपंथी कैडर नाराज था. सीपीएम के गुंडों ने एक योजना बनाई. उनका मकसद सदानंद की जान लेना नहीं, बल्कि उन्हें हमेशा के लिए अपाहिज बनाकर एक मिसाल कायम करना था ताकि कोई और संघ की विचारधारा के साथ जुड़ने की हिम्मत न करे.
सदानंद मास्टर जी ने कल राज्यसभा में अपने भाषण के दौरान केरल में संघ और भाजपा के कार्यकर्ताओं पर दशकों से हो रही हिंसा का जो दृश्य दिखाया, उसे देख कर हर इंसान का दिल पसीज जाएगा। जिस अमानवीय पीड़ा और अत्याचार को सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं, उसे भाजपा और संघ के कार्यकर्ता केरल… pic.twitter.com/5UJ66Hii9t
बर्बरता की सारी हदें पार कर दी
भीड़ ने उन पर हमला किया. उन्हें जमीन पर पटक दिया गया और बर्बरता की सारी हदें पार करते हुए उनके दोनों पैर घुटनों के नीचे से काट दिए गए. उस समय पुलिस को मौके पर पहुंचने और उन्हें अस्पताल ले जाने में काफी समय लग गया था क्योंकि हमलावरों ने दहशत का माहौल बना रखा था. उस हमले में सदानंद मास्टर बच तो गए, लेकिन उन्होंने अपने दोनों पैर खो दिए.
‘पैर कटे हैं, विचारधारा नहीं’
हमलावरों को लगा था कि पैर कटने के बाद सदानंद घर की चारदीवारी में कैद हो जाएंगे और आरएसएस का काम बंद हो जाएगा. लेकिन हुआ इसका ठीक उल्टा. लंबे इलाज और कृत्रिम पैरों के सहारे सदानंद मास्टर फिर से खड़े हुए. उन्होंने न केवल अपनी शिक्षण की नौकरी जारी रखी, बल्कि संघ का काम भी दोगुनी ताकत से शुरू कर दिया. केरल की राजनीति में सदानंद मास्टर वैचारिक प्रतिरोध का प्रतीक बन गए. बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा भेजकर यह संदेश दिया कि पार्टी अपने उन कार्यकर्ताओं को नहीं भूली है जिन्होंने जमीन पर खून बहाया है.
राज्यसभा में गूंजी ‘कन्नूर मॉडल’ की कहानी
राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान सदानंद मास्टर ने कहा, मैं उस हिंसा का जीता-जागता सबूत हूं. मेरे पैर इसलिए काटे गए क्योंकि मेरी विचारधारा उनसे अलग थी. क्या लोकतंत्र में अलग विचार रखने की सजा मौत या अपंगता होनी चाहिए? उन्होंने सदन को याद दिलाया कि केरल में विशेषकर कन्नूर में सैकड़ों बीजेपी और आरएसएस कार्यकर्ताओं ने अपनी जान गंवाई है. किसी को उनके परिवार के सामने मार दिया गया, तो किसी को उसके घर में ही काट दिया गया. उन्होंने सवाल उठाया कि तथाकथित मानवाधिकारवादी संगठन उस वक्त चुप क्यों हो जाते हैं जब मरने वाला व्यक्ति भगवा विचारधारा का होता है?
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Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for 'Hindustan Times Group...और पढ़ें
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Delhi,Delhi,Delhi
First Published :
February 03, 2026, 19:24 IST

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