कितने दिन में ईरान पर कब्जा कर लेगा अमेरिका? एक्सपर्ट्स ने समझाया ट्रंप का WAR प्लान

2 hours ago

US Vs Iran: दुनिया वॉर मोड में है. सबकी निगाहें मिडिल ईस्ट पर टिकी हैं. खलीफा ने भी मिटा देने की धमकी दी है. दावा किया जा रहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच कभी भी जंग छिड़ सकती है. ट्रंप और उनके प्रशासन ने सीधे ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को वॉर नोटिस दिया है. इसका मतलब ये हुआ, कि अब ईरान से समझौता नहीं, युद्ध होगा. अमेरिका का विध्वंसक युद्धपोत अब्राहम लिंकन एक्टिव हो गया है. इजरायल ने भी वॉर रेडी होने के संकेत दिए हैं. हमला करने और ईरान का जवाबी हमला रोकने के लिए इजरायल भी रेडी  है. इजरायल, ट्रंप के लिए लड़ेगा. इजरायल अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर अटैक करेगा.

ईरान पर अमेरिका हमला तय! मुस्लिम सहयोगी देशों को ट्रंप ने दिया हिंट

दुनिया महायुद्ध की आशंका से सहमी है. कई पश्चिमी देशों ने मिडिल ईस्ट की फ्लाइट्स कैंसिल की हैं. ज्यादातर देश ऐसे हैं. जिनसे अमेरिका इंटेलिजेंस शेयर करता है. अमेरिका की हमला ना करने की पहली शर्त तोड़ते हुए ईरान में प्रदर्शनकारियों को फांसी देने की शुरूआत हो गई है. ईरान की न्याय व्यवस्था के चीफ प्रॉसीक्यूटर यानी ईरान के सरकारी वकीलों के प्रमुख मोहम्मद मुवाहेदी ने ट्रंप के उस दावे को झूठा करार दिया है. जिसमें उन्होंने प्रदर्शनाकारियों की सजा माफी का दावा किया था. मुवाहेदी ने साफ किया है कि ईरानी न्यायपालिका ने ऐसा कोई फैसला नहीं लिया है.

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मुवाहेदी ने कहा कि न्यायपालिका के पास न तो ऐसी कोई संख्या है और न ही किसी बाहरी दबाव में फांसी रोकने का कोई आदेश जारी हुआ है.

800 लोगों को फांसी से बचाने के लिए जंग करेगा अमेरिका?

कहा ये भी जा रहा है कि अमेरिका ने मदद नहीं की तो ईरान में 800 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को फांसी पर लटका दिया जाएगा. सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी भी अपने साथियों की जिंदगी दांव पर लगे होने की बात कह रहे हैं. यानी अमेरिका को ईरान पर हमला करने की बड़ी वजह भी मिल गई है.

अमेरिका के घातक अस्त्र

अमेरिका के उन हथियारों के बारे में भी जानना चाहिए. जो किसी देश को पूरी तरह खत्म कर सकते हैं. अमेरिका इन हथियारों का ईरान के खिलाफ किस तरह इस्तेमाल करने वाला है. अमेरिकी मीडिया ने दावा किया है. ईरान पर टागरेगेड हमला होगा. यानी ईरान की जनता को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा. बल्कि ईरान के इस्लामिक शासन की सैन्य और परमाणु ताकत को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा. खलीफा और उनकी फोर्स को टारगेट किया जाएगा.

इसके लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने खतरनाक हथियारों और सैन्य उपकरण ईरान के चारों तरफ तैनात कर दिए हैं. इन ह​​थियारों की लिस्ट भी जारी कर दी गई है. अमेरिका ने इन हथियारों से ईरान के चारों ओर ऐसा सैन्य घेरा बना लिया है, जिससे वह बिना जमीन पर उतरे भी ईरान पर हवाई, समुद्री और मिसाइल हमले करने की स्थिति में है. इसे Full-Spectrum Strike Readiness कहते हैं. इसका संदेश है अमेरिका जंग के लिए पूरी तरह तैयार है

