America h1b visa scrap bill: अमेरिका में H1B वीजा योजना खत्म करने की तैयारी शुरू हो गई है. रिपब्लिकन सांसद ग्रेग स्ट्यूबी ने सोमवार को एक नया विधेयक पेश किया है. उन्होंने कहा कि H1B वीजा अमेरिकी नागरिकों के बजाय विदेशी कामगारों को ज्यादा प्राथमिकता देता है. इससे स्थानीय कर्मचारियों और युवाओं को नुकसान होता है. स्ट्यूबी ने बताया कि इस बिल का सबसे बड़ा असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ेगा, जो अमेरिका में तकनीकी और आईटी क्षेत्रों में काम करते हैं.
H1B वीजा योजना को बंद करने का प्रस्ताव
इस नए प्रस्तावित कानून का नाम एंडिंग एक्सप्लॉइटेटिव इम्पोर्टेड लेबर एग्जेम्प्शंस एक्ट यानी एक्साइल एक्ट है. यह विधेयक आव्रजन और राष्ट्रीयता अधिनियम में बदलाव करके H1B वीजा योजना को पूरी तरह बंद करने का प्रस्ताव करता है. स्ट्यूबी ने कहा कि अमेरिकी सपनों को गैर-नागरिकों को देने की वजह से अमेरिकी कर्मचारियों और युवाओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं. इसलिए उन्हें फिर से प्राथमिकता देने के लिए यह बिल पेश किया गया है.
विधेयक के अनुसार, 2027 से हर वित्तीय वर्ष में H1B वीजा की संख्या शून्य कर दी जाएगी. यह बदलाव आव्रजन और राष्ट्रीयता अधिनियम के सेक्शन 214(जी)(1)(ए) में किया जाएगा. H1B वीजा अमेरिका का नॉन-इमिग्रेंट वर्क वीजा है, जिसके तहत विदेशी विशेषज्ञ तकनीक, इंजीनियरिंग, चिकित्सा और वित्त जैसे क्षेत्रों में अमेरिकी कंपनियों में काम कर सकते हैं. इस योजना की शुरुआत विशेष योग्यता वाले विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका में काम देने के लिए की गई थी, लेकिन अब यह भारत और चीन जैसे देशों के पेशेवरों के लिए भी बड़ा रास्ता बन गया है.
70 प्रतिशत से ज्यादा भारतीय
भारतीय काम करने वालों पर इसका सीधा असर पड़ेगा. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, H1B वीजा पाने वालों में 70 प्रतिशत से ज्यादा भारतीय हैं. इनमें बड़ी संख्या युवा आईटी और टेक कर्मचारियों की है. अगर यह बिल पास हो गया, तो भारतीय पेशेवरों को अमेरिका में नौकरी पाने और रहने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है. यह बिल फिलहाल अमेरिकी प्रतिनिधिसभा में पेश किया गया है और अभी इस पर बहस या मतदान नहीं हुआ है.
अब इस बिल को संबंधित हाउस कमेटी के पास भेजा जाएगा, जो तय करेगी कि औपचारिक सुनवाई होगी या नहीं, प्रतिनिधिसभा से पास होने के बाद यह बिल सीनेट में जाएगा. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह विधेयक कानून बन गया, तो H1B वीजा योजना पूरी तरह बंद हो जाएगी और विदेशी पेशेवरों के लिए अमेरिका में काम करना मुश्किल हो जाएगा. भारतीय आईटी और तकनीकी पेशेवरों को इसे ध्यान में रखते हुए अपने करियर और वीजा विकल्पों की योजना बनानी होगी.

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