Last Updated:January 20, 2026, 16:55 IST
Kokrajhar Violence: असम के कोकराझार में एक सड़क हादसे की अफवाह ने ऐसा रूप लिया कि हिंसा भड़क उठी. लोगों ने सड़क जाम कर दिए, गाड़ियां फूंक डाली. कई भवनों को आग लगा दिया. हालात यहां तक आ गए कि पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी. इंटरनेट सेवाएं बंद हैं और 29 गिरफ्तार किए जा चुके हैं.
असम के कोकराझार में तनाव पसरा हुआ है. इंटरनेट सेवाएं ठप हैं.कोकराझार/गुवाहाटी. असम में विधानसभा चुनावों की आहट के बीच माहौल एक बार फिर गरमा गया है. अभी कार्बी आंगलोंग की हिंसा की आग पूरी तरह ठंडी भी नहीं हुई थी कि अब बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (BTR) का मुख्यालय कोकराझार जल उठा है. एक सड़क दुर्घटना की अफवाह, भीड़ का उन्माद, लिंचिंग और उसके बाद भड़की बदले की आग ने पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है. हालात इतने खराब हो गए कि प्रशासन को इंटरनेट सेवाएं बंद करनी पड़ी हैं. पुलिस को भीड़ को खदेड़ने के लिए हवाई फायरिंग करनी पड़ी है, लाठियां भांजनी पड़ी हैं और आंसू गैस के गोले दागने पड़े हैं. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि शांत हो चुके असम में चुनाव से ठीक पहले हिंसा का यह पैटर्न बार-बार क्यों दोहराया जा रहा है? क्या यह महज संयोग है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश है?
कोकराझार के कारीगांव के गौरी नगर स्थित माशिंग रोड इलाके में सोमवार शाम को जो हुआ, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया. बवाल एक सड़क हादसे की अफवाह से शुरू हुआ. मदांडा बसुमतारी नाम के एक स्थानीय ठेकेदार माशिंग रोड इलाके में सड़क निर्माण का कार्य कर रहे थे. ठेकेदार के दामाद कुछ लोगों के साथ सामान लेने गए थे. जब वे लोग लौट रहे थे, तभी स्थानीय लोगों के एक समूह ने उन पर आरोप लगाया कि उनकी गाड़ी ने किसी को टक्कर मार दी है. देखते ही देखते अफवाह जंगल की आग की तरह फैल गई. आक्रोशित भीड़ ने कानून को अपने हाथ में ले लिया. भीड़ ने न केवल उनकी स्कॉर्पियो गाड़ी को आग के हवाले कर दिया, बल्कि गाड़ी में सवार लोगों को बाहर खींचकर बेतहाशा पीटा. इसमें एक शख्स की मौत हो गई.
गुस्साए लोगों ने थाना घेर लिया और आग लगाने की कोशिश की.
बदले की आग और सुलगता कोकराझार
सोमवार रात की घटना की खबर जैसे ही फैली, मंगलवार की सुबह होते-होते कोकराझार का कारीगांव युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया. एक पक्ष की हिंसा के जवाब में दूसरे पक्ष का गुस्सा फूट पड़ा.आक्रोशित स्थानीय लोगों और कुछ संगठनों ने कोकराझार के कारीगांव में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 27 (NH-27) को पूरी तरह से अवरुद्ध कर दिया. इससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई. सड़कों पर टायरों को जलाकर विरोध प्रदर्शन किया गया. गुस्साए उपद्रवियों ने केवल सड़क जाम नहीं किया, बल्कि सरकारी और निजी संपत्तियों को भी निशाना बनाया. उपद्रवियों ने बिरसा कमांडो के एक खाली शिविर को आग लगा दी. उपद्रवियों का गुस्सा यहीं नहीं थमा. उन्होंने वहां निर्माणाधीन आदिवासी सांस्कृतिक भवन को भी आग के हवाले कर दिया. कई गाड़ियों को भी फूंक दिया गया.
थाने का घेराव और फायरिंग
स्थिति तब और बिगड़ गई जब सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने कारीगांव पुलिस चौकी का घेराव कर लिया. भीड़ ने पुलिस बैरिकेड्स तोड़ दिए और थाना परिसर में घुसने की कोशिश की. पुलिस पर जमकर पथराव किया गया. भीड़ को बेकाबू होता देख पुलिस को कड़े कदम उठाने पड़े. पुलिस ने पहले लाठीचार्ज किया, फिर आंसू गैस के गोले दागे. जब इससे भी बात नहीं बनी, तो पुलिस को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हवा में कई राउंड फायरिंग करनी पड़ी. असम पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 29 लोगों को गिरफ्तार किया है. इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया है.
इंटरनेट सेवाएं बंद: अफवाहों पर लगाम की कोशिश
कोकराझार में बिगड़ते हालात को देखते हुए असम के गृह विभाग ने तत्काल प्रभाव से इंटरनेट सेवाओं को निलंबित कर दिया है. प्रशासन को डर है कि सोशल मीडिया के जरिए भ्रामक वीडियो और संदेश फैलाकर जातीय तनाव को और बढ़ाया जा सकता है.
कार्बी आंगलोंग से कोकराझार तक: क्या है पैटर्न?
यह घटना इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि कुछ ही दिन पहले असम के कार्बी आंगलोंग जिले में भी इसी तरह की हिंसा हुई थी. वहां भी दो समुदायों के बीच झड़प हुई थी, जिसके बाद कर्फ्यू लगाना पड़ा था. अब कोकराझार में बवाल हुआ है. असम पर नजर रखने वाले जानकारों का कहना है कि यह महज लॉ एंड ऑर्डर की समस्या नहीं हैं. इसके पीछे खास पैटर्न है.
कार्बी आंगलोंग और कोकराझार दोनों ही असम के बेहद संवेदनशील जातीय इलाके हैं. यहां बोडो, आदिवासी, कार्बी और अन्य समुदायों का पुराना इतिहास रहा है. छोटी सी चिंगारी भी यहां बड़े जातीय संघर्ष का रूप ले लेती है. असम में आगामी विधानसभा चुनाव और पंचायत चुनावों को देखते हुए राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं. इतिहास गवाह है कि चुनाव से पहले ध्रुवीकरण की कोशिशें होती हैं.‘किसने भड़काया?’
यह सबसे बड़ा सवाल है. क्या एक सड़क दुर्घटना की अफवाह इतनी बड़ी हिंसा का कारण बन सकती है? या फिर शरारती तत्वों ने सुनियोजित तरीके से दो समुदायों बोडो और आदिवासी टी-ट्राइब्स को भिड़ाने के लिए इसे तूल दिया? जिस तरह से आदिवासी सांस्कृतिक भवन और बिरसा कमांडो कैंप को निशाना बनाया गया, वह दर्शाता है कि हिंसा को एक खास ‘जातीय रंग’ देने की कोशिश की गई है.
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Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for 'Hindustan Times Group...और पढ़ें
First Published :
January 20, 2026, 16:41 IST

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