ट्रंप का WAR PLAN

विशेषज्ञों के मुताबिक ईरान पर अमेरिकी हमला. कैरियर स्ट्राइक अब्राहम लिंकन से होगा. वहीं से टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों से हमले  की शुरुआत होगी. अमेरिका के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में शामिल युद्धपोतों में 800 से ज्यादा  टॉमहॉक मिसाइलें मौजूद हैं. ये मिसाइलें 1,500 किलोमीटर की ज्यादा दूरी तक मौजूद लक्ष्य पर भी सटीक हमला कर सकती हैं. इनकी सबसे बड़ी खासियत है. ये रडार से बचकर उड़ती हैं. यानी ईरान का एयर डिफेंस इनको नहीं पकड़ सकता.

अमेरिका इनके जरिए दुश्मन के परमाणु ठिकानों, एयर डिफेंस सिस्टम, और सैन्य कमांड सेंटर को निशाना बनाता है .

अमेरिका के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में दो सबमरीन भी शामिल हैं. इनके नाम यूएसएस जॉर्जिया और साउथ डकोटा है.

दोनों अमेरिका की घातक परमाणु सबमरीन हैं. यानी ये परमाणु उर्जा से चलती हैं. दुश्मन की नजर में आए बगैर लंबे वक्त तक समंदर के अंदर रह सकती हैं. ये पानी के नीचे से टॉमहॉक दागने में सक्षम हैं. यानी ईरान को पता भी नहीं चलेगा कि हमला कहां से हुआ.

आपरेशन खलीफा!

अमेरिका की सबसे बड़ी ताकत उसकी एयरफोर्स है. जो आसमान से अमेरिका के नियंत्रण को स्थापित कर सकती है. अब आपको अमेरिका के उन फाइटर जेट्स के बारे में जानना चाहिए, जिन्हें ट्रंप आपरेशन खलीफा में उतार चुके हैं.

अमेरिका पहली एयर स्ट्राइक युद्ध में आजमाए हुए स्टेल्थ F-35 फाइटर जेट से करेगा . अमेरिका के पास इसका मरीन वर्जन भी मौजूद है. F-35 समंदर से भी हमला करने में सक्षम है.

अमेरिका ईरान में अंदर स्ट्राइक करने के लिए F-15E फाइटर जेट का इस्तेमाल करेगा .

अगर ईरान की वायुसेना पलटवार करती है. तो ईरानी फाइटर जेट्स से अमेरिका के F-16 फाइटर जेट्स डॉग फाइट करेंगे. अमेरिका की चौथी पीढ़ी के इन फाइटर जेट्स का डॉग फाइट यानी दो फाइटर जेट्स की सीधी लड़ाई में कोई सानी नहीं है.

इसके अलावा ईरान के अंदर जमीनी टागरेट को निशाना बनाने के लिए अमेरिका के A-10 फाइटर जेट्स भी तैयार हैं .

अमेरिका की इस आसमानी ताकत के जरिए ईरान की वायुसेना 24 घंटे में निष्क्रिय की जा सकती है.

लेकिन इन फाइटर जेट्स की मदद के लिए अमेरिका ने कुछ खास तरह के एयरक्राफ्ट तैनात किए हैं. जो युद्ध में गेमचेंजर साबित हो सकते हैं .

समुद्र में ईरानी जहाज़ और पनडुब्बी खोजने के लिए अमेरिका के P-8 पोसाइडन तैनात हैं.

चौबीस घंटे निगरानी करने और किसी भी संभावित खतरे की सूचना देने के लिए MQ-4C ट्राइटन की तैनाती की गई है.

इसके अलावा अमेरिकी फाइटर जेट्स अगर ईरान में अंदर तक हमला करने के लिए जाते हैं . तो अमेरिका के रिफ्यूलर एयरक्राफ्ट KC-135 और KC-46 को हवा में ही फाइटर जेट्स को ईंधन देने के लिए तैनात किया गया है .

