Last Updated:February 14, 2026, 13:41 IST
Hyderabad: हैदराबाद के होटल नयाब में साल 2021 में शुरू हुई 'किताब के बदले चाय' की पहल अब आधिकारिक रूप से बंद हो चुकी है. हालांकि सोशल मीडिया पर यह अब भी वायरल है पर हकीकत में यह फाउंडेशन का एक सफल और संपन्न हो चुका अभियान था जिसने हजारों बच्चों तक किताबें पहुँचाईं.
Hyderabad: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक संदेश बार-बार घूम रहा है कि “किताब दीजिए और मुफ्त में ईरानी चाय-बिस्किट लीजिए”. हैदराबाद के पुराने शहर की इस अनोखी पहल ने एक बार फिर नेटिजन्स का ध्यान खींचा है और लोग इस ‘किताबों के लंगर’ की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं. लेकिन जिस खबर को लोग आज अपनी वॉल पर शेयर कर रहे हैं उसकी वर्तमान हकीकत कुछ अलग है. यह शानदार पहल एक समय पर शुरू होकर अब थम चुकी है जिसकी पूरी कहानी जानना हर किसी के लिए जरूरी है ताकि अफवाहों और हकीकत के बीच का अंतर समझ आ सके.
डॉ. रवींद्रनाथ फाउंडेशन से मिली जानकारी के अनुसार यह कहानी साल 2021 की है. उस समय हैदराबाद के चारमीनार इलाके में स्थित ऐतिहासिक ‘होटल नयाब’ के बाहर एक अनोखा काउंटर लगाया गया था. इस सोच का मकसद बहुत सादा और नेक था कि अपनी अलमारी में धूल फांक रही कोई भी पुरानी किताब लाएं उसे दान करें और बदले में होटल की मशहूर ईरानी चाय और कड़क उस्मानी बिस्किट का लुत्फ उठाएं. इस अभियान का असली उद्देश्य युवाओं को स्मार्टफोन की आभासी दुनिया से निकालकर दोबारा पन्नों की असली खुशबू से जोड़ना था.
एक कप चाय और शिक्षा की अलख
यह महज एक विज्ञापन नहीं बल्कि एक बड़ा सामाजिक बदलाव साबित हुआ था. देखते ही देखते होटल के बाहर किताबों का बड़ा ढेर लग गया और हजारों की संख्या में उपन्यास, स्कूली किताबें और सामान्य ज्ञान की पुस्तकें जमा हुईं. इन इकट्ठा की गई किताबों को बाद में उन गरीब और जरूरतमंद बच्चों तक पहुँचाया गया जो महंगी किताबें खरीदने में असमर्थ थे. इस पहल ने दुनिया को यह संदेश दिया कि यदि नीयत नेक हो तो एक कप चाय के बहाने भी समाज में शिक्षा की अलख जगाई जा सकती है और ज्ञान का प्रसार किया जा सकता है.
वर्तमान हकीकत: संपन्न हो चुका है अभियान
सच्चाई यह है कि यह ‘किताबों का लंगर’ एक निश्चित समय का अभियान था जिसका एक खास लक्ष्य निर्धारित किया गया था. जब फाउंडेशन ने अपना लक्ष्य पूरा कर लिया और पर्याप्त मात्रा में किताबें इकट्ठा हो गईं तो इस कार्यक्रम को आधिकारिक तौर पर संपन्न कर दिया गया. आज होटल नयाब अपनी पुरानी रौनक और जायके के साथ चल रहा है लेकिन वहां वह ‘फ्री चाय’ वाला काउंटर अब मौजूद नहीं है. सोशल मीडिया पर जो वीडियो और फोटो अब वायरल हो रहे हैं वे उसी गौरवशाली अभियान की पुरानी यादें हैं जिसे लोग आज की खबर समझ रहे हैं.
मिसाल जो हमेशा जिंदा रहेगी
भले ही यह काउंटर अब बंद हो चुका हो लेकिन इस पहल ने समाज में एक बड़ी लकीर खींच दी है. इसने पूरी दुनिया को दिखाया कि लंगर सिर्फ खाने या अनाज का नहीं बल्कि ज्ञान का भी हो सकता है. होटल नयाब और डॉ. रवींद्रनाथ फाउंडेशन की यह जुगलबंदी आज भी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो छोटे-छोटे प्रयासों से समाज में बड़ा बदलाव लाना चाहते हैं. यह कहानी हमें सिखाती है कि महान विचार कभी पुराने नहीं होते भले ही उनके क्रियान्वयन का समय पूरा हो गया हो.
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Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra...और पढ़ें
Location :
Hyderabad,Hyderabad,Telangana
First Published :
February 14, 2026, 13:36 IST

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