क्या बंद हो जाएगा संयुक्त राष्ट्र? सिर्फ 141 दिन में पैसे खत्म, UN की तिजोरी खाली करने के पीछे कौन?

1 hour ago

UN financial crisis: पूरी दुनिया के झगड़े सुलझाने वाला संयुक्त राष्ट्र आज खुद एक ऐसे संकट में फंसा है जिससे उसका अस्तित्व खतरे में पड़ गया है. खबर चौंकाने वाली है. दुनिया की सबसे बड़ी संस्था के पास केवल जुलाई के अंत तक का खर्च चलाने लायक पैसा बचा है. करीब 35,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम बकाया राशि में से 95% हिस्सा अकेले महाशक्ति अमेरिका का है.

 महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की चेतावनी ने दुनिया भर में खलबली मचा दी है. उन्होंने कहा कि अगर समय रहते ये उधार नहीं चुकाया गया, तो दुनिया भर में चल रहे शांति अभियान और मानवीय कार्यक्रम ठप हो सकते हैं. क्योंकि देशों का ये बकाया यूएन को कंगाली की ओर धकेलने का काम कर रही है. 

बकाया का 95 % हिस्सा अमेरिका का
अमेरिका ने नियमित बजट के लिए लगभग 2.19 अरब डॉलर और सैन्य शांति अभियानों के लिए लगभग 1.8 अरब डॉलर लिए थे, जिसको अभी तक वापस नहीं दिया है. इस बकाया राशि के कारण ही यूएन के पैसे जुलाई के अंत तक खत्म हो जाएंगे.

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 इससे पहले 2025 में अमेरिकी प्रशासन ने यूएन को कोई रकम नहीं दी थी, और इसके कारण यूएन को वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ा है. यूएन अधिकारियों के अनुसार कुल बकाया राशि में लगभग 95 % हिस्सा ही अमेरिका का है.

आखिर कब पैसे वापस करेगा अमेरिका?
यूएन के प्रवक्ता ने बताया कि संगठन अमेरिका से बकाया को वापस देने के लिए बातचीत कर रहा है, ये भी जानने की कोशिश कर रहा है कि कितनी रकम कब और किस मात्रा में अमेरिका द्वारा दी जाएगी. जिससे वो आगे का प्लान कर सके. 

अमेरिका ने कुछ हफ्तों में बकाया राशि का शुरुआती भुगतान करने की योजना बताई है, लेकिन अंतिम रकम अभी तय नहीं हुई है. गुटेरेस और अमेरिकी अधिकारियों के बीच इस बारे में बातचीत चल रही है, लेकिन साफ तारीख या कुल राशि अभी सामने नहीं आई है.

जुलाई तक खत्म हो सकते हैं संस्था के पैसे
गुटेरेस ने पिछले सप्ताह सभी सदस्य देशों को लिखे एक पत्र में कहा कि अगर सभी देश समय पर अपनी कर्ज को भुगतान नहीं करते हैं या फाइनेंशियल नियमों को बुनियादी रूप से सुधार नहीं किया जाता है, तो यूएन आर्थिक पतन के कगार पर आ सकता है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यूएन को मिलने वाली रकम गिरती रही तो यह संस्था के पैसे जुलाई तक खत्म हो सकती है, जिसका असर उसके पूरे कामकाज पर पड़ेगा.

हालांकि दुनिया भर के कई देशों ने अपनी वार्षिक सदस्यता राशि समय पर चुका दी है, लेकिन बकाया रकम इतनी अधिक है कि इससे यूएन के दिन-प्रतिदिन के कामकाज, कार्यक्रमों और शांति अभियानों पर असर पड़ सकता है. 

दूसरी तरफ, वेनेज़ुएला भी बकाया रकम के कारण अपनी महासभा में वोटिंग की क्षमता खो चुका है. अगर यह समस्या जल्दी से हल नहीं होती तो संगठन की वित्तीय स्थिति पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ेगा.

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