तो क्या तख्तापलट के डर से चीन पहुंचे मुहम्मद युनुस, अब जिनपिंग से कौन सी डील कर रहे?

1 week ago

Bangladesh China Relations: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस बुधवार शाम चीन के हैनान राज्य पहुंचे. चीन में बांग्लादेश के राजदूत मोहम्मद नजमुल इस्लाम और हैनान के उप-राज्यपाल ने क्यून्गाई बोआओ अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया. यूनुस के कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा,'मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस बुधवार को बांग्लादेश मानक समय के मुताबिक शाम 4:15 बजे चीन के हैनान पहुंचे. बांग्लादेश के चीन राजदूत मोहम्मद नजमुल इस्लाम और हैनान प्रांत के उप-गवर्नर ने हैनान के क्यून्गाई बोआओ अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया.'

28 मार्च को जिनपिंग से मुलाकात

इससे पहले बुधवार को बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि इस यात्रा के दौरान यूनुस 28 मार्च को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मुलाकात करेंगे. उनकी चीन यात्रा के दौरान दोनों देश कुछ समझौतों पर दस्तखत करेंगे. इस महीने की शुरुआत में ढाका में चीनी राजदूत याओ वेन ने मोहम्मद यूनुस से मुलाकात की थी.

दो भरोसेमंद करीबी दोस्तों का 50 साल पुराना रिश्ता?

याओ वेन ने कहा कि मुख्य सलाहकार की चीन की आगामी आधिकारिक यात्रा दो 'भरोसेमंद' और करीबी दोस्तों के बीच 50 साल पुराने संबंधों में सबसे महत्वपूर्ण होगी. यूनुस 'एशिया इन ए चेंजिंग वर्ल्ड: टुवर्ड्स ए शेयर्ड फ्यूचर' विषय पर भाषण देंगे. सत्र के दौरान चीनी कार्यकारी उपप्रधानमंत्री भी उनके साथ शामिल होंगे. राजदूत ने कहा कि दुनिया के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों में से एक, पेकिंग विश्वविद्यालय प्रोफेसर यूनुस को मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान करेगा.

भारत-अमेरिका से पहले ही रिश्ते खराब

हालांकि राजनीतिक विश्लेषक मोहम्मद यूनुस के इस दौरे को तीसरी आंख से भी देख रहे हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है यूनुस की यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब उसके रिश्ते भारत के साथ ठीक नहीं चल रहे हैं. शेख हसीना की अवामी लीग के सत्ता से बेदखल होने के बाद से भारत और बांग्लादेश के साथ राजनयिक संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं. दूसरी तरफ चीन और भारत के भारत और चीन के बीच क्षेत्रीय प्रभुत्व के सवाल पर तनातनी चल रही है.

क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट्स?

ना सिर्फ भारत बल्कि चीन और अमेरिका के बीच की खींचतान किसी से छिपी नहीं है. डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के संबंधों में कड़वाहट और बढ़ी है. ऐसे में समय में मोहम्मद यूनुस का चीन का जाना कई तरह के सवाल खड़ा रहा है. कहा जा रहा है कि मोहम्मद यूनुस तख्तापलट को बचाने के लिए चीन के सामने बहुत से उम्मीदें लेकर गए हैं. विश्लेषकों का मानना है कि चीन और बांग्लादेश के साथ भारत-अमेरिका के रिश्ते पहले ही ठीक नहीं हैं, तो ऐसे में इन दोनों के बीच रिश्ते और गहरे हो सकते हैं. साथ ही चीन बांग्लादेश की बिगड़ती हालत को सहारा दे सकता है.

किन क्षेत्रों में मिलेगी मदद?

इन वजहों से इस मुद्दे पर भी चर्चा हो रही है कि मोहम्मद यूनुस की चीन यात्रा से बांग्लादेश के पड़ोसी भारत और अमेरिका के साथ संबंधों पर असर पड़ेगा. लेकिन इन तमाम मुद्दों के बावजूद विश्लेषकों का मानना है कि मुख्य सलाहकार के इस दौरे से बांग्लादेश को आर्थिक और व्यापारिक क्षेत्र में फायदा मिलने की संभावना ही ज़्यादा है. 

पहले से ही है चीन की तरफ झुकाव

ये पहली बार नहीं है जब बांग्लादेश का झुकाव चीन की तरफ हुआ हो. शेख हसीना के तख्तापलट के बाद मोहम्मद यूनुस सरकार ने ये इशारा तुरंत दे दिया था कि उसकी प्राथमिकता भारत नहीं. क्योंकि अंतरिम सरकार के विदेश मंत्रालय के सलाहकार तौहीद हुसैन ने अपनी पहली आधिकारिक यात्रा चीन की ही थी. जो इस साल की शुरुआत (जनवरी) में हुई थी.

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