अमेरिका लंबे युद्ध की तैयारी के साथ ईरान सीमा पर पहुंचा है. एक्सपर्ट्स का दावा है कि हमले के पहले चरण में मंदर में मौजूद युद्धपोतों से टॉमहॉक क्रूज मिसाइल दागी जाएंगी फिर अमेरिका के इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जेट EA-18G ग्राउलर ईरान के एयर डिफेंस और राडार सिस्टम दोनों को खराब कर देंगे. इसी के साथ साथ अमेरिका के स्टील्थ यानी ईरान के एयर डिफेंस की नजरों से ओझल रहने वाले F-35 फाइटर जेट आसमान से बम बरसाएंगे.

इन हमलों से ईरान के रडार, कम्युनिकेशन और मिसाइल कंट्रोल को अस्थायी तौर पर बेअसर किया जाएगा. ताकि ईरान को ठीक से पता ही न चले कि हमला कहां से हो रहा है.

इसके बाद अमेरिकी हमले का दूसरा चरण शुरू होगा. ईरान के एयर डिफेंस को खत्म करके अमेरिका के F-15E और  F-16 फाइटर जेट्स स्ट्राइक करेंगे.

इनका निशाना ईरान के एयरबेस, मिसाइल लॉन्च साइट्स, ड्रोन फैक्ट्री और न्यूक्लियर फैसिलिटी होगी.हमले के तीसरे चरण में अमेरिका समुद्र पर कब्जा करेगा. ईरान की नौसेना की ताकत खत्म की जाएगी.

हॉर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण

अमेरिकी युद्धपोत और सबमरीन सीधे ईरानी युद्धपोतों पर हमला करेंगे. इसका मकसद हॉर्मुज़ की खाड़ी के रास्ते को नियंत्रण में लेना होगा. हॉर्मुज की खाड़ी पर नियंत्रण इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल की आवाजाही यहीं से होती है.

सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, UAE का तेल इसी रास्ते बाहर जाता है. ईरान युद्ध की स्थिति में बार बार इस रास्ते को रोकने की धमकी देता रहा है .

अमेरिका की योजना ये सब कुछ 72 घंटे में खत्म करने की है. ताकी ईरान को मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी एयरबेसों और इजरायल पर हमला करने का मौका ना मिले या फिर उसकी जवाबी क्षमता काफी कम हो जाए .

अमेरिका की सैन्य शक्ति को देखते हुए कहा जा सकता है विशेषज्ञों ने जो योजना बताई है. अमेरिका उसे जमीन पर उतार सकता है. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप तेहरान से खामेनेई को भी वैसे ही गिरफ्तार करना चाहते हैं, जैसे उन्होंने वेनेजुएला से मादुरो को गिरफ्तार किया था. 

अमेरिका कैसे करेगा इसमें कितना रिस्क?

अगर ईरान में भारी अराजकता फैले और ईरान में अमेरिकी हमले के बाद सैन्य शक्ति तितर बितर हो जाए तो अयातुल्लाह अली खामेनेई को मादुरो की तरह जिंदा पकड़ने की कोशिश की जा सकती है. इससे पहले हम आपको अमेरिका की डेल्टा फोर्स की ईरान के चारों तरफ तैनाती की खबर विस्तार से बता चुके हैं. मादुरो को घर से अगवा करने वाली अमेरिकी डेल्टा फोर्स ईरान बॉर्डर के पास तैनात है.

मादुरो को पकड़ने वाली ट्रंप की ये विशेष डेल्टा फोर्स ही खामेनेई को जिंदा पकड़ने का ऑपरेशन करेगी. खामेनेई को मादुरो की तरह गिरफ्तार करना इसलिए भी मुश्किल है. क्योंकि खतरे को देखते हुए खामेनेई अंडरग्राउंड हो गए हैं. ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने उनको ईरान के एक सीक्रेट ठिकाने में हाईटेक बंकर के अंदर छिपा दिया है.

ईरान पर कब्जे या फिर जवाबी क्षमता पूरी तरह खत्म करने के बाद ही अमे​रिकी सैनिक खामेनेई की तलाश में उतर सकते हैं.

