ट्रंप से आर-पार, पुतिन की यलगार! ऑयल टैंकर को लेकर जंग का खतरा अबतक टला नहीं

10 hours ago

US Russia Tension: दुनिया में किसी भी वक्त एक बड़ी ग्लोबल वॉर छिड़ सकती है. इसकी वजह बन सकता है तेल का एक टैंकर. जिसे लेकर दुनिया के दो ताकतवर देश 35 साल बाद एक दूसरे से भिड़ गए हैं. खतरा कितना बड़ा है इसका अंदाजा यूं लगा लीजिए कि दुनिया के 90 फीसदी न्यूक्लियर बम इन्हीं दो देशों के पास हैं. हाल ही में तेल का एक टैंकर वेनेजुएला की ओर बढ़ रहा था, जैसे ही वो नॉर्थ अटलाटिंक महासागर में दाखिल हुआ. अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने उसे रोकने की कोशिश की. टकराव टालने के लिए जहाज पर फौरन रूसी झंडा लगाया गया. आगे अमेरिकी कोस्ट गार्ड का चॉपर जहाज के ऊपर रुका और अमेरिकी फौज ने उसे अपने कब्जे में लेने का ऐलान कर दिया गया.

लेकिन सवाल ये है कि अगर मैरिनेरा को रशियन न्यूक्लियर सबमरीन एस्कॉर्ट कर रही थी. तो फिर अमेरिकी फोर्स इस टैंकर पर कब्जा करने में कामयाब कैसे हो गई? पहले ये जान लीजिए कि क्या रूस को इस खतरे का पता नहीं था. दरअसल अमेरिका ने 3 जनवरी को जिस वक्त वेनेजुएला पर हमला किया था. ठीक उसी वक्त ऐलान कर दिया था कि वेनेजुएला के तेल पर सिर्फ उसका हक है. इतना ही नहीं अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को वेनेजुएला की कमान सौंपते वक्त भी ट्रंप ने उनके सामने 3 शर्त रखी थीं.

पहली शर्त-वेनेजुएला को रूस, चीन और ईरान से सभी व्यापारिक रिश्ते तोड़ने होंगे.
दूसरी शर्त- तेल उत्पादन में सिर्फ अमेरिका के साथ साझेदारी करनी होगी.
तीसरी शर्त- तेल बिक्री में अमेरिका को प्राथमिकता देनी होगी.

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मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जिस रशियन टैंकर मैरिनेरा को अमेरिकी फोर्स ने जब्त किया. उसे रूस के पांच 5 वॉरशिप और BS-329 बेलगॉरॉड सबमरीन एस्कॉर्ट करने के लिए आगे बढ़ रही थी. मगर पुतिन के ये महाबली उत्तरी अंटलांटिक महासागर में दाखिल होते. उससे पहले ही मैरिनेरा टैंकर को आइसलैंड के पास पकड़ लिया गया. जिसके बाद रूस  तिलमिला गया है. पुतिन के बेहद करीबी और रूसी सांसद एलेक्सी ज़ुरावलेव ने तो अमेरिका पर परमाणु हमला करने की धमकी तक दे डाली है. 

पोसाइडन की ताकत

एलेक्सी ज़ुरावलेव ड्यूमा की रक्षा समिति के पहले डिप्टी हेड हैं, उन्होंने अमेरिका को जोरदार अंदाज में धमकी दी है. बता दें कि ज़ुरावलेव ने जिस टॉरपीडो से न्यूक्लियर हमले की बात कही है. वो किसी भी मुल्क में सुनामी ला सकता है. पोसाइडन नाम की टॉरपीडो को पुतिन ने अमेरिका और ब्रिटेन जैसे दुश्मनों के लिए ही संभालकर रखा है. जो समंदर किनारे बसे शहरों को चंद मिनट में डुबो सकता है.

पुतिन का पोसाइडन कितना खतरनाक इसका अंदाजा इस बात से लगा लीजिए कि ये आम पनडुब्बी से लॉन्च नहीं किया जा सकता है. रूस ने इसे दागने के लिए बेलगोरोड नाम की पनडुब्बी रखी है. पुतिन की ये वही भरोसेमंद सबमरीन है, जिसे तेल टैंकर मैरिनेरा को एस्कॉर्ट करने के लिए भेजा गया.

न्यूक्लियर एनर्जी से चलने वाली पनडुब्बी 604 फीट लंबी और 30,000 टन वजनी है. माना जाता है कि बेलगोरोड एक समय में आठ पोसीडॉन दाग सकती है. इसमें हर पोसाइडन टारपीडो 79 फीट लंबा है, जो पानी की सतह से लगभग 80 मील प्रति घंटे की स्पीड से हमला करता है. दावा है कि रूस का रहस्यमयी हथियार पोसाइडन 100 मेगाटन के न्यूक्लियर वॉरहेड से हमेशा लैस रहता है.

रूस के आर्थिक हालात भले ही ठीक ना हो. मगर उसके पास 3 ऐसी ताकत हैं, जिससे सुपरपावर भी खौफ खाता है.

नंबर-1 रूस के पास अमेरिका से भी ज्यादा परमाणु बम हैं. जिनकी संख्या 5,580 है.
नंबर-2 रूस के पास अमेरिका से भी ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइले हैं. जिनकी संख्या 10 हजार से ज्यादा है.
नंबर-3 रूस के पास की तरह की हाइपरसोनिक मिसाइलें भी हैं. जिनकी रेंज में अमेरिका का हर शहर आता है.
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व्हाइट हाउस प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने कहा, 'ये वेनेजुएला का शैडो फ्लीट जहाज था, 'जिसे अमेरिका ने प्रतिबंधित किया गया था.' व्हाइट हाउस की तरफ से भले ही इसपर सफाई दी जा रही हो. मगर जैसा एक्शन अमेरिका ने लिया उसके नफे-नुकसान को उसने पहले ही आंक लिया होगा.

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