Last Updated:February 04, 2026, 13:55 IST
India Desi 5th Gen Fighter Jet AMCA Update: भारत ने देसी फिफ्थ जेन फाइटर जेट प्रोजेक्ट एम्का प्रोजेक्ट में तेजी ला दी है. अब इस फाइटर जेट के प्रोडक्शन से एचएएल को बाहर कर दिया गया है. ऐसा एचएएल पर वर्क लोड को देखते हुए किया गया है. इसके प्रोटोटाइप बनाने के लिए अब तीन कंपनियों के कंसोर्ट को चुना गया है. जो सबसे कम बम बोली लगाएगा उसके यह प्रोजेक्ट दे दिया जाएगा. ताकि संभावित जेट के प्रोडक्शन में कोई दिक्कत न आए.

India Desi 5th Gen Fighter Jet AMCA Update: तेजस फाइटर जेट की सफलता के बाद भारत अपने 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट बनाने के काम पर तेजी से आगे बढ़ रहा है. बीते साल ऑपरेशन सिंदूर के खात्मे के बाद सरकार ने आधिकारिक तौर पर एडवांस फाइटर जेट प्रोजेक्ट एम्का को मंजूरी दी गई थी. इसके लिए सरकार ने शुरुआती तौर पर 15 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया था. इस प्रोजेक्ट के लिए रिसर्च का काम डीआरडीओ की सहयोगी इकाई एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) कर रही है. एडीए ने ही तेजस फाइटर जेट बनाए हैं. एडीए ने ही तेजस मार्क-2 को डेवलप किया है. तेजस मार्क-2 की टेस्ट फ्लाइट इसी साल शुरू होने की उम्मीद है. तेजस मार्क-2, 4.5 पीढ़ी का एक बेहद एडवांस फाइटर जेट है. इसके बाद एचएएल इन फाइटर जेट्स का उत्पादन करेगी. लेकिन, लेट-लतीफी के कारण एचएएल की आलोचना होती है. तेजस प्रोजेक्ट 1980 के दशक से चल रहा है लेकिन, अभी तक इसके 40 यूनिट ही मिल पाए हैं.
एम्का को लेकर बड़ा अपडेट
अब इस फिफ्थ जेन फाइटर जेट प्रोजेक्ट यानी एम्का को लेकर एक बड़ा अपडेट आया है. इसके निर्माण प्रक्रिया से एचएएल बाहर हो गई है. एचएएल पब्लिक सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनी है. इसने सुखोई 30 एमकेआई जैसे एडवांस फाइटर जेट को असेंबल किया है. लेकिन, उसकी कार्यशैली पर लगातार सवाल उठते रहे हैं. एक्सपर्ट ये भी बताते हैं कि एचएएल पर जरूरत से ज्यादा दबाव है. इस कारण वह डिलिवरी नहीं कर पा रही है. उसके बहुत सारे प्रोजेक्ट अटके हुए हैं.
दरअसल, हिंदुस्तान टाइम्स अखबार ने एक रिपोर्ट छापी है. इसमें कहा गया है कि भारत के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी एएमसीए प्रोग्राम से एचएएल को बाहर कर दिया गया है. यह पहली बार है जब देश के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य प्रोजेक्ट में एचएएल की कोई भूमिका नहीं होगी. पिछले साल एडीए ने पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के प्रोटोटाइप बनाने, फ्लाइट टेस्ट करने और सर्टिफिकेशन के लिए कंपनियों से एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट (EoI) मांगा था. इसके लिए सरकारी और निजी सेक्टर की कुल सात कंपनियों की कंसोर्टिया ने बोली लगाई थी. इसमें से तीन कंसोर्टिया ही अनिवार्य मापदंडों पर खरी उतरीं. ये कंसोर्टिया पांच एम्का प्रोटोटाइप और एक स्ट्रक्चरल टेस्ट स्पेसिमेन बनाने के लिए अपनी लागत की बोली जमा करेंगे.
एचएएल 4.5 पीढ़ी के तेजस मार्क1ए फाइटर जेट का प्रोडक्शन कर रही है. फोटो- रायटर
एचएएल क्यों हुई आउट?
हिंदुस्तान टाइम्स अखबार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि इसमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम लिमिटेड, लार्सन एंड टुब्रो और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड का कंसोर्टिया, भारत फोर्ज लिमिटेड के साथ भीईएमएल तथा डेटा पैटंर्स के नाम आगे हैं. अन्य बोली दाताओं में अडानी डिफेंस, गुडलक इंडिया के साथ ब्रह्मोस एयरोस्पेस तिरुवंतपुर और एक्सिसकेड्स टेक्नोलॉजीज शामिल हैं. अब सबसे कम बोली लगाने वाली कंसोर्ट को तीन महीने में कॉन्ट्रैक्ट दिया जाएगा. यह प्रोजेक्ट ब्रह्मोस एयरोस्पेस को मिलता है तो ऐसी संभावना जताई जा रही है कि इसको क्रियान्वित करने में काफी तेजी आ जाएगी. ब्रह्मोस एयरोस्पेस भारत और रूस का एक संयुक्त उपक्रम है जो ब्रह्मोस मिसाइलें बनाती है. ब्रह्मोस दुनिया की सबसे घातक क्रूज मिसाइलों में शुमार है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने इस ब्रह्मोस की मार का स्वाद चख चुका है.
एचएलए पर भारी बोझ
हिंदुस्तान टाइम्स ने एचएएल के चेयरमैन डीके सुनील के हवाले से लिखा है कि कंपनी का ऑर्डर बुक उसके टर्नओवर का लगभग आठ गुना है. जबकि ईओआई में ऑर्डर बुक टर्नओवर तीन गुना से अधिक होने पर जीरो मार्क्स मिलते हैं. इस कारण एचएएल इस पूरी प्रक्रिया से अलग हो गई. ऐसा इसलिए किया गया ताकि एम्का प्रोजेक्ट में किसी प्रकार की देरी न हो.
भारत फ्रांस के साथ 114 राफेल विमानों का सौदा करने की तैयारी में है.
राफेल के साथ डिलीवरी की योजना
भारत सरकार चाहती है कि तेजस विमानों की तरह एम्का प्रोजेक्ट में देरी न हो. एयरफोर्स का लक्ष्य 2035 से 120 देसी स्टील्थ फाइटर जेट हासिल कर कम से कम इसके छह स्क्वाड्रन तैयार करने की है. यह समय अवधि करीब-करीब वही है जब राफेल फाइटर जेट की डिलिवरी चल रही होगी. फ्रांस के साथ 114 राफेल विमानों की संभावित डील के तहत भारत में लगने वाले प्लांट से 2030 के आसपास डिलिवरी शुरू होगी. पूरे विमानों की डिलिवरी 2035 से 2038 तक पूरी होने की संभावना है. ऐसे में सरकार और एयरफोर्स की योजना है कि राफेल की डिलिवरी पूरा होने से पहले किसी भी हाल में देसी एम्का की डिलिवरी स्टार्ट हो जाए.
इसी कारण यह पूरी कवायद की जा रही है. एचएएल पर पहले से वर्क ऑर्डर के बोझ तले दबी हुई है. सरकार की योजना देश में डिफेंस प्रोडक्शन में प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा देने की है, जिससे की भारत में भी ग्लोबल लेबल की डिफेंस इंडस्ट्री खड़ी हो सके.
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न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स...और पढ़ें
First Published :
February 04, 2026, 13:51 IST

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