हालांकि इज़रायल और अमेरिका की खुफिया एजेंसियां लगातार खामेनेई के छिपने के अड्डों के बारे में पता लगा रही हैंय

ऐसे में सटीक सूचना पर अमेरिका के डेल्टा कमांडो वेनेजुएला जैसा ऑपरेशन कर सकते हैं .

ईरान पर अमेरिकी हमले और खासकर खामेनेई को पकड़ने के आपरेशन में इज़रायल बड़ी भूमिका निभाएगा . आज इज़रायल के भी युद्ध के लिए तैयार होने की खबर सामने आई . इससे पहले अमेरिका ने ईरान पर हमला इसीलिए टाला था. क्योंकि इज़रायल अपनी रक्षा के लिए तैयार नहीं था. 

इजरायल की भूमिका 

इजरायल, ईरान के अंदर हमले के लिए खुफिया जानकारी जुटाने का काम करेगा और ईरान के जवाबी हमले से अमेरिका को सचेत करेगा.

ईरान पर हमले के दूसरे चरण से  इज़रायल की वायुसेना भी हिस्सा लेगी. अमेरिका से मिले एफ-35 विमानों से इज़रायली पायलट भी दूसरे और तीसरे चरण में ईरान के ठिकानों पर बम बरसाएंगे.

इजरायल, ईरान के प्रॉक्सी हिजबुल्लाह और हूती को कंट्रोल करने का काम भी करेगा. इसके अलावा इजरायल के एरो जैसे एयर डिफेंस सिस्टम. ईरान के हमले से अमेरिका के बेसों और अपने शहरों को बचाएंगे.

यानी इजराइल पहले वार का चेहरा नहीं होगा, क्योंकि ईरान बार बार इजरायल पर हमले की धमकी दे रहा है. लेकिन इजरायल इस युद्ध में खुफिया जानकारी और ईरान के हमलों से रक्षा के काम में शुरुआत से शामिल होगा.

ईरान भी आर-पार के मूड में

अगर इजरायल की मदद से ईरान पर हमले के लिए तैयार है. तो ईरान ने भी पलटवार की तैयारियां कर ली हैं. ईरान ने अमेरिका को फिर से चेतावनी दी है. ईरानी सेना से कहा है- अगर उसके देश पर हमला हुआ तो अगले संघर्ष के बाद कोई युद्धविराम नहीं होगा. यानी अमेरिका ने जंग छेड़ी तो ईरान भी लंबी और निर्णायक लड़ाई के मूड में है. 

अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती मिडिल ईस्ट के अपने सैन्य बेसों की सुरक्षा है. मिडिल ईस्ट में कुवैत, कतर, इराक, सीरिया, जॉर्डन, सउदी अरब, यूएई और बहरीन जैसे देशों में अमेरिकी एयर और मिलिट्री बेस मौजूद हैं. इसी वजह से कतर और सऊदी जैसे देशों ने अमेरिका के ईरान पर हमले का विरोध किया था. अगर अमेरिका, ईरान पर हमला करता है तो ईरान इजरायल के अलावा इन्हीं अमेरिकी बेसों पर जवाबी हमला करेगा.  ईरान अमेरिका से युद्ध के लिए तैयार है और अब ये बात पूरी दुनिया को बता भी रहा है. अब आपको भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही के बयान को बहुत ध्यान से सुनना चाहिए. जिसमें उन्होंने कहा, ईरान हर चीज के लिए तैयार है. यानी ईरान, अमेरिका के सामने सरेंडर नहीं करेगा. ईरान के प्रतिनिधि ने अमेरिका पर ईरान में गड़बड़ी करने का आरोप भी लगाया है. 

ईरान की सेना पूरी ताकत से जवाब देने की तैयारी कर चुकी है. युद्ध टल सकता था अगर दोनों के बीच कोई डील हो जाती. अब डील के लिए ना अमेरिका तैयार है और ना ईरान. ऐसे में दुनिया दम साधकर मिडिल ईस्ट में कभी भी शुरू होने वाली जंग की खबर का इंतजार कर रही है.

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