Last Updated:January 18, 2026, 15:00 IST
Mohan Bhagwat Speech : मोहन भागवत ने कहा कि धर्म भारत का मार्गदर्शक है, जिससे देश ‘विश्वगुरु’ बनेगा. जातिवाद खत्म करने के लिए मन से जाति मिटानी होगी. संघ समाज और राष्ट्र निर्माण पर केंद्रित है और समाज को साथ लेकर चलना चाहता है.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत. (फाइल फोटो)राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि जब तक धर्म भारत का मार्गदर्शन करता रहेगा, तब तक देश ‘विश्वगुरु’ बना रहेगा. उन्होंने कहा कि भारत के पास वह आध्यात्मिक ज्ञान है, जो दुनिया के अन्य हिस्सों में नहीं मिलता. आरएसएस प्रमुख ने इसके साथ ही कहा कि धर्म ही पूरे ब्रह्मांड को चलाने वाला सिद्धांत है और सृष्टि का हर कार्य उसी नियम के तहत होता है. उन्होंने कहा कि भारत को अपने पूर्वजों से एक समृद्ध आध्यात्मिक विरासत मिली है और सदियों से साधु-संतों के माध्यम से समाज को मार्गदर्शन मिलता रहा है.
मोहन भागवत ने कहा, ‘जब तक ऐसा धर्म भारत का मार्गदर्शन करता रहेगा, तब तक भारत विश्वगुरु बना रहेगा. दुनिया के पास इस तरह का ज्ञान नहीं है, क्योंकि वहां आध्यात्मिकता की कमी है. यह हमारे पूर्वजों की अमूल्य विरासत है.’ उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि चाहे कोई भी व्यक्ति हो… प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों, वे स्वयं हों या आम नागरिक सभी को एक ही शक्ति संचालित कर रही है. यदि जीवन उस शक्ति से संचालित हो, तो कोई दुर्घटना नहीं होगी. उस शक्ति का चालक धर्म है.
भागवत ने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ या धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन के नैतिक कर्तव्यों और अनुशासन से जुड़ा है. उन्होंने कहा कि राज्य भले ही धर्मनिरपेक्ष हो, लेकिन कोई भी मनुष्य या सृष्टि धर्म के बिना नहीं हो सकती. उन्होंने समझाया कि पानी का धर्म बहना है, आग का धर्म जलाना है, उसी तरह पुत्र, शासक और समाज के हर व्यक्ति का अपना-अपना कर्तव्य होता है, जिसे हमारे पूर्वजों ने गहन आध्यात्मिक शोध के जरिए समझा.
जातिवाद पर भागवत का बड़ा बयान
इससे पहले शनिवार को आरएसएस के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित जन संगोष्ठी में मोहन भागवत ने जातिवाद पर भी अहम टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि अगर समाज से जातिगत भेदभाव को खत्म करना है, तो सबसे पहले जाति को मन से मिटाना होगा. उन्होंने कहा कि पहले जाति का संबंध पेशे और काम से था, लेकिन समय के साथ यह समाज में गहराई से बैठ गई और भेदभाव का कारण बन गई.
भागवत ने लोगों से अपील की कि वे जातिवाद को अपने मन से निकालें. उन्होंने कहा, ‘यदि ईमानदारी से मन से जाति को मिटाने का प्रयास किया जाए, तो 10 से 12 वर्षों में जातिवाद समाप्त हो सकता है.’ इस मौके पर प्रांत संघचालक अनिल भालेराव भी मंच पर मौजूद थे.
संघ का उद्देश्य समाज और राष्ट्र निर्माण
जन संगोष्ठी में लोगों के सवालों का जवाब देते हुए भागवत ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उद्देश्य भारत को उसके सर्वोत्तम गौरव तक पहुंचाना है और समाज को साथ लेकर चलना है. उन्होंने कहा कि संघ व्यक्ति के चरित्र निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का कार्य करता है. संघ किसी प्रतिक्रिया के रूप में बनी संस्था नहीं है और न ही वह किसी से प्रतिस्पर्धा करता है.
भागवत ने कहा, ‘संघ खुद को बड़ा नहीं करना चाहता, बल्कि समाज को बड़ा बनाना चाहता है.’ उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई संघ को समझना चाहता है, तो उसे उसकी शाखाओं में आकर प्रत्यक्ष अनुभव करना चाहिए. मोहन भागवत के इन बयानों को धर्म, समाज और जातिवाद जैसे मुद्दों पर संघ की वैचारिक दिशा और सामाजिक दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है.
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An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T...और पढ़ें
Location :
Mumbai,Maharashtra
First Published :
January 18, 2026, 15:00 IST

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